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सुहैब इलियासी | इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड का एंकर ही बन गया वॉन्टेड | उम्रकैद

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सुहैब इलियासी अपनी पत्नी की हत्या का दोषी करार दिया गया। अदालत ने टीवी सीरियल प्रोड्यूसर सुहैब इलियासी को पत्नी अंजू की हत्या में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में 17 वर्ष बाद फैसला आया है। कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसके मल्होत्रा ने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष इलियासी पर आरोप साबित करने में सफल रहा है।

11 जनवरी, 2000 को सुहैब के घर पर पत्नी अंजू की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। मर्डर करने के लिए कैंची का इस्तेमाल किया गया था। 28 मार्च, 2000 को पुलिस ने दहेज हत्या के तहत सुहैब को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जांच में पाया था कि सुहैब और पत्नी अंजू इलियासी के बीच अक्सर झगड़ा होता था। वारदात के बाद अपने गुनाह पर पर्दा डालने के लिए उसकी दोस्त को फोन करके बताया कि अंजू ने सुइसाइड कर लिया है। अंजू के परिवार वालों ने सुहैब पर हत्या का आरोप लगाया था। 1995 में सुहैब ने पत्नी के साथ एक क्राइम शो भी चलाया। मार्च, 1998 में टीवी क्राइम शो इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड की ऐंकरिंग से फेमस हो गया था।

सुहैब इलियासी का तर्क था कि उसने आत्महत्या की है, जबकि अंजू की मां व उसकी दो बहनों ने शपथ पत्र सहित बयान दिया था कि अंजू ने उन्हें कई बार फोन कर बताया था कि इलयासी कभी भी उसकी हत्या कर सकते हैं। 28 मार्च 2000 को पुलिस ने सुहैब को गिरफ्तार किया था। बाद में उसे जमानत मिल गई थी। निचली अदालत ने 29 मार्च 2011 को सुहैब के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या की धारा के तहत आरोप तय किए थे। इसी आदेश को सुहैब की सास रुकमा सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने हत्या, सुबूत मिटाने सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप तय करने की मांग की थी।

अदालत ने इलियासी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उन्हें फर्जी तरीके से फंसाया गया है। 12 अगस्त 2014 को हाईकोर्ट ने सुहैब के खिलाफ पत्नी अंजू की हत्या का केस चलाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि अंजू की दो बहनों के बयानों को देखने के बाद प्रथम दृष्टया सुहैब के खिलाफ हत्या का मामला बनता है। सुहैब के वकील ने अदालत से फांसी की सजा नहीं सुनाने की अपील की थी। 16 दिसंबर को सुहैब इलियासी को 17 साल पुराने इस जघन्य हत्याकांड के लिए दोषी करार दिया गया था।

इंडियाज मोस्ट वांटेड खुद ही बन गया वांटेड

सुहैब सुहैब इलियासी को ’90 के दशक में भारत में टेलीविजन पर क्राइम बेस्ड रियलिटी शो इंडियाज मोस्ट वांटेड  की शुरुआत करने वाले के तौर पर जाना जाता है। एक निजी टीवी चैनल पर दिखाए जाने वाले इस शो में इलियासी अपराध और अपराधियों को टीवी पर दिखाते थे।

वर्ष 2000 में पत्नी की हत्या के आरोप के बाद शो बंद हो गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान अंजू की बहन रश्मि ने एक डायरी पुलिस को दी थी। उसमें अंजू ने बहुत कुछ लिखा था। अंजू की हत्या मयूर विहार के अपार्टमेन्ट में की गई थी। उस दौरान उसके दो निजी सुरक्षाकर्मी राजकुमार और शत्रुघ्न तैनात थे। पुलिस को जांच में बाथरूम में ब्लड के निशान मिले थे। अंजू की कथित रूप से लगभग 10 बजकर 45 मिनट पर मौत हुई। सुहैब उसे 12 बजकर 26 मिनट पर एम्स लेकर पहुंचा।

सुहैब दिल्ली में पैदा हुआ। सुहैब इलियासी और अंजू साल 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया में एक साथ पढ़ रहे थे। तभी दोनों के बीच प्यार हुआ। अंजू के घर वालों ने इस रिलेशन को लेकर विरोध किया था। इसके बाद दोनों लंदन चले गए थे। विरोध के बावजूद सुहैब और अंजू ने साल 1993 में लंदन में विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह कर लिया था। अंजू ने अपना नाम बदलकर अफशां रख लिया था। सुहैब ने वहां टीवी एशिया में काम किया था। वो इस चैनल का प्रोग्राम प्रोड्यूसर रहा। साल 1996 में भारत लौटा और अपने दम पर प्रोग्राम शुरू किया, लेकिन साल 2000 आने तक दोनों के संबंधों में खटास बढ़ने लगी थी। घटना के समय इनकी एक ढाई साल की बेटी भी थी।

