करण जौहर के पिता यश जौहर की किस्मत ऐसे संवारी थी मधुबाला ने

करण जौहर के पिता यश जौहर की सफलता की कहानी काफी संघर्षों से भरी पड़ी है। लेकिन आपको बता दें कि मधुबाला ने करण के पिता की काफी मदद की थी।

करण जौहर के पिता यश जौहर की सफलता की कहानी काफी संघर्षों से भरी पड़ी है, जिसे जानकर हर किसी के आंखों में आंसू आ जाते हैं। यश जौहर का जन्म 6 सितंबर, 1929 में लाहौर में हुआ था और फिर भारत-पाकिस्तान के  बंटवारे के बाद वे परिवार समेत दिल्ली आ गए थे।

जिसके बाद उन्होंने दिन रात कड़ी मेहनत की और फिर जाकर फिल्म इंडस्ट्री में इतना बड़ा नाम फेम बना। करण जौहर के पिता यश जौहर के फिल्मों की खासियत विदेशी लोकेशन और हाई फाई सेट होती थी, जोकि सबका मन मोह लेती थी।

इतना ही नहीं, यश जौहर के दिखाए गए रास्ते पर ही करण जौहर भी चल रहे हैं और उनकी फिल्में भी काफी महंगी और हाई फाई लोकेशन वाली होती है।

ऐसे में यश जौहर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई सुपरहिट फिल्में दी है, लेकिन वे हम सब को छोड़कर 2004 में ही भगवान को प्यारे हो गए, जिसके बाद से ही उनकी कमान करण जौहर ने संभाल रखी है।

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद जब करण जौहर के पिता यश जौहर अपनी पूरी फैमिली के साथ दिल्ली आए तो वे मिठाई की दुकान पर काम करने लगे। दरअसल, यश जौहर के पिता ने दिल्ली में एक मिठाई की दुकान खोली, जिस पर यश को बिठा दिया, क्योंकि वे 9 भाई बहनों में से सबसे ज्यादा पढ़े लिखे थे और हिसाब किताब करने में सक्षम थे।

हालांकि, यश जौहर को ये काम करना अच्छा नहीं लगा था, लेकिन उन्होंने परिवार का पेट पालने के लिए ये काम करना शुरु कर दिया। मिठाई की दुकान पर यश जौहर का मन न लगने पर उनकी मां ने उन्हें मुंबई जाने के लिए कहा और उसके लिए उन्हें कुछ पैसे और गहने भी दिये, जिसकी वजह सिक्योरिटी वाले की खूब पिटाई भी हुई थी, लेकिन उनकी मां ने अपने बेटे को गहने और पैसे दिए थे।

मुंबई जाकर भी यश जौहर को शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा और फिर वे टाइम्स ऑफ इंडिया में फोटोग्राफर बन गए, जिसके बाद वे शूटिंग सेट पर जाकर तस्वीरें शेयर खींचा करते थे और इसी बीच उनकी मुलाकात मधुबाला से हुई।

‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग के दौरान यश जौहर मधुबाला की फोटो खींचने लगे, जिन्हें मधुबाला मना नहीं कर पाई। दरअसल, मधुबाला यश जौहर की इंग्लिश से काफी इंप्रेस थी और फिर उन्हें गॉर्डन भी लेकर गई, जिसके बाद यश जौहर की किस्मत खुल गई।

यश जौहर को काम मिल गया और फिर उनकी बतौर निर्माता फिल्म दोस्ताना थी, जोकि काफी चली नहीं, जिसके बाद उन्हें प्रोड्यूसर के साथ साथ एक्सपोर्ट और इम्पोट का बिजनेस भी शुरु कर दिया।

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