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कृतिका देसाई से गॉसिप गंज की खास बातचीत , गुजराती फिल्म धाकड़ की लीड एक्ट्रेस

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कृतिका देसाई की एक गुजराती फिल्म आने वाली है धाकड़। आपको बता दें कि गुजराती फिल्म धाकड़ अभी से लोगों की जुबान पर चढ़ चुकी है। ये एक फैमिली ड्रामा है जिसमें आज के दौर के महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए गए हैं। इस फिल्म की खासियत है कि ये फिल्म एक सोशल मैसेज भी देती है। अब आते हैं मुद्दे की बात पर। इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक परिवार में लड़की की कितनी अहमियत होती है। कहानी उस लड़की के इर्द गिर्द घूमती है। लड़की अपने घर में कैसे अपनी ही शर्तों पर ज़िंदगी जीता है, ये पूरी फिल्म उसी का एक फलसफा है। जाहिर है कि फिल्म में ट्विस्ट एंड टर्न्स भी हैं। लेकिन वो मज़ेदार हैं। एक लड़की जो अपनी ही फैमिली से सच के लिए लड़ती है।

अब बात करते हैं उस लड़की की। जी हां तो वो लड़की जिसका नाम जानकी है, ये किरदार फिल्म में कृतिका देसाई निभा रही हैं और तो उनसे पुराने परिचित हैं। वो कई गुजराती और हिन्दी सीरियल्स में भी नज़र आ चुकी हैं। गॉसिप गंज ने उनसे बात की…

सवाल- कैसा लगता है जब लोग आपको एक्ट्रेस के तौर पर पहचान लेते हैं।

कृतिका देसाई- मुझे बहुत अच्छा लगता है। लेकिन पहचान बड़ी बात नहीं है अच्छा तब लगता है जब लोग आपको आपके काम से पहचानने लगते हैं। मुझे सोशल मुद्दे से जुड़ी कहानियां अच्छी लगती हैं और मेरी कोशिश रहती है कि मैं वैसे ही सीरियल्स और फिल्में करूं। जिसमें मैं समाज को कोई मैसेज दे सकूं और जब लोगों तक वो मैसेज पहुंचता है लोग तारीफ करते हैं। तब मुझे लगता है कि लोग मेरे काम को पसंद करते हैं।

सवाल- फिल्म धाकड़ कैसे मिली।

कृतिका देसाई- गुजराती सीरियल में काम किया है तो थोड़ी बहुत पहचान तो थी। लेकिन साफ कहूं तो धाकड़ फिल्म मुझे मेरे एक फ्रैंड के रिफरेंस से मिली। और जब मैं फिल्म के निर्देशक दशरथ माली जी से मिली तो उनसे सिर्फ एक ही बात कही थी कि फिल्म अच्छी बनाईयेगा और फिल्म में कोई सोशल मैसेज ज़रूर होना चाहिए। फिर उसके बाद जब उन्होंने मुझे कहानी सुनाई तो मैंने बगैर देर किए फिल्म को हां कर दी।

सवाल- फिल्म में आपका रोल कैसा है।

कृतिका देसाई- फिल्म धाकड़ में मेरा चैलेजिंग रोल था। रोल अच्छा है लेकिन इस किरदार को निभाना मेरे लिए आसान नहीं था। दरअसल भारतीय परिवार में एक चीज़ कॉमन होती है खास तौर से लड़कियों के लिए। लड़कियों के सामने कहां से अचानक समस्या आ जाए उन्हें पता ही नहीं होता। एक लड़की को अपने घर के लोगों के साथ जंग लड़नी होती है। इसके साथ साथ बाहर तो लोग हैं ही जिनसे उसकी जंग चलती रहनी है। लेकिन हां फिल्म को मैं बेहतर तरीके से कर पाई क्योंकि मैं खुद स्टोरी से कनेक्ट हो गई थी। एक पर्सनल बात हैं। बेटी होने की वजह से शायद मैं इस दुनिया में आंखे ही नहीं खोल पाती अगर मेरी मां ने मेरा साथ ना दिया होता। मेरी मां के ससुराल वालों ने साफ कह दिया था कि उन्हें बेटी नहीं चाहिए लेकिन मां ने सबके खिलाफ जाकर मुझे जन्म दिया। इतना ही नहीं उन्हें अपने परिवार अपने पति सबको छोड़ना पड़ा लेकिन मेरी मां में वो हौसला था कि वो लड़ीं और मेरे लिए लड़ी। मुझे जन्म दिया। कुछ दिन पहले डैड की फैमिली देखी डैड को देखा लेकिन सच कहूं तो मेरी उनसे कभी बात नहीं होती।

