मिसिंग | शानदार कहानी लेकिन पर्दे पर तरीके से नहीं उतर पाई

इंटरवल के बाद फिल्म बोझिल

मिसिंग | शानदार कहानी लेकिन पर्दे पर तरीके से नहीं उतर पाई, बॉक्स ऑफिस के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। आज दो फिल्में ‘ब्लैकमेल’ और मिसिंग रिलीज हुई है। दोनों ही फिल्मों में एक से बढ़कर एक उम्दा कलाकार है, तो जाहिर सी बात है कि लोग यही सोचेंगे कि फिल्म की कहानी में दम तो होगा।

बात की जाए मुकुल अभंयकर द्वारा निर्देशित ‘मिसिंग’ की तो इस फिल्म के जरिए तब्बू और मनोज बाजपेयी की जोड़ी पूरे आठ साल बाद बड़े पर्दे पर साथ नजर आई है और इसी वजह से यह फिल्म लोगों को अपनी ओर खींच सकती है।

इस फिल्म के जरिए मुकुल अभंयकर ने पहली बार बतौर निर्देशन काम किया है। मुकुल के पास कमाल की स्क्रिप्ट थी, लेकिन वह इस शानदार कहानी को पर्दे पर सही तरह से उकेरने में नाकामयाब रहे है। कही- कही पर फिल्म के डायलॉग इस कदर ठूसे गए है कि आपको समझ नहीं आएगा कि हसा जाए या अपना माथा पीटा जाए।

उदाहरण के तौर पर फिल्म का एक डायलॉग हम आपके साथ साझा करते है- ‘तितली (खोई हुई बच्ची) गायब नहीं हुई होगी…उड़ गई होगी..यहीं कहीं छुप गई होगी।’ इंटरवल के बाद फिल्म बिखर सी गई है।

सुशांत दुबे (मनोज बाजपेयी) और उसकी पत्नी अपर्णा मॉरिशस के एक होटल में चेकइन करते है और यहां आने के पांच घंटे के भीतर ही उनकी बेटी तितली गुम हो जाती है। पूरी फिल्म में इस बच्ची को ढूढ़ा जाता है और दिलचस्प बात यह है कि इस बच्ची की शक्ल नहीं दिखाई नहीं जाती है।

जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, फिल्म का संस्पेंस अपने चरम पर पहुंच जाता है। यह संस्पेंस आपकी उत्सुकता को बढ़ाने में कामयाब रहता है लेकिन जब पुलिस की पड़ताल होती है तो ऐसे-ऐसे राज खुलकर सामने आते है कि खुद इंस्पेक्टर राम खिलावन बुद्धु (अन्नू कपूर) अपना सिर पीट लेते है।

पुलिस की जांच आगे बढती है और सुशांत पुलिस को जानकारी देता है कि अपर्णा की कोई बच्ची ही नहीं है। अपर्णा अपना मानसिक संतुलन खो चुकी है और तितली सिर्फ उसकी कल्पना है। खैर इस दौरान बहुत सी ऐसी बाते सामने आती है, जिससे पुलिस सुशांत समेत अपर्णा को शक की निगाह से देखने लगती है, लेकिन आखिर में फिल्म कहानी ऐसा मोड़ लेती है कि जिसका अंदाजा कर पाना ही मुश्किल है।

इस दिलचस्प मोड़ से पर्दा हटाकर हम आपका मजा किरकिरा नहीं करना चाहते है। इस साइकोलॉजिक थ्रिलर की सबसे बड़ी खामी यह है कि इंटरवल के बाद आप कई मौकों पर हसेंगे और शायद मुकुल यही पर मात खा गए है। यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म के टाइटल की तरह ही इस फिल्म में सब कुछ होते हुए भी बहुत कुछ मिसिंग है।

फिल्म के कलाकारों ने उम्दा काम किया है। मनोज बाजपेयी एक रंगीन मिजाज शख्स के रुप में खूब जमे है। वहीं एक रहस्यमयी औरत के रुप में तब्बू ने दिल जीत लिया। पुलिस इस्पेक्टर के रुप में अन्नू कपूर कमाल के लगे है।

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