नसीरूद्दीन शाह जिनकी अदाकारी की दुनिया दीवानी है, जन्मदिन मुबारक हो

नसीरूद्दीन शाह जिनकी अदाकारी की दुनिया दीवानी है, जन्मदिन मुबारक हो  , थिएटर से लेकर हिंदी सिनेमा को एक अलग पहचान देने वाले नसीरूद्दीन शाह शाह का आज जन्मदिन है। समानांतर फिल्मों से लेकर कॉमर्शियल फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले नसीरुद्दीन जब-जब स्क्रीन पर आते है लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है। नसीरूद्दीन शाह का नाम जिसे सुनते ही अदाकारी की भीनी भीनी खुशबू आने लगती है। संजीदा और बेहतरीन अदाकार नसीरुद्दीन को अभिनय की खान कहा जाता है। नसीर ने आज अपनी ज़िन्दगी का 67वां पड़ाव पूरा कर लिया है। उनके इस सफर में उन्होंने हर तरह के किरदार को जिंदा कर जिया है। हलांकि नसीरूद्दीन शाह मुख्यधारा फिल्मों में 1980 में आई फिल्म ‘हम पांच’ से आए। साल 1983 में उनकी मशहूर फिल्म ‘मासूम’ आई। इसके बाद उन्होंने 1986 आई फिल्म ‘कर्मा’ में काम किया और इस फिल्म से नसीर छा गए।

बॉलीवुड में रियलिस्टिक एक्टिंग को एक मुकाम तक पंहुचाने वाले नसीर बॉलीवुड के ऐसे समय में भी अपनी अदाकारी से सब पर छाप छोड़ जाते हैं, जब फिल्मों में अच्छा दिखने वाले और स्टाइलिश ‘हीरो’ ( बॉलीवुड टाइप) की लोकप्रियता होती है और पूरी फिल्म इन स्टार के ऊपर टिकी होती है। हालांकि बॉलीवुड में नसीर से पहले और उनके समय में भी संजीदा अभिनेता रहे हैं लेकिन संजीदा और रियस्टिक एक्टिंग को नई दिशा देने में नसीर का योगदान बहुत अहम है।

20 जुलाई साल 1950 में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्मे नसीरुद्दीन की बेहतरीन डायलॉग डिलीवरी और उनकी बोलती आँखे उन्हें बाकी लोगों से काफी अलग बनाती है। पर्दे पर मिर्जा गालिब से लेकर हे राम में महात्मा गाँधी का किरदार निभाने वाले नसीर को अगर टैलेंट की खान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। फिल्मों में नशीर के डायलॉग बोलने का अंदाज इतना खास होता है कि फैंस को उनकी फिल्म के डायलॉग मुँहजुबानी याद है।

नसीर की शुरुआती पढ़ाई सेंट ऐंसेल्मद स्कूल अजमेर और सेंट जॉजेफ कॉलेज, नैनीताल से हुई। नैनीताल के बाद उन्होंऐने कला में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वफविद्यालय से ग्रेजुएशन की। इसके बाद वे दिल्ली आ गए और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया। बॉलीवुड में फिल्म ‘निशांत’ से करियर की शुरुआत की । इसके बाद उन्होंने कई ऐसी संजीदा फिल्मों में काम किया जिनमें ‘आक्रोश’, ‘स्पर्श’, ‘मिर्च मसाला’, ‘अलबर्ट पिंटों को गुस्सा क्यों आता है’, ‘मंडी’, ‘मोहन जोशी हाज़िर हो’, ‘अर्द्ध सत्य’ और ‘कथा’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

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