पृथ्वी थियेटर के जनक थे शशि कपूर, जिन्होंने पहचाना था नई प्रतिभाओं की मुश्किल को

पृथ्वी थियेटर के जनक थे शशि कपूर, जिन्होंने पहचाना था नई प्रतिभाओं की मुश्किल को, शशि कपूर को जब ज़मीन मिली तो उन्होंने वहां कुछ और खड़ा करने की बजाय वहां पृथ्वी थेयेटर का निर्माण किया। अगर पृथ्वी थियेटर नहीं होता तो हिंदी थियेटर को पूरे देश और दुनिया में इतना बड़ा सम्मान हासिल नहीं होता। चूंकि आज पृथ्वी थियेटर की वजह से जो मान-सम्मान हिंदी नाटककर्मियों को मिला, जो स्थान मिला, कभी नहीं मिल पाता।

यह एक बड़ा मंच साबित हुआ। उस वक़्त जब पूरा देश सिर्फ सिनेमा को ही तवज्जो दे रहा था। अभिनेता शशि और उनकी पत्नी ने थियेटर को मंच दिया। शशि नए लोगों को थियेटर से जोड़ना चाहते थे। काफी मेहनत करते थे और ख़ुशी की बात यह थी कि नाटक पसंद आये तो फोन करके, सुबह केक भेज कर, कभी बुके भेज कर, ख़त लिख कर तारीफ़ करते थे।

सन 1981 में नाटक यहूदी की लड़की का मंचन किया था। इस नाटक को उनका काफी प्यार मिला था। इसके अलावा जसमा ओढ़न भी उन्हें काफी पसंद आया। बाद में पृथ्वी थियेटर में कई मौकों पर उन्होंने इसका मंचन किया था।

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