जूली 2 थकी हुई फिल्म, थियेटर में वक्त काटना हो जाएगा मुश्किल

जूली 2 थकी हुई फिल्म, थियेटर में वक्त काटना हो जाएगा मुश्किल , फिल्म जूली 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये फिल्म 2004 में जूली का दूसरा पार्ट है। फिल्म की कहानी जूली की है। वह अपनी मां के साथ एक ऐसे परिवार में रहती है जहां उसका सौतेले पिता भी है। वो एक नाजायज औलाद है जिसका पता उसे बाद में चलता है।

फिल्म की कहानी बोर करने वाली है। घिसी-पिटी कहानी है। रिवेंज ड्रामा बहुत सारे बनाए गए हैं, लेकिन जूली 2 बहुत ही कमजोर कहानी है। आपको पता होता है कि अगले पल क्या होने वाला है। थ्रिलर तो है पर ये कहीं थ्रिलर जैसी लगती नहीं है। करीब सवा दो घंटे की फिल्म 3 घंटे से भी ज्यादा बड़ी लगती है। एडिटिंग और चुस्त हो सकती थी। फिल्म की कहानी बेहतर बनाई जा सकती थी। लंबे लंबे शॉट्स को छोटा किया जा सकता था। कहानी पर काम किया जाना जरूरी था, जिसकी कमी फिल्म देखते साफ़ समझ आती है।

जूली ने एक्टिंग और डांस का कोर्स कर रखा है। लेकिन उसके पास काम नहीं है। जब वो काम की तलाश में जाती है तो निर्माता-निर्देशक उसे दूसरी नजर से देखते हैं। उसकी जिंदगी में अलग-अलग लोगों की एंट्री होती है। इसी दौरान वो क्रिश्चियन महिला ऐनी के पास पहुंचती है। उसे काम मिलना शुरू हो जाता है। लेकिन एक वक्त के बाद फिर उसके पास काम नहीं है। तब उसे समझौते करने पड़ते हैं।

आखिरकार कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आता है जब जूली एक महारानी की बायोपिक फिल्म ‘देवी’ करने के लिए जाती है। कई सारे राज का पर्दाफ़ाश होता है। कहानी में कई सिरे हैं जो भटके हुए हैं। बजट करीब 9-10 करोड़ रुपये है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को अपनी कमाई निकाल पाने में मुश्किल हो सकती है।

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