वाणी जयराम, जिनकी आवाज़ में शहद घुला है, जन्मदिन विशेष

वाणी जयराम, जिनकी आवाज़ में शहद घुला है, जन्मदिन विशेष, वाणी जयराम का 30 नवंबर 1945 को तमिलनाडु के वेलोर में जन्म हुआ था। परिवार में शुरुआत से ही संगीत का माहौल था। आठ साल की उम्र में उन्होंने मद्रास के ऑल इंडिया रेडियो में पहला गाना गाया था।

उन्होंने कर्नाटक संगीत की भी विधिवत् शिक्षा ली थी। शास्त्रीय संगीत की शिक्षा उन्होंने उस्ताद अब्दुल रहमान खान से ली थी। शादी के बाद वो मुंबई शिफ्ट हो गई थीं। 1970 में संगीतकार वंसत देसाई उन्हें हिंदी फिल्मों में लाए। उनके गाने हिट होने लगे और कुछ ही समय में उन्हें मियां तानसेन अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म गुड्डी में वंसत देसाई के संगीत से सजे गाने बोले रे पपिहरा को गाना कौन भूल सकता है। गुड्डी फिल्म में ही उनका एक और गाना था, ‘हमको मन की शक्ति देना’, ये गाना इतना मशहूर हुआ कि इसे स्कूलों में सुबह की प्रेयर के तौर पर भी गाया जाने लगा।

इसके बाद उन्होंने मशहूर संगीतकारों चित्रगुप्त, नौशाद, मदन मोहन, ओ पी नैयर, आर डी बर्मन, कल्याणजी-आनंदजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, जयदेव के साथ भी काम किया। इसके अलावा उन्होंने मराठी, गुजराती, भोजपुरी और उड़िया फिल्मों में भी गाना गाया।

उन्हें 25 अवॉर्ड्स मिले। इनमें तीन राष्ट्रीय अवॉर्ड्स भी शामिल थे। उन्होंने 18 भाषाओं में गाना गाया। वह कर्नाटक और हिंदुस्तानी दोनों ही शैलियों में गा सकती थीं। 72 साल की उम्र में भी वह गाना जारी रखे हैं। आज भी जब उन्हें बुलाया जाता है, तो वह खुशी-खुशी कॉन्सर्ट में गाने जाती हैं।

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