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ओम पुरी जिसने मुफलिसी में रेलवे क्वार्टर में भी शरण ली लेकिन हार नहीं मानी

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ओमपुरी जब राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में अभिनय की बारीकियां सीख रहे थे तो उन्हें उनके साथियों ने हतोत्साहित करने की कोशिश की। चेहरे पर निशान एवं सामान्य कद काठी वाले ओमपुरी को उनके साथी एक ही बात कहते थे, “तुम यहां अपना समय बर्बाद कर रहे हो। कभी कामयाब नहीं हो पाओगे।”

जब वे भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफआईटी) पुणे में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे, तब भी सभी ने उन्हें यही कहकर हतोत्साहित किया था, लेकिन उन्होंने इसी हताशा में आशा की राह ढूंढ़कर मनचाहा मुकाम हासिल कर लिया।

एनएसडी से अभिनय में 1973 बैच के स्नातक ओमपुरी के जूनियर साथी 1979 बैच के अमिताभ श्रीवास्तव कहते हैं, ओम भाई जितने सहज इंसान थे, उतने ही सहज कलाकार। उन्होंने हार कभी नहीं मानी। साथी भले ही उन्हें हतोत्साहित करते थे, मगर वे बुरा नहीं मानते थे। वे जानते थे कि वे मॉडल नहीं हैं लेकिन एक अभिनेता की कसौटी पर खुद को हमेशा खरा उतारने की कोशिश में लगे रहते थे।

मुफलिसी के दिनों में श्रीराम सेंटर के पास रेलवे रोड के रेलवे क्वार्टर में भी उनका कुछ वक्त गुजरा। उनकी पहली पत्नी सीमा कपूर भाई अन्नू कपूर के साथ वहां किराये पर रहती थीं। वे अक्सर यहां आते थे। कहा करते थे, कलाकार चला जाता है लेकिन उसकी कला हमेशा जिंदा रहती है।

ओम बाहर से भले ही बहुत आकर्षक या सुंदर नहीं थे लेकिन भीतर से बहुत अच्छे इंसान थे। कई साल पहले एक शो में गुरु के बारे में बात करते हुए भावुक हो गए थे। अल्काजी के 98वें जन्मदिन पर भी वे दिल्ली आए थे और जब भी कभी दिल्ली आते तो उनसे मिलना चाहते थे। बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी उनका अभिनय कमाल का रहा।

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