बंकर का ट्रेलर आउट | सैनिकों पर आधारित है यह फिल्म

बंकर फिल्म में एक कहावत कही गई है- “युद्ध में किसी की जीत नहीं होती, चाहे सैनिक हमारी तरफ के हो या दूसरी तरफ से। हमेशा सैनिकों के परिवारों को नुकसान होता है।” हमारे देश में इंडियन आर्म्ड फोर्सेज के  मेंटल हेल्थ के बारे में सबसे कम डिस्कस किया जाता है । यह फिल्म इंडिया की पहली एंटी-वॉर फिल्म है, जो सैनिकों के मेंटल हेल्थ के बारे में बात करती है।

बंकर में ऑडियंस को उस युद्ध के बारे में न केवल नजदीकी से दिखाया जाएगा बल्कि उस युद्ध के बारे में बताया जाएगा जिसके बारे में हम नही जानते हैं, जैसे कि जो आर्म्ड फोर्स के दिमाग के अंदर चलता रहता है। फिल्म के मेकर्स ने आज अनाउंस किया कि फिल्म का 100% प्रॉफिट  भारत के वीर और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) को डोनेट किया  जायेगा।’ वैगिंग टेल एंटरटेनमेंट’ द्वारा प्रजेंटेड फिल्म का  ट्रेलर लॉन्च करते समय हमारे आर्म्ड फोर्सेज को श्रद्धांजलि दी गई।

फिल्म की एक खास बात यह है कि फिल्म का लगभग 95% हिस्सा 5 दिनों तक 12 फीट बंकर में शूट किया गया है। बंकर, फिल्म में निर्देशक ने बंकर की मदद से सैनिकों के दिमाग में चल रहे संघर्ष कोके बारे में बात की है. एक सैनिक जो देश के प्रति अपने कर्तव्य और परिवार के प्रति अपने कर्तव्य के बीच संघर्ष में होता है। यकीनन यह फिल्म आपके मन में देशभक्ति की भावना भर देगी।

फिल्म में लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह को एक जीवित व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जो कुछ चोटों के साथ पुंछ में एक सीक्रेट बंकर में है। फिल्म में आर्मी परिवारों के बीच मेंटल हेल्थ, इंटर-पर्सनल रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाया गया है। फिल्म को कई फिल्म फेस्टिवल में भी सराहा गया है।

लगभग 96% सैनिक मेंटल हेल्थ के बारे में बात करने या फिर मेंटल हेल्थ से रिलेटेड किसी भी बिमारी पर बात करने से हिचकिचाते है। हमारे इंडिया में लगभग 1.4 मिलियन सैनिक हैं और 2003 से लगभग हर साल 100 सैनिक सुसाइड करते हैं। राइटर और डायरेक्टर जुगल राजा ने कहा, “नॉर्थ ईस्ट तवांग में लेह की यात्रा करने, और सैनिकों से मिलने और उनसे बात करने के बाद, मैंने महसूस किया कि उनके परिवार अपनी लड़ाई खुद अपनी तरह से लड़ रहे थे, और वो सभी सैनिकों से कम नहीं थे, बस इसी ने मुझे बंकर जैसी फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया।

फिल्म, परिवार से दूर होने की वजह से सैनिकों में स्ट्रेस, परिवार से दूर होने के कारण उनकी मदद ना कर पाना, छुट्टियां कैंसिल हो जाना, अकेलापन महसूस होना या खराब मौसम के कारण सैनिकों को जिस तरह के प्रॉब्लम से गुजरना पड़ता है, इन इंपॉर्टेंट मुद्दों पर फोकस करती है।

लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह की भूमिका निभाने वाले लीड एक्टर अभिजीत सिंह ने कहा, “बंकर एक ऐसी फिल्म है, जो हर उस सैनिक की बायोपिक है, जिसका नाम शायद ही आपने अपने जीवन में नही सुना होगा। मैंने 2 महीने अपने स्क्रिप्ट की तैयारियां की, और उन दो महीनों में मैने बहुत कुछ सीखा। मुझे कहा गया कि आर्मी के ऊपर आधारित कोई भी फिल्म नही देखनी है।

विक्रम सिंह एक आम आदमी है, जिसके पास बहुत ही टफ काम है। वह सुपर हीरो नही है, लेकिन वो एक ऐसा  आदमी है जो एक सुपरहीरो के पीछे खड़ा रहता है। ये एक ऐसे सपोर्टिंग कैरेक्टर की कहानी थी जिसे आपने अब तक की आई हुई हर आर्मी पर आधारित फिल्मों में देखा होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने जितना समय साथ में बिताया उसमें से ज्यादातर समय हम एक बंद एरिया में बैठे रहते थे वो भी बिना किसी वेंटिलेशन, जिसने मुझे क्लॉस्ट्रोफोबिक बना दिया था। मुझे शूट के दिन एहसास हुआ की  मेरी आंखे बंद होने के साथ साथ मेरे चेहेर पर १४-१८ घंटो तक प्रोस्थेटिक लगा रहता था जब भी हम बंकर में शूट करते थे।”नेशनल अवार्ड विनिंग सिंगर रेखा भारद्वाज ने भी फिल्म के एक खूबसूरत गाने “लौट के  घर जाना है” के लिए अपनी आवाज दी है।

फिल्म को ‘वैगिंग टेल एंटरटेनमेंट’ द्वारा प्रसेंट किया गया है, और ‘फाल्कन पिक्चर्स प्रोडक्शन’ और ‘ए वाकू नेशनवाइड’ दवरा प्रोडयूस  किया गया है । फिल्म की कहानी को लिखा और डायरेक्ट किया है जुगल राजा ने। अभिजीत सिंह और अरिंदिता कलिता लीड रोल में है।

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