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नौकरी नहीं थी ओम पुरी के पास, इसलिए अंबाला की नंदा से टूटा रिश्ता

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नौकरी नहीं थी ओम पुरी के पास, इसलिए अंबाला की नंदा से टूटा रिश्ता , पदमश्री पुरस्कार विजेता फिल्म अभिनेता ओमपुरी का बचपन बेहद कष्टदायी रहा। उनके पिता अंबाला शहर रेलवे में कार्यरत थे। यहीं पर 18 अक्टूबर 1950 को जींद हाउस के पीछे रेलवे कालोनी में ओमपुरी का जन्म हुआ था।पिता को शराब की लत होने के कारण मां उन्हें अपने मायके पंजाब के पटियाला लेकर चली गई। मगर अंबाला से उनका हमेशा से जुड़ाव रहा। करीब आठ साल ओमपुरी ने अंबाला में ही काटे। इनका पूरा नाम ओम राजेश पुरी था।

इतना ही नहीं अंबाला शहर में रेलवे रोड स्थित गुरुगोबिद सिह पुस्तकालय के सामने स्थित कालोनी में रहने वाली नंदा देवी से उनके विवाह की बात भी चली। नंदा देवी के परिजन ओमपुरी को देखने जब उनके घर पहुंचे और पूछा कि ओम क्या करता है तो परिजनों ने बताया कि वह अभी बेरोजगार है, नौकरी नहीं करता है । इस पर नंदा देवी के परिजन बैरंग लौट गए। नौकरी ना होने की वजह से ओम का रिश्ता टूट गया।

सब्जी सर्राफा बाजार से राकेश वर्मा ने बताया कि ओमपुरी के पिता अकसर पुरानी सब्जी मंडी से सब्जी लाते समय उन्हें मिल जाया करते थे। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में अपने हुनर का लोहा मनवा चुके ओमपुरी एक फौजी बनना चाहते थे। वह चेहरे से खूबसूरत नहीं दिखते थे लेकिन उनकी अदायगी की खूबसूरती का लोहा जमाने ने माना है। चेहरे का काम वह अपनी दमदार आवाज से लिया करते थे। उन्हें अपने टैलेंट पर विश्वास था।’ ये शब्द शहर के अनिल दत्ता ने बयां किए।

उन्होंने ओमपुरी के साथ की मुलाकातों को साझा करते हुए बताया कि पटियाला में पहली मुलाकात के दौरान उन्हें पता चला कि मैं भी अंबाला से हूं तो वह बड़े खुश हुए। आखिर उनकी जड़ें भी तो अंबाला से ही ताल्लुक रखती थी। दत्ता ने बताया कि 70 के दशक में जब वे कॉलेज में पढ़ रहे थे तो रंगमंच में दिलचस्पी रखते थे। स्क्रिप्ट लेने के लिए वह अकसर पटियाला जाया करते थे और जिस दुकान पर वे जाते थे, वहीं ओमपुरी से पहली मुलाकात हुई।

 

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