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संजय लीला भंसाली बाज़ार की नब्ज़ समझ चुके हैं -पद्मावती विवाद

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संजय लीला भंसाली की पद्मावती को लेकर जितना विवाद हो रहा है। शायद ही भारतीय सिनेमा के इतिहास में किसी फिल्म को लेकर इतना विवाद हुआ हो। करणी सेना ने इसे जहां राजपूत अस्मिता का प्रश्न बना लिया है तो वहीं राज्य सरकारों ने भी इस फिल्म के विवाद में अपने हाथ डाल दिए हैं। पद्मावती विवाद बढ़ चुका है।

पद्मावती पर संजय लीला भंसाली ने फिल्म कैसी बनाई है। इसको समझने से पहले बॉलीवुड का पूरा गणित समझना होगा। संजय लीला भंसाली कोई कच्चे खिलाड़ी तो हैं नहीं जो यूं ही पद्मावती विवाद को ज़िंदा रखें। वो भी चाहते तो पद्मावती विवाद का पटाक्षेप आसानी से हो सकता था। लेकिन ऐसा ना हुआ है और ना होगा। पद्मावती विवाद अभी तो खत्म होता नहीं दिखाई दे रहा है।

दरअसल सारा खेल बाहुबली पार्ट 1 और बाहुबली पार्ट 2 के नज़रिए से देखिए तो आपको समझने में आसानी होगी। दरअसल इधर बॉलीवुड में बायोपिक का दौर शुरु हुआ था। बॉलीवुड एक के बाद एक फिल्में बायोपिक के नाम पर दर्शकों को परोसता जा रहा था। नव राष्ट्रवादी दर्शक इन फिल्मों पर टूट पड़ रहे थे। फिल्में अच्छा कारोबार कर रही थीं। चाहे वो एक था टाइगर हो, रुस्तम हो, दंगल हो, मैरी कॉम हो, धोनी हो हर फिल्म ज़बरदस्त जा रही थी। यहां तक कि बेहद उबाऊ फिल्म जिसकी पटकथा बेहद ढीली थी , सरबजीत उस फिल्म ने भी ठीक ठाक कारोबार कर लिया।

खैर अब बायोपिक पर बायोपिक बॉलीवुड परोस रहा है। लेकिन ये दौर भी उसी तरह थमेगा जैसे कभी एंग्री यंग मैन या फिर कुटिल सास, या फिर रोमांटिक एक्टर्स की फिल्मों का दौर थमा है। संजय लीला भंसाली हमेशा से थोड़ी अलग तरह की फिल्में बनाते रहे हैं। बतौर निर्देशक खामोशी, हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक से लेकर सांवरिया तक उन्होंने अलग तरह की फिल्मों में प्रयोग किए। गोलियों की रासलीला राम लीला से उन्होंने बाज़ार की नब्ज़ पकड़नी शुरु कर दी। नाम जितना विवादित होगा फिल्म उतनी ही चलेगी। खैर गोलियों की रासलीला राम लीला भी विवादों में घिरी और जब रिलीज़ हुई तो भंसाली साहब को ज़बरदस्त मुनाफा दे गई।

अब पूरी स्टोरी का टर्निंग प्वाइंट यहां से शुरु होता है। संजय लीला भंसाली भले ही बहुत बेहतर निर्माता निर्देशक हों लेकिन दिमाग में तो उनके भी मुनाफा और घाटा चलता रहता था। गोलियों की रासलीला राम लीला से उन्हें मुनाफा कमाने का एक आसान तरीका दिख गया। इसके बाद भंसाली ने इसे अपनी अगली फिल्म में भुनाने की कोशिश की और बाजीराव मस्तानी बनाई।

एक योद्धा बाजीराव की बायोपिक में रोमांस का ऐसा तड़का लगाया कि ये फिल्म भी विवादों में आ गई। खैर इसके मुनाफे को लेकर संजय लीला भंसाली कन्फर्म थे ही क्योंकि उन्हें अपनी पिछली फिल्म गोलियों की रासलीला राम लीला याद थी ही।

