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वीरे दी वेडिंग | “लड़कियां गालीं दें तो उसमें गलत क्या है?” सुमीत व्यास

ट्रेलर और गानों में इस्तेमाल हुई भाषा और गालियों ने इस फ़िल्म को चर्चा में ला दिया है।

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अपनी स्टोरी लाइन से ज़्यादा फ़िल्म में इस्तेमाल की गई बोल्ड लैंग्वेज और गालियों की वजह से ज़्यादा सुर्खियों में रही है ‘वीरे दी वेडिंग’। इस फ़िल्म के ट्रेलर और गानों में इस्तेमाल हुई भाषा और गालियों ने इस फ़िल्म को चर्चा में ला दिया है। वीरे दी वेडिंग को इसी के चलते सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जा रहा है। फ़िल्म में काम कर रहे सुमीत व्यास ने कहा कि कुछ लोग वाकई बेहद हिप्पोक्रेट होते हैं। अगर महिलाएं गालियों का इस्तेमाल करती हैं तो इसमें परेशानी क्या है? हमारे समाज के कई हिस्सों में पुरूषों के साथ ही साथ महिलाएं भी गालियां देती है तो फ़िल्म में इसका चित्रण करने पर इस पर हायतौबा मचाने का कोई फायदा नहीं है।

सुमीत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि फ़िल्म में ये गालियां जबरदस्ती ठूंसी गई है या फिर सिर्फ़ सेन्सेशन्लाइज़ करने के लिए इसे फ़िल्म में इस्तेमाल किया गया है। शहरी अपर क्लास लोग गालियां देते हैं और फ़िल्म को रियलिस्टक बनाने के लिए ही ऐसा किया गया था।

सुमीत ने आगे कहा कि अगर फ़िल्मों में पुरूष किरदार गालियां देते हैं तो दर्शकों को ये कूल लगता है लेकिन जब कोई महिला किरदार स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार गालियां देती है तो ये लोगों को अखरने लगता हैं और इन महिला किरदारों को ट्रोल किया जाता है। ये माइंडसेट बदलने की ज़रूरत है। किसी ने भी ओमकारा या गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फ़िल्मों में इस्तेमाल हुई गालियों के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन यहां वीरे दी वेडिंग फ़िल्म में इस्तेमाल हुई अभद्र भाषा पर बहस हो रही है। ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

वीरे दी वेडिंग के साथ ही करीना कपूर दो साल बाद बॉलीवुड में अपना कम बैक कर रही है। इस फिल्म से इन सभी सितारों को काफी उम्मीदें भी है। सुमीत ने कहा कि करीना, सोनम कपूर और स्वरा के साथ काम करना मज़ेदार अनुभव रहा। वे बेहद प्रतिभाशाली और कूल लोग हैं। इस फ़िल्म में करीना के साथ मेरे ज्यादा सीन्स हैं और मैं ये कह सकता हूं कि वे बेहद प्रोफ़ेशनल हैं।

सुमीत परमानेंट रूममेट्स नाम के शो के साथ ही अपने आपको एक वेबसीरीज स्टार के रूप में स्थापित कर चुके हैं। सुमीत ने बताया कि वेब सीरीज़ से फ़िल्मों तक का सफ़र तय करना शानदार रहा है। फ़िल्में भी वेबसीरीज़ से ज़्यादा अलग नहीं है। हां, कंटेंट काफी अलग है। वेबसीरीज़ में लोग कई तरह के प्रयोग करना पसंद करते हैं जबकि फ़िल्मों में थोड़ा सतर्क रहना पड़ता है। हालांकि ये ज़रूर है कि बॉलीवुड के पारंपरिक अंदाज़ में फ़िल्माए जाने वाले गाने और डांस सीक्वेंस से मुझे थोड़ी घबराहट ज़रूर होती है।

सुमीत को उम्मीद है कि वीरे दी वेडिंग के बाद कमर्शियल सिनेमा में महिलाओं पर केंद्रित फ़िल्मों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये एक ज़रूरी फ़िल्म है और इसे बनाए जाने की ज़रूरत है क्योंकि बॉलीवुड में ऐसी कम ही फ़िल्में हैं जिनमें महिलाओं की दोस्ती उनके संघर्ष पर ईमानदारी से फिल्म बनाने की कोशिश हुई है। फ़िल्म वीरे दी वेडिंग चार शहरी लड़कियों और उनके आम संघर्ष की कहानी है। इस फ़िल्म में करीना अपनी लवलाइफ में परेशान है, स्वरा भास्कर को एक डिवोर्स का सामना करना पड़ता है। शिखा हाल ही में मां बनी हैं, वहीं सोनम प्यार की तलाश में भटक रही हैं। वीरे दी वेडिंग 1 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

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