फिल्मी कहानी बना कर गुमराह कर दिया पुलिस को

हत्या का यह केस और उसमें आए ट्विस्ट्स, किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। कहानी शुरू हुई साल 2000 में। तारीख थी 10 जनवरी। सुहैब की पत्नी अंजू इलयासी को पूर्वी दिल्ली स्थित आवास से जख्मी हालत अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस को दिए बयान में सुहैब ने बताया कि दोनों के बीच हुई कहासुनी के बाद अंजू ने आत्महत्या करने के मकसद से खुद को कई बार चाकू मारकर घायल कर लिया है। अस्पताल में इलाज के दौरान अंजू को बचाया नहीं जा सका। दो ओटॉप्सी रिपोर्ट्स, फरेंसिक जांच और अंजू के माता-पिता के बयान से सुहैब की बात सही साबित हुई और पुलिस आत्महत्या की थिअरी पर आगे बढ़ी।

मामले में ट्विस्ट तब आया जब फरवरी में अंजू की बड़ी बहन रश्मि कनाडा से भारत आईं। पेश से टीचर रश्मि ही वह शख्स थीं जिनसे अंजू ने मौत से पहले आखिरी बार बात की थी। अंजू ने रश्मि को सुहैब की हरकतों के बारे में सबकुछ बताया था। रश्मि के बयान ने इस पूरे केस को पलटकर रख दिया। रश्मि ने पुलिस को एक डायरी भी दी। उसमें अंजू ने बहुत कुछ लिखा था।इसके बाद आत्महत्या की थिअरी संदेह के घेरे में आई गई। अंजू के माता-पिता और पुलिस को भी यकीन हो गया कि सुहैब ने ही अंजू की हत्या की है।

पुलिस ने नए सिरे से मामले की जांच शुरू की और 28 मार्च को दहेज के लिए हत्या, प्रताड़ना और सबूत मिटाने के जुर्म में सुहैब इलियासी को गिरफ्तार कर लिया। उस समय पूर्वी दिल्ली एसीपी (ऑपरेशंस) रहे राजीव रंजन ने बताया, ‘ट्रायल कोर्ट ने सुहैब पर से हत्या का चार्ज हटा दिया था, हम उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए और हत्या का आरोप फिर शामिल करवाया। यह पूरा केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, लेकिन हमने जिस तरह कड़ियों को जोड़ा था, उससे सुहैब का अपराध साबित हो रहा था।’ केस से जुड़े एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘मेरा शुरू से मानना था कि इस केस में जैसा दिख रहा है वैसा है नहीं। मैं हत्या, आत्महत्या के कई मामलों की जांच कर चुका हूं और मेरे लिए यह यकीन करना मुश्किल था कि आत्महत्या के केस में शरीर पर एक से ज्यादा घाव हो सकते हैं।’

शिकायतकर्ता के वकील सतेंद्र शर्मा ने बताया इलयासी ने अंजू की हत्या को आत्महत्या साबित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन जांच के दौरान अपने बयान में लगातार बदलाव करते रहने के चलते वह फंस गया। पुलिस ने मृतक की मां रुकमा सिंह की शिकायत पर शुरुआत में इलयासी के खिलाफ आईपीसी के तहत दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। सिंह ने आरोप लगाया था कि टीवी के जरिए अच्छी खासी पहचान हासिल करने वाले इलयासी कथित रूप से कई तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल था। वह उनकी बेटी को दहेज के लिए भी प्रताड़ित करता था, इसीलिए अंजू कनाडा जाकर रहना चाहती थी पर इलयासी को यह मंजूर नहीं था।

इलयासी ने हाई कोर्ट में अर्जी दायर की थी और मामले में उसकी पत्नी की मौत की प्रकृति जानने के लिए नए सिरे से मेडिकल बोर्ड गठित करने के दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि वह अर्जी खारिज हो गई। इसके बाद इलयासी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली। बहरहाल, ट्रायल कोर्ट ने रेकॉर्ड में मौजूद सबूतों के आधार पर इलयासी को हत्या का दोषी करार दिया।

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