रामायण के प्रसारण से टीवी कलाकारों में खुशी

रामायण के प्रसारण पर ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में तिवारी जी की भूमिका निभा रहे रोहिताश्व गौड़ कहते हैं, ‘‘भारत की पौराणिक कथाओं के मामले में छोटे शहरों के बच्चे ज्यादा जानकारी रखते हैं, क्योंकि उन्हें कहानियाँ पता होती हैं, जिसका कारण है राम-लीला और महाभारत का मंचन देखना। बड़े शहरों के बच्चे बमुश्किल जानते हैं कि इन कहानियों का अर्थ क्या है, वे उनमें गहरी रूचि नहीं दिखाते हैं। ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के कारण कंटेन्ट का कंजम्पशन बहुत तेज हो गया है।

अधिकांश बच्चे इन शोज को धीमी गति का पाएंगे। मैं विभिन्न अवसरों पर बच्चों से पौराणिक कथा सम्बंधी प्रश्न पूछकर उन्हें शिक्षित करता हूँ। हालांकि, मुझे लगता है कि आकर्षक दिखने वाले वर्णन के साथ वर्तमान पीढ़ी को यह शोज दिखाने से उनकी रूचि मिलेगी। मैं -ज्ट के सभी दर्शकों, खासकर मेट्रो शहरों के दर्शकों से आग्रह करता हूँ कि अपने बच्चों को रामायण और महाभारत जैसे शोज देखने के लिये प्रोत्साहित करें। यह सबसे अच्छा समय है और संभवतः यही समय है, जब आप घर बैठकर ऐसे अर्थपूर्ण शोज का आनंद ले सकते हैं। घर में रहें, सुरक्षित रहें, क्योंकि हम घर के अंदर तो कोरोना बाहर!’’

&tv के ‘कहत हनुमान जय श्रीराम‘ में महाराज केसरी की भूमिका निभा रहे जितेन लालवानी कहते हैं, ‘‘महाभारत, रामायण और जय हनुमान हमेशा से मेरे पसंदीदा हैं। मैं इन शो को देखकर बड़ा हुआ हूँ और इस शैली के प्रति मेरी रुचि इसी तरह से विकसित हुई है। मेरा मानना है कि कई आकर्षक कहानियों के माध्यम से ये शो एक छिपे हुए संदेश को व्यक्त करते हैं, जो कि पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक है। जब हम अपने बच्चों के बीच नैतिक मूल्यों को बढ़ाने की कोशिश करते हैं, मेरा मानना है कि ये शो ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका हैं।

निजी तौर पर, मैंने हमेशा अपने बच्चों के साथ इन कहानियों के प्रति रुचि रखने की कोशिश की है। वे इन कहानियों को एनिमेटेड रूप में देखना पसंद करते थे और आज भी जानते हैं कि वे हमेशा कहानियों को सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं। इसके अलावा, वे मेरे शो कहत हनुमान जय श्रीराम का आनंद लेते हैं, और अब जब रामायण भी टीवी पर दिखाई जाएगी, हम इसे एक परिवार के रूप में देखने के लिए तत्पर हैं। हमारे सभी दर्शकों को हैप्पी राम नवमी। घर पर रहें और सुरक्षित रहें, क्योंकि हम घर के अंदर तो कोरोना बाहर।’’

&tv ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की कटोरी अम्मा हिमानी शिवपुरी कहती हैं, ‘‘रामायण ने मुझे हमेशा मंत्रमुग्ध किया और मेरे बढ़ते वर्षों के दौरान जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा रही। मनोरंजन पिछले कुछ वर्षों में विविधतापूर्ण हो सकता है, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ बच्चे आज भी इन कहानियों से सम्बंधित हैं और उन्हें देखना भी पसंद करते हैं। मेरी राय में कोई अन्य शो नहीं हैं जो उन्हें धैर्य, बलिदान और सच्चाई के मूल्य जैसी चीजें सिखा सकते हैं।

ये गुण बच्चों को आत्मनिर्भर, धार्मिक और साहसी इंसान बनाने में मौलिक हैं। मैं इस अवधि के दौरान अपने बेटे के साथ इन सभी शो को फिर से देख रही हूँ और मैं -ज्ट टीवी के दर्शकों को भी इन शो को देखने के लिए घर पर अपने बच्चों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगी, क्योंकि हम घर के अंदर तो कोरोना बाहर!’’

