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के आसिफ जिसने जिस भी हीरो को अपनी फिल्म के लिए साइन किया, उसकी मौत हो गई

के आसिफ जिसने जिस भी हीरो को अपनी फिल्म के लिए साइन किया, उसकी मौत हो गई , ये बात बहुत कम लोगों को पता है कि के आसिफ ने अपनी ब्लॉक बस्टर फिल्म मुगल ए आजम का पहला नाम अनारकली रखा था और नूतन को उस रोल के लिए साइन किय़ा था। इटावा में पले बढ़े के आसिफ ने अपनी पहली फिल्म फूल डायरेक्टर की थी 1945 में, जिसमें उन्होंने पृथ्वीराज कपूर, दुर्गा खोटे और सुरैया को लिया था। के. आसिफ का सपना था मुगल ए आजम, 15 साल लग गए इस सपने को पूरा करने में।

फिल्म सुपरहिट रही लेकिन उसी दौरान उन्होंने मुगल ए आजम का सपना देखा। आधार बनाया गया सैयद इम्तियाज अली ताज के उपन्यास अनारकली को और नूतन के साथ हीरो चुने गए थे चंद्रमोहन। सोहराब मोदी की फिल्म पुकार में उन्हें जहांगीर के रोल के लिए जाना जाता है। दस रील शूट भी हो गईं, लेकिन चंद्रमोहन की अचानक मौत ने आसिफ का खासा नुकसान कर दिया। वो सारे सीन फिर से शूट करने पड़े थे।

इधर नूतन दिलीप कुमार के साथ काम करना चाहती थीं, इसलिए दिलीप को इसमें साइन कर लिया गया। फिर अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि नूतन ने अनारकली का रोल करने से मना कर दिया। इसकी वजह बस तीन लोगों को पता थी, एक दिलीप कुमार, दूसरे के आसिफ और तीसरी खुद नूतन। लेकिन किसी ने इस राज का कभी खुलासा नहीं किया। के आसिफ ने नूतन के इनकार के बाद ना सिर्फ मधुबाला को साइन कर लिया बल्कि फिल्म का नाम अनारकली से बदल कर मुगल ए आजम कर दिया।

मुगल ए आजम के बाद के आसिफ कोई फिल्म ही नहीं बना पाए। वो करते भी क्या उनका हीरो ही मर जाता था, मुगल ए आजम के चंद्रमोहन शूटिंग के दौरान ही मर गए तो गुरुदत्त की मौत 1964 में लव एंड गॉड की शूटिंग के दौरान हो गई। फिर उन्होंने गुरुदत्त की जगह संजीव कुमार को साइन कर लिया, लैला मजनूं की कहानी पर बनने वाली इस फिल्म में निम्मी लैला के रोल में थीं। लेकिन इस बार 1971 में के आसिफ की मौत हो गई औऱ उनकी मौत के 23 साल बाद उनकी बीवी ने 1986 में इस फिल्म को अधूरी ही रिलीज किया था।