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मक्खी से बाहुबली तक एसएस राजामौली का जलवा ही जलवा

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मक्खी से बाहुबली तक एसएस राजामौली का जलवा ही जलवा , ‘बाहुबली 2’ के डायरेक्टर एसएस राजामौली को अगर बड़े पर्दे का जादूगर कहा जाए, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। आख़िर एक जादूगर ही ऐसी दुनिया रच और गढ़ सकता है, जो सिर्फ़ ख्यालों-ख़्वाबों में दिखाई देती हो। एक जादूगर ही मक्खी को ‘बाहुबली’ बनाकर पर्दे पर पेश करने की जुर्रत कर सकता है।

फ़िल्मों में बंदर, कुत्ता, कबूतर, तोता, चील, बाज, शेर, चीता, घोड़ा, भालू, हाथी, मछली … यहां तक कि सांपों ने भी अहम क़िरदार निभाए हैं, लेकिन मक्खी का मैचोइज़्म पहली दफ़ा सिल्वर स्क्रीन पर दिखाई दिया। मक्खी को फ़़िल्म को नायक बनाना अपने आप में काफी अजीब सोच थी । हालांकि इससे पहले रजनीकांत की फ़िल्म ‘रोबोट’ में ब्लड सकिंग मच्छरों को भी दिखाया जा चुका था, लेकिन वो सिर्फ़ फ़िल्म की एक सीक्वेंस थी। ‘मक्खी’ फ़िल्म की जान एनीमेटिड मक्खी ‘जानी’ थी।

राजमौली की फ़िल्मों के हिंदी रीमेक भी बनते रहे हैं, जिनमें बॉलीवुड के सुपरस्टार्स ने काम किया था।  उनके डायरेक्शन में बनी ‘विक्रमारकुडु’ के हिंदी रीमेक ‘राउड़ी राठौड़’ में अक्षय कुमार लीड रोल निभाकर मूछों पर ताव दे चुके हैं, तो ‘मर्यादा रामन्ना’ के रीमेक ‘सन ऑफ़ सरदार’ में अजय देवगन लीड रोल निभाकर पौ बारह कर चुके हैं। बाहुबली सीरीज़ के ज़रिए राजामौली ने जहां देश के दूसरी फ़िल्म इंडस्ट्रीज़ को एक दिशा दिखाई है, वहीं हॉलीवुड से आ रही चुनौतियों से निपटने का एक तरीक़ा भी सुझाया है।

फ़िल्म के इंसानी नायक का क़त्ल कर दिया जाता है, जो मक्खी का जन्म लेकर अपनी मौत का बदला लेता है, जिसमें उसकी मदद करती है फ़िल्म की नायिका और नायक की पिछले जन्म की मोहब्बत। एक इंसान का मक्खी के रूप में पुनर्जन्म कहीं ना कहीं हिंदी माइथॉलॉजी के उस दावे को भी सपोर्ट करता है, जिसमें कहा गया है, कि आत्मा को इंसानी जिस्म धारण करने से पहले 84 लाख योनियों में भटकना पड़ता है।

इंसानी जज़्बातों वाली मक्खी सिनेमा के दर्शकों ने पहली बार देखी थी, जो प्यार करती है, लड़ती है, दुश्मन को पहचानती है और उससे बदला लेने के लिए साजिशें भी रचती है। तकनीकी रूप से बेहद उम्दा मक्खी की मेकिंग ने इस बात का अहसास करवा दिया था, कि राजामौली भविष्य में कुछ ग्रैंड करने वाले हैं, जो कुछ साल बाद ‘बाहुबली’ के रूप में सामने आया।

बाहुबली सीरीज़ में डायरेक्टर राजामौली ने एक काल्पनिक राज्य महिष्मती की कल्पना की और उसे बसाने के लिए अपनी कल्पनाशीलता को खुला छोड़ दिया, जिसका नतीजा आप ‘बाहुबली- द बिगिनिंग’ में देख चुके हैं और अब ‘बाहुबली- द कन्क्लूज़न’ में देख रहे हैं। वैसे राजामौली की कल्पनाशीलता की उड़ान का एक नमूना दर्शक ‘बाहुबली’ से कुछ साल पहले देख चुके हैं, जब उन्होंने 2012 में ‘ईगा’ बनाई, जिसका हिंदी डब वर्ज़न ‘मक्खी’ के नाम से रिलीज़ किया गया था। जी हां, मक्खी।

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