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हलाला पर फिल्म बना डाली नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने, देवबंदी उलेमा ने तरेरी आंखें

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हलाला पर फिल्म बना डाली नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने, देवबंदी उलेमा ने तरेरी आंखें, मुस्लिम समाज में व्याप्त हलाला प्रथा को निशाना बनाकर बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी द्वारा बनाई गई शार्ट फिल्म ‘मियां कल आना’ पर देवबंदी उलमा ने आंखें तरेर ली हैं। उनका कहना है कि फिल्म में हलाला को लेकर जो कहानी पेश की गई है, उसे सही नहीं कहा जा सकता। नवाजुद्दीन का यह कार्य नाजायज है।

फतवा आन लाइन के चेयरमैन मौलाना अरशद फारूकी ने कहा है कि फिल्म बनाने वाले नवाजुद्दीन को शरीयत की जानकारी नहीं है। इस्लाम में तो फिल्म बनाना और देखना भी नाजायज है। नवाजुद्दीन का कार्य नाजायज है। मदरसा अदीबुल उलूम के मोहतमिम काजी रिहान पद्मावती, अलाउद्दीन खिलजी का उदाहरण देते हुए किसी भी किरदार या धार्मिक मसलों को गलत तरीके से पेश कर फिल्म बनाना एक चलन बनता जा रहा है। रहीस फिल्म में भी शिया समुदाय के खिलाफ गलत सीन था, जिसे विरोध के बाद हटाया गया। नवाजूद्दीन का मुस्लिम होने के बावजूद इस तरह की फिल्म बनाना गलत है।

इस फिल्म को लेकर तंजीम उलमा-ए-हिंद व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि बुनियादी तौर पर हलाला का जो मसला है वो पहले शौहर से शादी करने के लिए नहीं है। यह प्रक्रिया तलाकशुदा महिला को सहारा दिलाने के लिए होती है। तलाक के बाद हलाला करने में यह कोई शर्त नहीं होती कि किसी दूसरे व्यक्ति से निकाह केवल इसलिए किया जा रहा है कि औरत फिर से पहले शौहर से निकाह कर सके। हलाला के बाद पहले शौहर से शादी करने के लिए या तो दूसरा शौहर उसे छोड़ दे या मर जाए तो इस स्थिति में औरत पहले पति से निकाह कर सकती है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्म में जो कहानी दिखाई गई है उसे गलत तरीके से पेश किया गया।

आपको बता दें कि अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी द्वारा प्रोड्यूस की गई पहली शॉर्ट फिल्म ‘मियां कल आना’ को 18 जनवरी को यूट्यूब पर रिलीज किया गया। मुस्लिम समाज में व्याप्त हलाला प्रथा को निशाना बनाकर बनाई गई फिल्म में दिखाया गया है कि तीन तलाक की प्रक्रिया के दौरान मुस्लिम महिला हलाला के दौरान किन-किन हालातों से गुजरती है।

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