‘कहत हनुमान जय श्रीराम‘ में बाली की भूमिका निभा रहे निर्भय वाधवा कहते हैं, ‘‘आज की पीढ़ी निश्चित रूप से पौराणिक शो से सम्बंधित है, क्योंकि इस तरह के शो की प्रस्तुति में सामान्य मनोरंजन चैनलों की जगह काफी बढ़ गई है। वीएफएक्स और ग्राफिक्स के निरंतर विकास के साथ, शो पुराने क्लासिक्स की तुलना में शानदार और जीवन से बड़े दिखते हैं।

इन दिनों पौराणिक शो ने विश्वास और आध्यात्मिकता के कारण प्रेरणा दी है कि माता-पिता बहुत कम उम्र में बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं। मेरे बचपन में, चूंकि टेलीविजन पर बहुत कम चैनल उपलब्ध थे, हम केवल रामायण या महाभारत देखते थे। टेलीविजन उद्योग के विकास के साथ, इन दिनों बच्चों के पास देखने के लिए कई तरह के पौराणिक शो हैं।

महाभारत और रामायण से इतर हमेशा से मेरा पसंदीदा पौराणिक शो विष्णुपुराण है, जो मेरे बड़े होने पर प्रसारित हुआ था। मुझे लगता है कि टेलीविजन पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार की पौराणिक सामग्री बच्चों को अपनी संस्कृति की गंभीरता को देखने और समझने के लिए प्रेरित करती है। वर्तमान परिदृश्य को राष्ट्रीय स्तर पर देखते हुए, मैं सभी दर्शकों से आग्रह करना चाहता हूं कि वे घर के अंदर रहें और ऐसे शो देखें जो सकारात्मकता लाते हैं, क्योंकि रुहम घर के अंदर तो कोरोना बाहर।’’

‘संतोषी माँ-सुनायंे व्रत कथाएं‘ में इंद्रेश की भूमिका निभा रहे आशीष कादियान कहते हैं, “मेरे सभी समय के पसंदीदा पौराणिक शो जय हनुमान और रामायण हैं, क्योंकि इनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है, जिसमें राम और हनुमान के चरित्रों के माध्यम से संयमित होना शामिल है। आज बच्चे भक्ति शो में कार्टून देखना पसंद करते हैं, लेकिन मुझे खुशी है कि अधिक से अधिक परिवार अपने बच्चों को पौराणिक सामग्री देखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

मैं सभी बच्चों से आग्रह करता हूं कि वे भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने के लिए उनके जैसे शो देखें। चूंकि पूरी तरह से लॉकडाउन है और लोग घर पर हैं, इसलिए वे संतोषी मां- सुनायें व्रत कथायें भी देख सकते हैं, जो विभिन्न व्रतों के बारे में है, जो कि आध्यात्मिक शुचिता बनाये रखने के लिये किया जा सकता है। मैं हर किसी से घर पर रहने की अपील करता हूँ, जब तक कि कोई आपात स्थिति न हो, क्योंकि रुहम घर के अंदर तो कोरोना बाहर।’’

‘भाबीजी घर पर हैं‘ में अंगूरी भाभी की भूमिका निभा रहीं शुभांगी अत्रे कहती हैं, “मैं बचपन से ही हमेशा पौराणिक शो देखना पसंद करती थी और रामायण हमेशा से मेरी पसंदीदा रही है। उस दौरान केवल एक प्रसारण चैनल था और घर पर हर कोई परिवार के साथ उसे देखने के लिए तत्पर रहता था। मैं अपनी बेटी को भी यही प्रेरणा देने की कोशिश करती हूँ।

इसलिए, जब से वह पैदा हुई थी, तब से मैं उसे पौराणिक कहानियाँ सुनाती आ रही हूँ और वह जिज्ञासावश मुझसे देवी-देवताओं के बारे में पूछती है। मैं ख़ुशी से कह सकती हूँ कि उसने इस शैली के प्रति एक पसंद भी विकसित की है, और वह टीवी पर मेरे साथ पौराणिक शो देखना पसंद करती है। वर्तमान पीढ़ी आध्यात्मिकता और आस्था की शक्ति के बारे में अधिक से अधिक जागरूक हो रही है और इसलिए वे हमारे विपरीत शैली की ओर आकर्षित हैं, जिन्होंने इन शो को देखा, क्योंकि उस समय और कुछ भी उपलब्ध नहीं था।

मुझे लगता है कि पौराणिक शैली में बहुत कुछ बदल गया है और अब बच्चों को केवल रामायण या महाभारत ही नहीं, बल्कि देवताओं की अलग-अलग कहानियाँ भी देखने को मिलती हैं। इसके अलावा, यह आत्मिक शांति और धीरज बनाए रखने का समय है, इसलिए कृपया हल्का-फुल्का कंटेन्ट देखें और घर पर रहें क्योंकि, रुहम घर के अंदर तो कोरोना बाहर।’’

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