सवाल- फिल्म के निर्देशक दशरथ माली के साथ काम का कैसा अनुभव रहा।

कृतिका देसाई- दशरथ माली जी बहुत सुलझे हुए डायरेक्टर हैं। सेट पर काफी फ्रैंडली माहौल बना कर रखते थे। लगता था मानो हम घर में शूटिंग कर रहे हैं। हम लोग अगर कोई सजेशन भी देते थे वो ना केवल उसे सुनते थे बल्कि उसको कई बार मान भी लेते थे।

सवाल- इस फिल्म के बाद अगले कौन से प्रोजेक्ट आपके पास हैं।

कृतिका देसाई- धाकड़ फिल्म पिछले साल अप्रैल में शूट की थी, सिर्फ 22 दिनों में ही गानों समेत पूरी शूटिंग पूरी हो गई थी। इसके बाद मैं अभी भी सीरियल्स कर रही हूं। वो तो चलता ही रहेगा।

सवाल- क्या बॉलीवुड में भी किस्मत आजमाएंगी।

कृतिका देसाई- हां बिल्कुल क्यों नहीं…मौका मिला तो ज़रूर काम करूंगी।

सवाल- बॉलीवुड में किस एक्टर के साथ काम करने की तमन्ना है।

कृतिका देसाई- वैसे तो सारे एक्टर अच्छे हैं लेकिन मेरी तमन्ना है कि मैं अमिताभ बच्चन एवं सलमान खान के साथ किसी फिल्म में काम करूं (हंसते हुए)

सवाल- किस एक्ट्रेस को आप कॉम्पटीटर के तौर पर देखती हैं।

कृतिका देसाई- (हंसते हुए) मुझे नहीं लगता कि अगर मैं बॉलीवुड में काम करती हूं तो मेरा किसी से कॉम्पटीशन होगी क्योंकि वहां भी मुझे मेरे हिस्से का काम मिलेगा और मैं अपना बेस्ट दूंगी। रही बात गुजराती इंडस्ट्री की तो यहां भी मुझे ऐसा कोई डर नहीं है और ना ही कोई मेरी कॉम्पटीटर हैं। सब लोग अच्छे हैं।

सवाल- फिल्म में बिज़ी होने के बाद टीवी सीरियल्स को अलविदा कह देंगी।

कृतिका देसाई- टीवी सीरियल्स छोड़ने के बारे में तो सोच भी नहीं सकती। दरअसल बड़ा पर्दा हो या फिर छोटा, एक्टिंग मायने रखती हैं। माध्यम भले अलग है ।

सवाल- आगे का फ्यूचर प्लान मसलन किस तरह का काम करना चाहती हैं।

कृतिका देसाई- हिन्दी दो सीरियल ऑफर हुए हैं लेकिन मैं फिलहाल वो सीरियल नहीं करना चाहती हूं। क्योंकि अगर मैं ज्यादा व्यस्त हो गई तो ना तो थियेटर कर पाऊंगी और ना ही फिल्में। अभी मेरा एक कॉमर्शियल प्ले पद्मापति 18 फरवरी को होने जा रहा है।

सवाल- आखिरी में चलते चलते कुछ बताना चाहें

कृतिका देसाई- मुझे लगता है कि एक्टिंग मेरी डेस्टिनी थी। मैं नानी के साथ रहती हूं। मेरे घर में कोई भी इस इंडस्ट्री में नहीं है। मैं ताज होटल में काम करती थी। बस जॉब सेटिस्फेक्शन नहीं थी। मुझे लगता था कि बस एक्टिंग करनी है और मैं आ गई। मैंने राजश्री प्रोडक्शन, बालाजी, यशराज फिल्मस और ऑप्टिमिस्ट के साथ काम किया है। बस सफर शुरु हो गया।

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