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पद्मावती की मुश्किल इतनी बढ़ चुकी हैं कि शायद ही अब आप ये फिल्म देख पाएं

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पद्मावती की मुश्किल इतनी बढ़ चुकी हैं कि शायद ही अब आप ये फिल्म देख पाएं। कल संसदीय समिति के सामने संजय लीला भंसाली को जम कर फटकार मिली तो उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म प्रसिद्ध सूफी संत मलिक मुहम्मद जायसी की मशहूर रचना ‘पद्मावत’ पर बनी है। वहीं सेंसर बोर्ड चीफ प्रसून जोशी ने बताया कि एक्सपर्ट पैनल की टीम इस फिल्म को देखेगी।

सूत्रों के मुताबिक, जो पैनल ‘पद्मावती’ देखेगी, उसमें कुछ इतिहासकार भी शामिल होंगे और फिल्म निर्माताओं को सेंसर बोर्ड (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन CBFC) के सामने फिर से उचित एंट्री के तहत अपना आवेदन देना होगा और बताना होगा कि उनकी फिल्म कल्पनाओं पर आधारित है या फिर ऐतिहासिक घटनाओं से ताल्लुक रखती है।

भंसाली ने सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसद की स्थायी समिति के सामने यह स्पष्ट कहा है कि उनकी फिल्म की कहानी मलिक मोहम्मद जायसी की रचना पर आधारित है, जिसका मतलब है कि फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर कोई दावा नहीं करती। हालांकि, जो लोग फिल्म का विरोध कर रहे हैं और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगा रहे हैं, वे भंसाली की इस दलील से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं।

आईटी कमिटी के अध्यक्ष बीजेपी के अनुराग ठाकुर ने भंसाली से सवाल किया कि उनकी फिल्म लगातार विवादों में रही है। नतीजतन फिल्म इंडस्ट्री पर भेदभाव का आरोप लग रहा है। साथ ही इंडस्ट्री की आमदनी को भी नुकसान पहुंचा है। भंसाली से यह भी पूछा गया कि भारत में मंजूरी मिले बिना फिल्म यूके कैसे पहुंच गई? जिससे इंटरनेट पर लीक होने का खतरा भी है।

फिल्म पद्मावती के खिलाफ देश के कई हिस्सों में राजपूत और हिंदू संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। फिल्म का विरोध करने वालों का आरोप है कि फिल्म में रानी पद्मिनी के चरित्र के साथ छेड़छाड़ की गई है। संगठनों का आरोप है कि भंसाली ने फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर अपनाया है।

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