वेटरन एक्ट्रेस रीमा लागू,  जिन्होंने ज़िंदगी के उतार चढ़ाव को ही मंज़िल में बदल दिया , वेटरन एक्ट्रेस रीमा लागू का निधन हो गया है। वो 59 साल की थीं। रीमा लागू का जन्म 1958 में मुंबई में हुआ था। उनके बचपन का नाम नयन भड़भड़े था। लेकिन, जब वो फ़िल्मों में आयीं तो उन्होंने अपना नाम बदलकर रीमा कर लिया।

उन्होंने जाने माने मराठी अभिनेता विवेक लागू से शादी की। हालांकि, उनकी यह शादी सात साल ही चल सकी। बता दें कि दोनों की एक बिटिया है- मृन्मयी। मृन्मयी भी एक एक्ट्रेस हैं। गौरतलब है कि रीमा की मां मन्दाकिनी भड़भड़े भी एक जानी-मानी मराठी अभिनेत्री थीं। बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए चार फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुकीं रीमा लागू के अचानक मौत की ख़बर से बॉलीवुड सदमे में है।

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रीमा ने अपनी स्कूलिंग पुणे के एच एच सी पी हाई स्कूल से की। रीमा स्कूल के ज़माने से ही अभिनय सीखती रहीं और उन्होंने स्कूल के कई प्ले में बढ़ चढ़ कर भाग लेती रहीं। रीमा ने हाई स्कूल की पढाई के बाद एक्टिंग को गंभीरता से लेना शुरू किया और तभी से वो मराठी नाटकों से जुड़ गयीं। जल्द ही रीमा को पहला बड़ा ब्रेक मिला और उन्होंने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत 1981 में आई फ़िल्म ‘कलियुग’ से की। जिसमें शशि कपूर, रेखा और राज बब्बर मुख्य भूमिका में थे।

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आमिर ख़ान और जूही चावला की फ़िल्म ‘क़यामत से क़यामत तक’ से रीमा को अपार लोकप्रियता हासिल हुई। उसके बाद उन्होंने ‘मैंने प्यार किया’, ‘साजन’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘ये दिल्लगी’, ‘दिलवाले’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘कल हो न हो’ एक के बाद एक कई कमर्शियल और कामयाब फ़िल्मों का हिस्सा रहीं।

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इस बीच, रीमा बड़े परदे के साथ छोटे परदे पर भी अपने अभिनय का जादू चलाती रहीं। साल 1994 ‘तू तू मैं मैं’ से उन्होंने छोटे परदे पर अपना सफ़र शुरू किया। बाद में ‘श्रीमान-श्रीमती’, ‘दो और दो पांच’, ‘कड़वी’, ‘खट्टी-मीठी’, ‘दो हंसों का जोड़ा’ और हाल ही में ‘नामकरण’ तक उनका सफ़र लगातार ज़ारी रहा।

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