लखनऊ सेंट्रल, शुरुआत में तो फिल्म अच्छी है लेकिन आखिर तक हो जाती है बोझिल

लखनऊ सेंट्रल, शुरुआत में तो फिल्म अच्छी है लेकिन आखिर तक हो जाती है बोझिल , आज बॉक्स ऑफिस पर लखनऊ सेंट्रल रिलीज हुई है, जो रियल इंसीडेंट से प्रेरित है। इसमें फरहान अख्तर, डायना पैंटी, गिप्पी गिरेवाल, राकेश शर्मा, दीपक डोबरियाल, इनामुलहक, रॉनित रॉय और रवि किशन जैसे कलाकार मुख्य किरदार निभाते दिखेंगे।

फिल्म की कास्टिंग बहुत ही जबरदस्त है। फिल्म का म्यूजिक इसकी रफ्तार को एक बार फिर तोड़ता नहीं करता है। हर एक गाना बहुत खूबसूरती से कहानी को आगे बढ़ाता है। फिल्म में रॉनित रॉय और रवि किशन के किरदार जबरदस्त हैं। दोनों लोग जब भी स्क्रीन पर आते हैं, तो ऑडियंस बस स्क्रीन की तरफ ही देखती है। लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी खामी है यह है कि इसमें किशन के किरदार को बिल्ड होने का वक्त नहीं दिया गया है। फिल्म में ज्यादातर वक्त किशन को मास्टर माइंड ही दिखाया गया है। एक असली कहानी होने के बाबजूद भी यह फिल्म अंत में कुछ दे नहीं पाती है और बस एक बॉलीवुड फिल्म बनकर रह जाती है।

मुरादाबाद का रहने वाला किशन जो एक दिन अपना बैंड बनाना चाहता है। उसका सपना है कि कभी उसके गानों की सीडियां दुकानों पर बिकें और लोगों की जुबान पर एक ही नाम हो किशन, किशन….। लेकिन किशन की ज़िंदगी यू-टर्न तब ले लेती है जब उसको एक गलत केस में फंसा दिया जाता है। कोर्ट किशन को उम्रकैद की सजा दे देती है और वो लखनऊ सेंट्रल पहुंच जाता है। इसी बीच उसकी मुलाकात डायना पैंटी यानि कि गायत्री कश्यप से होती है, जिसको लखनऊ सेंट्रल में एक बैंड बनाने का प्रोजेक्ट मिला है। अब गायत्री और किशन हाथ मिलाते हैं और लखनऊ सेंट्रल का बैंड बनाने में लग जाते हैं।

हांलाकि किशन का बैंड बनाने के पीछे का प्लान कुछ और है। वो यह बैंड इसलिए बना रहा है क्योंकि जिस दिन लखनऊ सेंट्रल में अलग-अलग जेल के कैदियों के बीच प्रतियोगिता होगी वो उस दिन जेल से भाग जायेगा।

मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमेंTwitterपर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like