केशव लाल | फुटपाथ पर हारमोनियम बजाने वाले संगीतकार को नेहा-विशाल ने दिया दान

केशव लाल | फुटपाथ पर हारमोनियम बजाने वाले संगीतकार को नेहा-विशाल ने दिया दान, सिंगर और कंपोजर विशाल ददलानी और नेहा कक्कड़ ने पुणे के फुटपाथ पर एक बैठे एक ऐसे व्यक्ति कि मदद की जो पिछले 30 सालों से वहां हारमोनियम बजाता आ रहा था।

हारमोनियम बजाने वाले केशव लाल को विशाल ददलानी और नेहा कक्कड़ ने एक-एक लाख रुपए दिए और उनकी मदद की। इसके चलते केशव लाल को ‘इंडियन आइडल 10’ के सेट पर बुलाया गया। इस दौरान केशव को इंडियन आइडल के मंच पर प्रतिभागियों और जजों द्वारा सम्मानित किया गया।

केशव लाल का सम्मान करते हुए विशाल और नेहा ने उन्हें एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की। विशाल ने कहा, “शो में केशव लालजी को देखना हमारा सौभाग्य है। ऐसे आदमी को देखना बहुत अच्छा लगता है जिसने अपना पूरा जीवन संगीत को दिया। वह हम सभी के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं।”

जज विशाल ने कहा, “उन्होंने हमें सिखाया कि एक व्यक्ति को कभी भी अपने जुनून को कम नहीं होने देना चाहिए। मैं अपने मित्रों और उद्योग में मौजूद लोगों से गुजारिश करूंगा कि वह केशव लालजी की हर संभव मदद करें।”

केशव लाल इस दौरान अपनी पत्नी सोनी बाई के साथ शो पर पहुंचे। इस बीच शो पर केशव लाल ने सफलता की चोटी पर पहुंचने से लेकर अपनी सभी भौतिक संपत्तियों को खो देने तक की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि केवल संगीत ही उनके लिए मायने रखता है।

केशव लाल ने संदेश देते हुए कहा कि सभी को अपने जुनून के प्रति वफादार होना चाहिए। आपको बता दें, केशव लाल ने दिग्गज फिल्मकार वी शांताराम और संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के साथ काम किया है।

केशव लाल ने बताया कि वो जरा भी नही चाहते थे कि,फुटपाथ पर गाना गाये लेकिन किस्मत साथ नहीं दिया। बच्चे शराबी निकले, ऐसे में खुद और बीवी का गुजारा करने के लिए हार्मोनियम लेकर फुटपाथ पर आ गए।

श्रीलंका के कोलंबो में जन्मे केशव लाल के माता-पिता फौज में मनोरंजन का काम करते थे और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब वे भारत पहुंचे तो इस परिवार ने मुंबई में जड़ें जमा लीं। केशवलाल को शुरू से ही गाने बजाने का शौक था, हारमोनियम कमर में लटकाए वो मुंबई की सड़कों पर काम तलाशने निकल जाया करते थे।

ऐसे ही एक दिन वो मुंबई की फ़िल्मसिटी के पास गा रहे थे, कि फ़िल्मकार वी शांताराम ने उन्हें देखा और कहा “क्या तुम मेरी अगली फ़िल्म के लिए हारमोनियम बजाओगे?” केशव लाल ने ‘नागिन’ के अलावा कई और फिल्मों के संगीत में भी अपना योगदान दिया, लेकिन उन्हें मुंबई कुछ रास नही आई।

वे कहते हैं, “शादी के बाद मेरी पत्नी की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई थी और उस समय मुंबई की हालत भी कुछ ठीक नही थी, आए दिन ख़ून ख़राबा और चोरी-चकारी की ख़बर सुनकर मैंने मुंबई छोड़ने का फ़ैसला किया”।

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