पूनम को अपने पति के सामने साबित करना पड़ा कि उन्होंने किसी और के साथ रात नहीं बिताई है , पूनम ने छोटी उम्र में ही फ़िल्मों में अपनी शुरुआत की। ‘जंगल क्वीन’, ‘मीठी मीठी रातें’ और ‘आखिरी चीख़’ सी-ग्रेड की ऐसी कुछ फ़िल्में हैं जिनकी स्टार रही हैं पूनम दासगुप्ता। पूनम ने हिंदी ही नहीं बल्कि कई प्रादेशिक भाषाओं में बनी फ़िल्मों में भी काम किया है। ऐसी फ़िल्मों में काम करने की वजह से उनकी जो छवि बनी उसका खामियाज़ा उन्हें अपने निजी जीवन में उठाना पड़ा।

पूनम कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं। पहले ही साल में उन्हें समझ आ गया कि उनसे इतनी कठिन पढ़ाई नहीं होने वाली। तभी पूनम की मुलाक़ात आमि अस्थाना से हुई। उन्होंने पूनम की मुलाक़ात रामसे ब्रदर्स से करवाई। रामसे की एक फ़िल्म ‘आखिरी चीख़’ बनने जा रही थी। इस फ़िल्म में पूनम को लीड रोल दिया गया। दीपक पराशर उन दिनों एक जाने माने अभिनेता थे। पूनम को उन्हीं के साथ रोल मिला। एक 17-18 साल की लड़की को अगर आप ये बोल दें कि तुम अभिनेत्री बन सकती हो तो बस हो गया काम। आखिरी चीख़’ से जो शुरुआत की फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा। पूनम ने सिर्फ हिंदी ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत की भी कई फ़िल्मों में काम किया है।

पूनम को अपने पति के सामने साबित करना पड़ा कि उन्होंने किसी और के साथ रात नहीं बिताई हैपूनम कहती हैं वो अपनी बेटी को कभी फ़िल्मों में नहीं आने देंगी। अपनी इस छवि की क़ीमत मुझे शादी के बाद चुकानी पड़ी। मेरे ससुराल वाले मुझे पसंद नहीं करते थे। जब मेरी बेटी हुई तो मुझे ये साबित करना पड़ा कि वो मेरी और मेरे पति की ही औलाद है। मुझे उसका डीएनए टेस्ट करवाना पड़ा। मुझे आज भी इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरा अतीत मेरी बेटी के आड़े न आ जाए। मैं उसे अपने साथ नहीं रखती। वो दिल्ली में मेरे एक रिश्तेदार के साथ रहती है। मैं उसे कभी फ़िल्म इंडस्ट्री में आने नहीं दूंगी।

दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के बाद जब पूनम ने फिर से हिंदी फ़िल्मों में क़दम रखा। उस वक़्त इंडस्ट्री में पूनम जैसी एक भी हीरोइन नहीं थी। वो बॉम्ब शैल थी जो कम कपड़ों में गाने करती थी, लव सीन करती थी। पूनम की बोल्ड इमेज की वजह से लोगों ने बड़ी बदनामी की। एक ओर तो हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री बाहर से आए असल पोर्न कलाकारों को सर आंखों पर बिठाती है और वहीं पूनम जैसी अभिनेत्रियों पर पोर्न स्टार न होते हुए भी पोर्न स्टार होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। पूनम ने ‘जंगल क्वीन’, ‘मेरी जानेमन’, ‘दिल का डॉक्टर’ जैसी फ़िल्में कीं, इसलिए बॉलीवुड ने पोर्न स्टार बना दिया। विक्टर बैनर्जी से लेकर प्रसेनजीत जैसे बड़े बांग्ला अभिनेताओं के साथ भी तो फ़िल्में कीं। लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं की। आज भारत में सी-ग्रेड फ़िल्मों के पतन का कारण ये है कि बड़े निर्माता-निर्देशक ही जब ऐसी फ़िल्में बनाने लगेंगे तो हमारी फ़िल्मों को कौन देखेगा।

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पूनम ने प्रादेशिक भाषा की फ़िल्मों में भी काम किया। दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में पूनम एक बड़ा नाम था। सिल्क स्मिता के बाद अगर इन फ़िल्मों में किसी का नाम आता था तो वो नाम होता था पूनम दासगुप्ता। मलयालम फ़िल्मों की एक पत्रिका थी। एक बार उस पत्रिका में पूनम का फोटो नहीं छपा। लोगों ने वो पत्रिका वापस कर दी। पत्रिका में पूनम की फोटो चिपका कर उसे वापस लोगों में बेचा गया। ‘रोज़ा आई लव यू’ से लेकर ‘सर्प सुंदरी’ तक दक्षिण भारत में मैंने कई ऐसी फ़िल्में कीं, जिन फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड बनाए।

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