तमिल में बनी थी पद्मावती पर पहली फिल्म, तब तो इतना विवाद नहीं हुआ था

तमिल में बनी थी पद्मावती पर पहली फिल्म, तब तो इतना विवाद नहीं हुआ था , रानी पद्मिनी की कहानी पर पहली बार संजय लीला भंसाली ही फिल्म नहीं बना रहे हैं। अब से 54 साल पहले भी रानी पद्मिनी की कहानी परदे पर दिखाई जा चुकी है। ये फिल्म 9 फरवरी 1963 को चितूर रानी पद्ममिनी के नाम से तमिल भाषा में रिलीज हुई थी।

बेहद कम शब्दों में फिल्म की कहानी कुछ इस तरह सामने आती है। उस काल में महिलाएं सीधे तौर पर पुरुषों के सामने नहीं जाती थी। महिलाएं परदे में ही रहा करती थी। मगर दिल्ली के सुल्तान खिल्जी ने चितौड़ के राजा को ये धमकी दी कि अगर उसे रानी पद्मिनी को देखने की इजाजत नहीं दी गई, तो वो राजस्थान को बर्बाद कर देगा।

फिल्म में शिवाजी गणेशन ने चितौड़ के राजा का रोल निभाया जबकि रानी पद्मिनी के किरदार में थीं वैजयंतीमाला, जो कि कमाल की भरतनाट्यम डांसर थीं। उनकी वजह से डायरेक्टर को रानी के लिए फिल्म में डांस सीक्वेंस बनाना पड़ा था।

एम.एन. नामबियार ने खिलजी का रोल जिस तरह किया, वह फिल्म के प्लस प्वाइंट साबित हुआ। इस फिल्म के लिए भी शानदार सेट्स बनाए गए थे। ये काम किया था आर्ट डायरेक्टर और प्रोडक्शन डिजाइनर ए.के. शेखर ने।

फिल्म को डायरेक्ट किया था तमिल और तेलुगू फिल्मों के जाने-माने निर्देशक चिथरपु नारायणमूर्ति ने। इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले लिखा था सी.वी. श्रीधर ने। जब तमिल भाषा में चितूर रानी पद्मिनी रिलीज हुई थी, तब भी इसे हिस्टोरिकल फिक्शन करार दिया गया। फिल्म में रानी पद्मिनी और अलाउद्दीन खिलजी की कहानी बताई गई थी।

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