सामान्य फ़िल्म है डैडी, दर्शकों को बांध पाने में असफल है फिल्म

सामान्य फ़िल्म है डैडी, दर्शकों को बांध पाने में असफल है फिल्म , निर्देशक आशिम आहलुवालिया की फ़िल्म ‘डैडी’ अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली के जीवन पर आधारित फ़िल्म है। ‘डैडी’ अंडरवर्ल्ड पर बनने वाली तमाम फ़िल्मों की तरह ही केंद्रीय भूमिका में डैडी कहे जाने वाले अरुण गवली की बायोपिक है। मगर आसिम इसे एक साधारण सी फ़िल्म के ऊपर नहीं ले जा पाए हैं।

अरुण गवली का अपराध की दुनिया में पहला कदम सिस्टम के फेलियर से नहीं बल्कि अपराध करके ही रखा गया कदम था। फ़िल्म में ‘डैडी’ के अपराधों को बहुत ही सुविधाजनक ढंग से जस्टिफाई करने की कोशिश की गई है। लेकिन, अपराध अपराध होता है।

डैडी एक सामान्य फ़िल्म है और इसमें किसी भी तरह की सहानुभूति या हीरोइज़्म का अभाव होने से आप तटस्थ भाव से फ़िल्म देखते हैं, मगर उस का हिस्सा नहीं बन पाते। यही इस फ़िल्म की सबसे बड़ी कमी है।

अभिनय की बात की जाए तो अर्जुन रामपाल ने अपने जीवन का सबसे सर्वश्रेष्ठ अभिनय इस फ़िल्म में किया है। उनके दोस्त बने राजेश श्रृंगारपुरे ने भी शानदार अभिनय किया है। फ़रहान अख़्तर जैसे समर्थ अभिनेता ने यह फ़िल्म आखिर क्यों की? यह समझ के परे है।

फ़िल्म का संगीत साधारण है। सिनेमेटोग्राफी उम्दा है। एडिटिंग पर थोड़ा और काम होना चाहिए था। फ़िल्म एक पीरियड की बात करती है तो ज़ाहिर तौर पर कॉस्ट्यूम डिजाइनर और आर्ट डायरेक्टर का काम बढ़ जाता है। लेकिन, उसमें काफी कमियां नजर आती हैं।

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