शादी में जरूर आना, बारात की तैयारी थोड़ी बेहतर हो सकती है, इतना समझ लें बस

शादी में जरूर आना, बारात की तैयारी थोड़ी बेहतर हो सकती है, इतना समझ लें बस , राजकुमार राव की फिल्म शादी में जरूर आना आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की कहानी लड़कियों की शिक्षा, नौकरी और समानता के अधिकार के साथ-साथ दहेज प्रथा की तरफ भी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करती है। डायरैक्शन बहुत बढ़िया है और छोटे शहर के फ्लेवर को बड़े अच्छे तरीके से दिखाया गया है। राजकुमार राव ने फिल्म में दो अलग तरह के किरदारों को बखूबी निभाया है, एक जो प्यार करने वाला आशिक होता है और दूसरा जो बेहद नफरत करता है।

फिल्म के कुछ गाने कहानी को आगे ले जाते हैं, तो वहीँ कुछ बोर भी करते हैं। फिल्म के संवाद कहीं कहीं आपको हसाते भी हैं। फिल्म की कमजोर कड़ियों में इसकी कहानी है। कहानी की शुरुआत तो दिलचस्प होती है पर इंटरवल के बाद कहानी बिखर जाती है। वैसे आपको थोड़ी कहानी भी बता देते हैं।

कहानी सत्येंद्र उर्फ़ सत्तू (राजकुमार राव) और आरती (कृति खरबंदा ) की अरेंज मैरिज से स्टार्ट होती है लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब शादी की ही रात आरती घर छोड़कर भाग जाती है। शादी से पहले अपने करियर के ऊपर ध्यान देने का निर्णय करती है। 5 साल के बाद सत्तू एक आईएएस अफसर बन जाता है और वहीँ आरती भी पीसीएस अफसर बनकर काम करने लगती है। एक बार फिर से सत्तू और आरती का आमना-सामना होता है लेकिन इस बार सत्तू को आरती से बहुत ज्यादा नफरत होती है क्योंकि शादी की रात जब आरती घर छोड़कर भागी थी तो उसकी वजह से सत्तू के पूरे खानदान की बेज्जती होती है। वैसे अंततः क्या होता है, इसका पता आपको फिल्म देखकर ही चलेगा।

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