बाजीराव पेशवा के वंशजों ने आरोप लगाया है कि मराठा राजा और उनकी पत्नियों काशीबाई और मस्तानी का फिल्म में चित्रण करते समय ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पत्र लिखकर में पेशवा के वंशज प्रसादराव पेशवा ने मांग की कि सरकार को इस फिल्म की समीक्षा करनी चाहिए, मामले की जांच करानी चाहिए और उसके अनुसार फैसला करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि ‘पिंगा’ नृत्य शैली मराठी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है और इसे फिल्म में एक आइटम सॉन्ग में बदल दिया गया और कपड़े तथा डांस निर्देशन उसी के मुताबिक है।

फिर कहा गया कि यह फिल्म ‘राउ’ नाम की बुक पर आधारित है और लेखक ने बाजीराव और मस्तानी की प्रेमकथा को अपने तरीके से कहा है। इसलिए इसे एक खूबसूरत प्रस्तुति के तौर पर देखा जाए। ऐसी कहानी जिसे संजय लीला भंसाली के नजरिए से बताया गया है।

अब आपको कहानी थोड़ी थोड़ी समझ में आने लगी होगी लेकिन क्लाइमेक्स तो अभी बाकी है। पद्मावती विवाद पर भी कुछ ऐसा ही बयान आ रहा है कि फिल्म एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है। जायसी के पद्मावत को संदर्भ मानकर इस फिल्म का निर्माण किया गया है। घूमर डांस पर भी ऐसे ही तर्क मेकर्स की ओर से दिए जाने लगे।

यानि पहले आप तथ्यों का कीमा बना दें। फिर कहें कि ये तो काल्पनिक है। आखिर ये भी तो बायोपिक है। भले ही इतिहास से 200-300 साल पुराने व्यक्तित्व आप उठा रहे हों या फिर मैरी कॉम या धोनी की बायोपिक की तरह फिल्म बना रहे हों। भंसाली को पता है कि अब पद्मावती या फिर राजा रावल रतन सिंह या मान लीजिए अलाउद्दीन खिलजी तो उन पर मुकदमा करेगा नहीं। सो काल्पनिक बता कर निकल लेंगे। इसका फायदा उठाना संजय लीला भंसाली को पता है।

खैर जितने विवाद होंगे उतना ही मोटा मुनाफा होगा, भंसाली को ये बात समझ में आ चुकी है। लेकिन फिर सवाल उठता है कि आखिर इस फिल्म के विवाद का अंत क्यों नहीं हो रहा है। भई विवाद खत्म हो तो फिल्म रिलीज़ हो और सब लोग फिल्म का आनंद लें। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है और ना ही आसानी से होगा।

अब मुद्दे की बात पर आते हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों को हमेशा से ऐसा देखा गया है कि मानों क्या बना दिया। अतिश्योक्ति की हद कर देते हैं साउथ की फिल्मों में। वहां के हीरो बॉलीवुड के एक्टर्स की तरह क्लीन शेव्ड नहीं होते। एक्ट्रेस भी मोटी होती हैं। ये तमाम बातें साउथ सिनेमा के बारे में फैला दी गई थीं। भले ही आप उनकी फिल्में उठा कर हिन्दी में रीमेक बनाईये। मोटा मुनाफा कमाईये लेकिन दबे मुहं ये भी बताते रहिए। लेकिन इसका अंत होने जा रहा था।

10 जुलाई 2015 को बाहुबली द बिगनिंग रिलीज़ होती है। फिल्म के निर्देशक होते हैं एस एस राजामौली। फिल्म ज़बरदस्त गई। फिल्म को ऐसा बनाया गया था कि दर्शक डेली सोप की तरह इसके दूसरे भाग का इंतज़ार करने लगे। कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा। बहुत सारे ज़ोक इस पर बन गए। लोगों ने एस एस राजामौली की ज़बरदस्त तारीफ की। इसके साथ ही प्रभास, राणा दुग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी इन सबने खूब सुर्खियां बटोरीं।

