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गुरुदत्त जिसने इश्क को मजहब मान लिया था | जन्मदिन विशेष

गुरुदत्त का जन्म कर्नाटक के मैंगलोर में 9 जुलाई 1925 को हुआ था। उनका पूरा नाम शिव शंकर पादुकोण था।

मैंगलोर में पैदा हुए गुरुदत्त का बचपन कोलकाता की गलियों में बीता। बचपन से ही गुरुदत्त का मन स्कूल की किताबों में नहीं लगता था। उन्हें डांस का शौक था।

डांस के लिए गुरुदत्त के पैर शुरू से ही बेचैन रहा करते थे। कोलकाता में एक समारोह में उनकी मुलाकात नृत्यकार उदय शंकर से हुई।

नृत्य के प्रति उनके जुनून को देखकर उदय शंकर ने उन्हें अल्मोड़ा आने का निमंत्रण दिया, जहां उदय शंकर, नृत्य प्रशिक्षण संस्थान का संचालन करते थे। गुरुदत्त उनके पास पहुंच गए और साल भर उनसे नृत्य सीखते रहे।

गुरुदत्त की किस्मत में था बॉलीवुड

गुरुदत्त की किस्मत धीरे-धीरे उन्हें बॉलीवुड की तरफ ले जा रही थी। अल्मोड़ा में ही उन्हें पुणे की कंपनी से ऑफर मिला। वहां उन्हें फिल्मों में कोरियोग्राफर की नौकरी मिल गई।

गुरुदत्त और देवानंद की दोस्ती की शुरुआत

पुणे में गुरुदत्त को जिस कमरे में रहने का मौका मिला, उसमें उनके साथ रहते थे देवानंद। यहीं से इन दो महान कलाकारों की दोस्ती शुरू हुई।

देवानंद, और गुरुदत्त ने एक दूसरे से वादा किया था कि जब भी उन्हें काम का मौका मिलेगा, तो एक-दूसरे को याद रखेंगे। जब देवानंद ने फिल्म बाजी बनाने का फैसला किया, तो निर्देशन की कमान गुरुदत्त को ही सौंपी।

फिल्म सुपरहिट रही। बाजी के बाद की गुरुदत्त की निर्देशित दो फिल्में जाल और बाज फ्लॉप रहीं। बाज में गुरुदत्त हीरो बनकर पर्दे पर उतरे थे।

इसके बाद गुरुदत्त ने अपनी फिल्म कंपनी बना ली और 1954 में पहली फिल्म आर पार बनाई। इसके बाद गुरुदत्त ने मिस्टर एंड मिसेस 55 बनाई।

ओपी नैयर के संगीत से सजी इस फिल्म के गाने बेहतरीन थे। वहीं गुरुदत्त की फिल्म चौदहवीं का चांद तो हिंदी की दस सर्वश्रेष्ठ म्यूजिकल फिल्मों में से एक है।

इसके बाद 1957 में आई गुरुदत्त की क्लासिक फिल्म प्यासा, फिर कागज के फूल और साहब बीवी गुलाम। ये फिल्में हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं।

गुरुदत्त और वहीदा रहमान का नाकाम इश्क

जब वहीदा ने बॉलीवुड में एंट्री की तो उस वक्त गुरुदत्त शादीशुदा थे। उनकी पत्नी का नाम गीता दत्त था, दोनों की जिंदगी खुशहाल चल रही थी।

गुरु और गीता ने 1953 में शादी की। लेकिन उसके कुछ महीनों बाद अभिनेत्री वहीदा रहमान एक हीरोइन के तौर पर गुरुदत्त की फिल्मों में आईं और फिर उनकी जिंदगी में भी।

इस रिश्ते ने गुरुदत्त की शादीशुदा जिंदगी को बरबाद कर दिया। फिल्में तो बनती रहीं लेकिन जिंदगी बिगड़ती चली गई।

गुरुदत्त ने जब वहीदा को देखा, तो उनकी खूबसूरती के कायल हो गए। गुरुदत्त और वहीदा की नजदीकियां बढ़ने लगीं, तो गीता दत्त की परेशानी भी बढ़ गई।

पति-पत्नी के रिश्ते में दरार पड़ गई। गुरुदत्त अपनी पत्नी को छोड़ वहीदा के साथ ही रहने लगे। हालत ये थे कि गीता ने फिल्मों में वहीदा के लिए गाना तक बंद कर दिया। यानी वो अपनी आवाज तक वहीदा को नहीं देना चाहती थीं भले ही वो पर्दे पर ही क्यों ना हो।

गुरुदत्त ने वहीदा रहमान के लिए पत्नी गीता दत्त को छोड़ा

पति-पत्नी के रिश्ते में दरार पड़ गई। गुरुदत्त अपनी पत्नी को छोड़ वहीदा के साथ ही रहने लगे। दोनों ने एक साथ कागज के फूल नाम की फिल्म की, दो बुरी तरह फ्लॉप हो गई।

फिल्म के फ्लॉप होने पर गुरुदत्त निराशा में डूब गए। गम में गुरुदत्त ने खुद को शराब में डुबो लिया। एक तरफ फिल्म का फ्लॉप होना, तो दूसरी तरफ रिश्तों को लेकर भ्रम 10 अक्टूबर 1964 को उन्होंने जरूरत से ज्यादा नींद की गोलियां खा लीं और उनका निधन हो गया।

गुरुदत्त की मां गुरुदत्त को छोड़ कर जाना चाहती थीं आज़ादी के आंदोलन में

गुरुदत्त की मां गांधी जी से बहुत प्रभावित थीं। उन्होंने गांधी जी को चिट्ठी लिखकर खुद को देश सेवा के लिए समर्पित करने का फैसला किया।

गुरुदत्त की मां ने गांधी जी को खत लिखा कि मेरा एक छोटा बेटा है और मेरा पति है, लेकिन मैं ये सबकुछ छोड़कर आपके आंदोलन से जुड़ना चाहती हूं।

गांधी जी ने उनके खत के जवाब में लिखा कि अगर देश की सेवा करना चाहती हो, तो अपने बच्चे की परवरिश करो और उसे बड़ा इंसान बनाओ। गांधी का ये आशीर्वाद ही था कि गुरुदत्त हिंदी सिनेमा के इतने बड़े स्टार बने थे।

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