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सिद्धार्थ सागर | खुद के परिवार से अकेला लड़ता महारथी

मां और उनके ब्वॉयफ्रैंड ने किया टॉर्चर

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सिद्धार्थ सागर | खुद के परिवार से अकेला लड़ता महारथी, बीते दिनों ही कॉमेडी की दुनिया के जाने-माने कलाकार सिद्धार्थ सागर के गायब होने की खबरें सामने आयीं थीं। उनके एक दोस्त ने इस बात खुलासा किया था कि सिद्धार्थ की मां उनके साथ गलत व्यवहार करती थी और पिछले काफी लम्बे समय से सिद्धार्थ गायब है। इसके बाद अचानक से मीडिया में हड़कंप मच गया था। सिद्धार्थ के गायब होने की खबरों पर जितना हड़कंप मचा था, उससे ज्यादा हड़कंप उनके सामने आने के बाद मचा है।

हाल में ही सिद्धार्थ सागर मीडिया के सामने आये और उन्होंने अपनी दुखभरी कहानी सभी को बताई। सिद्धार्थ के अनुसार वो अपने परिवार से बहुत प्यार करते है लेकिन उनसे दूर ही रहना चाहते हैं। सिद्धार्थ ने बताया कि अगर कभी उनके माता-पिता को पैसों की जरूरत हुई तो वो उनकी मदद करने के लिए तैयार हैं लेकिन वो उनसे बदले में कुछ नहीं चाहते हैं। सिद्धार्थ के अनुसार वो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी बिखर गए थे लेकिन अब वो दोबारा से अपने पैरों पर खड़े होना चाहते हैं।

सिद्धार्थ ने मीडिया को बताया, ‘मेरी जिंदगी में एक ऐसा समय आ गया जब मैं काफी कमजोर महसूस करने लगा और मेरा वजन काफी ज्यादा बढ़ गया। क्योंकि मैं अपनी सिगरेट की आदत को छोड़ने की कोशिश कर रहा था तो मैं काफी ज्यादा कॉफी पीने लगा था। उस दौरान मुझे बोलने तक में दिक्कत होने लगी। जब मैंने इसके बारे में अपने माता-पिता को बताया तो उन्होंने मुझे बताया कि मुझे ‘बाईपोलर डिसीस’ की दवाएं दी जा रही हैं।

जब मैंने यह सुना तो मैं दंग रह गया। मुझमें इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे लेकिन मेरे माता-पिता मेरे खाने में यह दवाइयां मिला रहे थे, यह जानकर मैं टूट गया। मैं अपनी मां पर पूरा भरोसा करता था, इसलिए मैंने कभी भी अपने रूपये का ख्याल नहीं रखा। एक दिन प्रॉपर्टी को लेकर एक विवाद मेरे सामने आया तब मुझे पता चला कि हमारे पास बिल्कुल रूपये नहीं हैं क्योंकि मेरी मां का दोस्त एक बहुत बड़ी रकम लेकर भाग गया था। यह जानने के बाद तो मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया।

सारी चीजों से परेशान होकर मैंने नशा करना शुरू कर दिया। हालांकि जल्द ही मुझे यह अहसास हो गया कि यह रास्ता सही नहीं है। मैंने इसके बारे में अपनी मां को बताया तो वो भी काफी दुखी हुई। मुझे एक रिहैब सेंटर भेजा गया ताकि मैं ठीक होकर वापस लौट सकूं लेकिन वहां तो मेरी जिंदगी और भी बुरी हो गई। वहां मुझे बुरी तरह से पीटा जाता था। मेरे मुंह से खून निकल आता था, तब भी मेरी पिटाई होती रहती थी। मैंने कैसे भी करके अपने मैनेजर से कॉन्टेक्ट किया और वहां से बाहर निकला।

रिहैब से बाहर आकर मेरी सुयश से कई बार लड़ाई भी हुई। एक दिन जब मैं गोवा से लौट रहा था तब उन्होंने मुझे जबरदस्ती पकड़कर पागलखाने में दाखिल करवा दिया। वहां मुझे काफी प्रताड़ित किया गया। जब मेरे माता-पिता और सुयश के पास पागलखाने की फीस भरने के पैसे नहीं बचे तो उन्होंने मुझे आशा की किरण नामक रिहैब सेंटर में भर्ती करवा दिया क्योंकि वहां पैसे नहीं जाते थे। आशा की किरण पहुंचने के बाद वहां के लोगों को लगा कि मेरे साथ कुछ गलत हो रहा है। वहां के लोगों ने मेरी बात सुनना शुरू की।

सिद्धार्थ सागर के अनुसार वो लम्बे समय तक इन सारी चीजों पर इसलिए चुप रहे क्योंकि वो अपने पारिवारिक मुद्दे को सामाजिक नहीं करना चाहते थे। सिद्धार्थ के अनुसार, ‘मेरे माता-पिता 20 साल पहले अलग हो गए थे लेकिन दोनों के बीच एक दोस्ती का रिश्ता था। मेरे पिता दिल्ली में रहते हैं और मैं अपनी मां के साथ मुंबई में रहता था। क्योंकि इतने बड़े शहर में बस हम दोनों लोग ही साथ में थे तो मैं अपनी मां के काफी करीब था। वो मेरी सच्ची दोस्त बन गई थी।

मैं उनके अलावा किसी दूसरे इंसान पर भरोसा नहीं करता था। कुछ समय पहले उनकी मुलाकात सुयश नाम के एक इंसान से हुई और उन्होंने मुझे इस बारे में बताया। मैं उनके लिए बहुत खुश हुआ कि उनकी जिंदगी में आखिरकार एक साथी की कमी पूरी होने जा रही है लेकिन चीजें वहीं से खराब होना शुरू हो गईं। मुझे बहुत दुख हो रहा है कि मैं अपने परिवार की बातें समाज के सामने ला रहा हूं लेकिन मेरे पास दूसरा कोई चारा नहीं है।’

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