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वीआईपी 2 देखने का मतलब है एक बेहद बचकाना कोशिश देखना

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वीआईपी 2 देखने का मतलब है एक बेहद बचकाना कोशिश देखना , इस हफ्ते रिलीज हुई वीआईपी 2 को देखने के बाद माथा थोड़ा घूम जाता है। इस फिल्म की कहानी काजोल यानी वसुंधरा और धनुष यानी रघुवरन के बारे में है। दोनों को अपने फ़ील्ड में महारत हासिल है। जहां धनुष पुरस्कार से नवाजे हुये इंजीनियर हैं तो वही दूसरी ओर काजोल एक आर्किटेक्ट कंपनी की मालकिन हैं। धनुष एक फर्म के लिये काम करते हैं और उस फर्म के मालिक को बेहद चाहते हैं क्योंकि उनके धनुष के ऊपर ढेर सारे एहसान हैं। इसी की वजह से जब धनुष, काजोल की फर्म में नौकरी के लिये मना कर देते हैं तो काजोल तिलमिला उठती हैं क्योंकि उनकी फर्म में काम करने के लिये लोग तरसते हैं।

इसके बाद काजोल धनुष से बदला लेने के लिये एक के बाद वार करती हैं जिसकी वजह से आगे चलकर धनुष को अपनी फर्म से इस्तीफा देना पड़ता है। धनुष की कंपनी को एक थीम पार्क बनाने का ठेका मिलता है। लेकिन जब धनुष की टीम वहां की मिट्टी की जांच पड़ताल करती है तो उन्हे पता चलता है कि मिट्टी इस लायक नहीं है कि उसके ऊपर कंस्ट्रक्शन का काम हो सके। धनुष उस काम को जब छोड़ देते हैं और थीम पार्क बनाने का कांट्रैक्ट काजोल की कंपनी को मिल जाता है। इसके बाद धनुष कैसे काजोल को बताते हैं कि उस ज़मीन पर कुछ भी बनाना अवैध होगा और आगे चलकर दोनों में कैसे दोस्ती होती है यही फिल्म की कहानी है।

अभिनय की बात करें तो वीआईपी 2 में काजोल एक नो नॉनसेंस कार्पोरेट मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका में काफी सटीक लगती हैं लेकिन ये भी सच है कि पूरी फिल्म में उनके चेहरे पर एक ही तरह का एक्सप्रेशन है – गुस्से का जो कुछ समय के बाद अपना असर दिखाना बंद कर देता। धनुष चाहे किसी भी तरह का अभिनय करे वो लुभाने वाला ही होता है क्योंकि अभिनय की बारिकियों से वो अच्छी तरह से परिचित हैं। वीआईपी 2 में यही दोनों मूल किरदार हैं। फिल्म में वहां की जानी मानी अभिनेत्री अमला पॉल भी है जो फिल्म में धनुष की पत्नी के रोल में हैं लेकिन उनका रोल भरपाई ही।

दर्शकों के सब्र की परीक्षा तब ली जाती है जब काजोल और धनुष बारिश में फंस जाते हैं और उन दोनों को रात काजोल के ऑफिस में गुजारनी पड़ती है। ये सब कुछ क्लाइमैक्स के कुछ समय पहले होता है। दोनों साथ में बातें करते हैं, नोंकझोंक होती है, वाइन भी पीते हैं और खाना भी खाते हैं और जब सुबह होती है तो सालों की दुश्मनी दोस्ती में तब्दील हो जाती है।

काजोल की मर्सीडीज गाड़ी धुंआधार बारिश की वजह से खराब हो जाती है और तब धनुष अपने मोपेड पर बिठाकर उनको अपने घर ले आते हैं जहां पर उनकी पत्नी उनको डोसा खिलाती है। इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिये आप अपने दो घंटे बर्बाद करें। फार्मूला फिल्म भी बनाने का एक तरीका होता है और सौंदर्या को इस गुर को सीखने के लिये अभी कुछ समय और लगेगा।

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