इसके करीब 6 महीने बाद 18 दिसंबर 2015 को तमाम विवादों के बाद बाजीराव मस्तानी रिलीज़ हुई। जैसा कि पहले से पता था विवादित फिल्म है सो मुनाफा भी अच्छा दे गई। संजय लीला भंसाली का आइडिया काम कर गया। लेकिन असल इम्तिहान बाकी था।

फिर इधर एस एस राजामौली बाहुबली 2 की तैयारी में जुट गए और 28 अप्रैल 2017 को बाहुबली 2 रिलीज़ हो गई। फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। संजय लीला भंसाली ने भी अपनी पद्मावती की प्लानिंग इस फिल्म के करीब 8 महीने बाद रिलीज़ की रखी। लेकिन चूंकि उनकी पिछली दो फिल्मों ने भरपूर विवाद पैदा किए थे सो ये फिल्म कैसे विवाद से बचती। क्योंकि विवाद नहीं तो मोटा मुनाफा नहीं।

लेकिन बाहुबली बिगनिंग और बाहुबली कॉन्क्लूज़न ने संजय लीला भंसाली की क्यों पूरे बॉलीवुड के सामने एक प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया। इतनी बंपर कमाई के रिकॉर्ड को तोड़ा कैसे जाए। अब संजय लीला भंसाली की एक चीज़ तो है वो सेट की भव्यता का बड़ा ख्याल रखते हैं। फिल्में बड़े कैनवस पर बनाते हैं। अब ऐसे में बॉलीवुड ने एस एस राजामौली के सटीक जवाब के तौर पर संजय लीला भंसाली को पहचान लिया। लेकिन इसमें खतरा था। अगर पद्मावती की कमाई बाहुबली से कम होगी तो बॉलीवुड को उनकी छत्रछाया में आना पड़ेगा। साउथ फिल्मों का परचम तो एस एस राजामौली फहरा ही चुके हैं।

अब इसमें एक ही दांव बचता था कि फिल्म को इतना विवादित बना दिया जाए कि अपने आप ही दर्शक इसे देखने के लिए थियेटर में उमड़ पड़े। विदेशों में भी फिल्म अच्छी कमाई करे इसके लिए भी ब्रिटेन फिल्म भेज दी गई। फिल्म पास भी हो गई लेकिन देशभक्त की तरह मेकर्स ने घोषित कर दिया कि साहब पहले भारत में फिल्म रिलीज़ होगी उसके बाद ही विदेशों में रिलीज़ होगी। कुल मिलाकर पद्मावती ने देश और विदेश दोनों जगह सुर्खियां बटोर लीं। जब फिल्म को पहले भारत में रिलीज़ करना था तो ब्रिटेन किस खुशी में भेज दी थी।

कुल मिलाकर इतना तय है कि पद्मावती फिल्म जितनी देर में रिलीज़ होगी उतना ही फायदा अपने मेकर्स को देकर जाएगी। विवाद खत्म हों इसकी कोई सकारात्मक पहल नहीं दिखाई दे रही है सिवाए बयानों के। जो कोई भी कभी पद्मावती विवाद पर अपनी राय दे ही देता है।

इन सबके साथ ही साथ एस एस राजामौली ने फिल्म को हिन्दी में भी रिलीज़ करके संदेश दे दिया कि अब बॉलीवुड साउथ की बड़ी फिल्मों की रीमेक भी बनाना भूल जाए तो अच्छा। क्योंकि फिल्म तो वही रहती है बस डबिंग का खर्चा थोड़ा बढ़ जाता है। फिर क्यों ना खुद ही हिन्दी में डबिंग कराकर हिन्दी भाषी सिनेमा प्रेमियों को परोस दी जाए। बॉलीवुड अब इस रीमेक वाले फंडे को भी नहीं अपना सकता।

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