पंगा मूवी रिव्यू | ज़बरदस्त फिल्म पूरा पैसा वसूल

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पंगा 24 जनवरी को रिलीज हो चुकी है। इस स्पोर्ट्स फिल्म का दर्शकों को लंबे वक्त से इंतजार था। कंगना रनौत अपनी परफॉर्मेंस के साथ अपनी फिल्म के कंटेंट चुनाव के लिए भी जानी जाती हैं। इसके अलावा अपनी बेबाकी के लिए तो एक्ट्रेस पब्लिक में फेमस हैं ही। इसी के साथ ही कंगना का ये ‘पंगा’ स्पेशल गेस्ट को पसंद आया।

कंगना रनौत के अलावा इस फिल्म में पंजाबी इंडस्ट्री के सिंगर और एक्टर जस्सी गिल भी हैं। जस्सी फिल्म में कंगना रनौत के पति की भूमिका में हैं। ये फिल्म है कबड्डी चैंपियन जया के बारे में। फिल्म के ट्रेलर में दिखाया जाता है कि कैसे जया को अहसास होता है कि उसकी पहचान वक्त के साथ कहीं खो गई है।

फिल्म की कहानी शानदार जो आपको काफी मोटिवेट करने के साथ ही इमोशनल भी करती है। जया का किरदार निभा रही कंगना ने इस फिल्म के जरिए एक बार फिर अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। फिल्म में कबड्डी के लिए जया की दीवानगी तब परवान चढ़ती है जब वो 32 साल की उम्र में खेल में वापसी करने का फैसला करती है।

लेकिन राष्ट्रीय टीम में वापसी करना उसके लिए आसान नहीं होता है क्योंकि अब वो एक मां और पत्नी के रूप में घरेलू ज़िम्मेदारी भी संभाल रही होती है। फिल्म में कंगना के अलावा बाकी किरदारों ने भी अपने रोल को शानदार तरीके से निभाया है।

रेलवे स्टेशन पर बैठी ट्रेन का इंतजार कर रहीं कुछ कबड्डी प्लेयर्स को देख कर जब कंगना उनके पास पहुंचती हैं तो वह लड़कियां जया को पहचान नहीं पातीं। यह बात जया के दिल को लग जाती है और अंदर तक झकझोर देती है। इसके बाद घर जाकर वह अपने पति से इस बारे में बात करती है। इस बीच उनका बेटा मासूमियत में अपने पिता से सवाल करता है कि ‘क्या मम्मी अब कमबैक नहीं कर सकतीं।’ बस इसी के बाद से कबड्डी में वापसी की कवायद शुरू हो जाती है।

जया निगम (कंगना रनौत) एक समय कबड्डी की नैशनल प्लेयर और कैप्टन रही है, मगर अब वह 7 साल के बेटे आदित्य उर्फ आदि (यज्ञ भसीन) के बेटे की मां और प्रशांत (जस्सी गिल) की पत्नी है। जया अपनी छोटी-सी दुनिया में खुश है। कबड्डी ने उसे रेलवे की नौकरी दी है और उसकी जिंदगी घर,बच्चे और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच गुजर रही है। फिर एक दिन घर में एक ऐसी घटना घटती है कि जया का बेटा आदि उसे 32 साल की उम्र में कबड्डी में कमबैक करने के लिए प्रेरित करता है।

पहले जया पति प्रशांत के साथ मिलकर कमबैक की प्रैक्टिस का झूठा नाटक करती है, मगर इस प्रक्रिया में उसके दबे हुए सपने फिर सिर उठाने लगते हैं। अब वह वाकई इंडिया की नैशनल टीम में कमबैक करके अपने स्वर्णिम दौर को दोबारा जीना चाहती है। उसके इस सफर में उसका पति और बेटा तो साथ है ही, उसकी मां (नीना गुप्ता), बेस्ट फ्रेंड मीनू (रिचा चड्ढा) जो कबड्डी कोच और प्लेयर भी है, उसे हर तरह का सपॉर्ट देती है।

निर्देशक के रूप में अश्विनी अय्यर तिवारी की खूबी यह है कि उन्होंने भोपाल जैसे छोटे शहर की कामकाजी औरत और उसके मध्यम वर्गीय परिवार को परदे पर जिन बारीकियों के साथ चित्रित किया है, उससे कहानी को बल मिलता है।

अश्विनी ने मानवीय रिश्तों की बुनावट के साथ कबड्डी जैसे खेल के थ्रिल को भी बनाए रखा है। निखिल मल्होत्रा और अश्विनी अय्यर तिवारी के लिखे संवाद चुटीले हैं। जय पटेल की सिनेमटॉग्रफी दर्शनीय है और बल्लू सलूजा ने फिल्म को सही अंदाज में काटा है। शंकर-एहसान-लॉय का संगीत विषय के अनुरूप है।

जया निगम के किरदार को कंगना ने बेहतर जिया है। रिचा चड्ढा का अभिनय फिल्म में राहत का काम करता है। बिहारी एक्सेंट में बोले गए उनके संवाद और बॉडी लैंग्वेज भरपूर मनोरंजन करते हैं। सहयोगी पति की भूमिका में जस्सी गिल ने सहज अभिनय किया है। कुल मिलाकर फिल्म पैसा वसूल है।

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