श्वेता चौधरी जिनके सामने मुश्किलों ने घुटने टेक दिए, हौसला ऐसा था बुलंद

श्वेता चौधरी जिनके सामने मुश्किलों ने घुटने टेक दिए, हौसला ऐसा था बुलंद , प्रसिद्धि किसी की भी ज़िन्दगी में इतनी आसानी से नहीं आती है और श्रीमती इंडिया अर्थ 2017 विजेता श्वेता चौधरी उन नामों में से एक हैं जिनकी खुदकी एक दर्द भरी कहानी है। श्वेता के लिए सफलता और प्रसिद्धि कभी भी आसान नहीं थी।

श्वेता का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के एक मध्यम वर्ग के परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की और मॉडलिंग में अपने करियर की तलाश के लिए वह मुंबई चली गयी। उनकी यह इच्छा थी की वह एक कामयाब अभिनेत्री बने लेकिन उनके पिता की अचानक मृत्यु ने उन्हें मॉडलिंग छोड़ने पर विवश कर दिया।

अपने परिवार के लिए उन्होंने अपने सपनों का बलिदान किया और एक इंजीनियरिंग फर्म में शामिल हो गई। वहां उन्होंने अमित चौधरी से मुलाकात की, जिनके साथ वह 2007 में शादी के बंधन में बंध गयी। लेकिन अमित उनके सपनों को पहचान गए और उसके बाद उन्होंने श्वेता का हौसला बढ़ाया और फिर श्वेता ने कई विज्ञापन फिल्मों और कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों काम किया। इसके बाद श्वेता श्रीमती इंडिया अर्थ 2017 ब्यूटी कॉम्पटीशन में शामिल हुईं ।

रितिका रामित्री की निगरानी में श्वेता ने प्रतियोगिता के लिए प्रशिक्षण लिया। अपने जीतने पर उन्होंने इस तरह के मंच को उपलब्ध कराने के लिए श्रीमती इंडिया अर्थ के राष्ट्रीय निदेशक, श्री विनय और श्रीमती रितिका का शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने कहा, “विनय और श्रीमती रितिका ने मेरा बहुत समर्थन किया और मार्गदर्शन दिया है जिसकी वजह से मैं यह प्रतियोगिता जीत पायी।” श्वेता एक प्रशिक्षित कथक नर्तक, एक समग्र चिकित्सक और दो बच्चों की मां है। वह कई सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, “श्रीमती इंडिया अर्थ सिर्फ सुंदरता के बारे में नहीं है। यह हमारे पृथ्वी के हित के लिए एक पहल भी है और यह एचसीडब्ल्यूए (विकलांग बच्चों और महिला सहायता) से जुड़ा है।”

उनका सपना बहुत बड़ा है और वह अब श्रीमती अर्थ प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी, जो जून 2018 में लास वेगास में आयोजित किया जाएगा। वह दृष्टिहीन बच्चो के विद्यालयों और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन संस्थाओं के लिए भी काम करती है। उनकी सबसे बड़ी चिंता उन लोगों के लिए है जो डिप्रेशन और चिंता से गुजर रहे हैं।

पेशेवर तौर पर, वह इस वक्त एक रीसाइक्लिंग परियोजना पर काम कर रही है और उसके अलावा पाइपलाइन में कई परियोजनाएं भी शामिल है। श्वेता ने साबित किया और हमें सिखाया है कि केवल कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी होती है।

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