लुप्त फिल्म रिव्यू | सुपरनैचुरल हॉरर फिल्म में नया कुछ भी नहीं

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लुप्त ने हॉरर फिल्म के सेट फॉर्मूले को तोड़ने का प्रयास किया है लेकिन इसमें वो चूक गए हैं। भले ही भारत में फिल्म निर्माताओं का ध्यान हॉरर फिल्म की तरफ कम ही जाता है, मगर फिर भी सिने प्रेमियों के बीच हॉरर फिल्म का चहेता वर्ग हमेशा बना रहा। खासकर हॉलीवुड के बड़े बजट और बेहतरीन टेक्नोलॉजी के सामने भारतीय हॉरर फिल्में सिर्फ अपने कंटेट के बल पर ही मुकाबला कर सकती है।

एक्टिंग की बात करें तो जावेद जाफरी हमेशा की तरह अलग फॉर्म में नजर आते हैं। हर्ष टंडन के किरदार में उन्होंने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। जिस तरह से उनकी इमेज है उसी प्रकार उन्होंने परफॉर्म किया है। उन्होंने सीरियस कैरेक्टर को बखूबी निभाया है। विजय राज हमेशा की तरह फॉर्म में नजर आते हैं। करण आनंद ने भी अच्छा परफॉर्म किया है।

कुल मिलाकर निर्देशक प्रभुराज की यह फिल्म बॉक्स अॉफिस पर क्या रंग दिखाती है यह भले ही न कहा जा सकता हो, मगर इस बात की शाबासी तो बनती है कि उन्होंने हॉरर के सेट फॉर्मूले को तोड़कर कुछ अलग कर दिखाने की हिम्मत की है। लुप्त कोई महान फिल्म नहीं है लेकिन एक बार जरूर देखा जा सकता है। अगर आप हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं तो आप यह फिल्म देख सकते हैं।

फिल्म की कहानी हर्ष टंडन की है जो एक बड़ा बिजनेसमैन है। वह एेसा बिजनेसमैन है जो अपने परिवार से ज्यादा अपने बिजनेस को अहमियत देता है। हर्ष को आत्मा या भूत दिखाई देने लगते हैं। एेसे में डॉक्टर के पास जाने पर क्रोनिक इंसोम्निया होने की बात सामने आती है।

इससे बचने के लिए डॉक्टर उसे काम से ब्रेक लेने की सलाह देती है। ऋषभ परिवार के साथ शिमला कार से निकलता है। सफर के दौरान रात में डरावना खेल शुरू होता है। फिर आगे किस प्रकार डर का साया मंडराता है वह फिल्म में दिखाया गया है। यह फिल्म एक सुपरनैचुरल हॉरर फिल्म है।

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