हिन्दी मीडियम से है सबका कनेक्शन, धर्मेंद्र से लेकर सलमान तक

हिन्दी मीडियम से है सबका कनेक्शन, धर्मेंद्र से लेकर सलमान तक , 19 मई को दो फिल्में रिलीज होने जा रही है- हाॅफ गर्लफ्रेंड और हिंदी मीडियम। ये दोनों फिल्में अलग जाॅनर की हैं। स्टोरी और बैकग्राउंड के लिहाज से एकदम अलग हैं लेकिन इन दोनों के बीच भाषा का मजेदार कनेक्शन है। दोनों ही फिल्मों की कहानी हिंदी और अंग्रेजी को लेकर चलने वाली वैचारिक खींचतान पर आधारित है। मोहित सूरी निर्देशित हाफ गर्लफ्रेंड में अर्जुन कपूर का किरदार माधव झा है जो कि बिहार मूल का रहने वाला है और दिल्ली में पढ़ता है। कॉलेज फ्रेंड श्रद्धा कपूर का किरदार शहरी परिवेश में पला-बढ़ा दिखाया गया है और अंग्रेजी भाषा उसकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनकी प्रेम कहानी में भाषा की ये खाई एक अहम रोल अदा करती है।

दो किरदारों के बहाने हिंदी और अंग्रेजी की लगभग ऐसी ही कशमकश हिंदी मीडियम में भी दिखाई गई है। इरफान खान का किरदार दिल्ली में रहने वाला मीडिल क्लास बिजनेसमैन है, जो अपनी जुबान हिंदी को लेकर किसी भी तरह के अपराध बोध से मुक्त है, मगर पत्नी बनीं सबा कमर बच्चे की शिक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम को बेहतर समझती है। एक भाषा किस तरह से एक परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है, यही हिंदी मीडियम की कहानी का सार है।

वैसे साहबों की भाषा समझी जाने वाली अंग्रेजी को लेकर दुराग्रहों और हिंदी के लिए पूर्वाग्रहों की झलक पुरानी फिल्मों में भी दिखती रही है। आपको याद होगी सलमान खान की डेब्यू फिल्म बीवी हो तो ऐसी, जिसमें रेखा ने फारूक शेख की बीवी का रोल निभाया था। सलमान रेखा के देवर बने थे। फिल्म में पहले रेखा के किरदार को गांव का दिखाया गया था, मगर क्लाइमेक्स सीन में जब वो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती है, तो घरवालों की आंखें खुली रह जाती हैं। फिल्म में रेखा के किरदार को आधुनिक दिखाने के लिए अंग्रेजी भाषा का सहारा लिया गया।

हिंदी-अंग्रेजी की ऐसी ही खींचतान 2012 में आई श्रीदेवी की फिल्म इंग्लिश विंग्लिश में भी नजर आ चुकी है। साकेत चौधरी निर्देशित फिल्म में अंग्रेजी भाषा को लेकर लोगों के माइंडसेट को किरदारों के ज़रिए पर्दे पर पेश किया गया। इंग्लिश विंग्लिश में श्रीदेवी ने घरेलू महिला को रोल निभाया था, जो एक बेहतरीन मां और पत्नी होते हुए भी उपेक्षित रहती है, और फिर परिवार की नज़रों में चढ़ने के लिए अंग्रेजी भाषा सीखती है।

1975 में आई अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की क्लासिक कॉमेडी फिल्म चुपके-चुपके में हिंदी भाषा के जरिए कहानी में ह्यूमर का तड़का लगाया गया। धर्मेंद्र के किरदार को फ़िल्म में हिंदी प्रेमी दिखाया गया था। हालांकि वो एक प्रैंक के तहत होता है, जो ओम प्रकाश के किरदार के साथ खेला जाता है। इस फिल्म को ऋषिकेश मुखर्जी ने ही डायरेक्ट किया था।

1983 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की कॉमेडी ड्रामा किसी से ना कहना की कहानी का ह्यूमर हिंदी और अंग्रेजी के क्लैश से आता है। फिल्म में डॉक्टर बनीं दीप्ति नवल को फारूक शेख से प्यार हो जाता है, जो एक कंपनी में जनरल मैनेजर हैं, मगर इनकी प्रेम कहानी में आड़े आता है फारूक के पिता बने उत्पल दत्त का हिंदी प्रेम और अंग्रेजी से नफरत। उत्पल दत्त के किरदार को लगता है कि अंग्रेजी बोलने वाले संस्कृति और संस्कारों से दूर हो जाते हैं।

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