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वेलकम टू न्यूयॉर्क देखने के बाद लगेगा कि आखिर फिल्म बनाई ही क्यों?

क्या दिखाना चाहते थे ये पूरी फिल्म के बाद भी समझ नहीं आएगा

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वेलकम टू न्यूयॉर्क देखने के बाद लगेगा कि आखिर फिल्म बनाई ही क्यों? आज रिलीज हुई सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ, करण जौहर, बोमन ईरानी, लारा दत्ता और रितेश देशमुख की नई फिल्म वेलकम टू न्यूयॉर्क दूसरी तरह की फिल्म है। वैसे तो निर्देशक चकरी टोलेटी की इस फिल्म में आधी इंडस्ट्री है लेकिन फिल्म की कहानी मुख्यता दिलजीत दोसांझ, सोनाक्षी सिन्हा, करण जौहर, लारा दत्ता, बोमन ईरानी और रितेश देशमुख के कंधों पर ही आगे बढ़ती है। इतने सारे कलाकारों में से भी सिर्फ दिलजीत दोसांझ ही दर्शकों के दिलों को छू पाते हैं। वो ही एकमात्र ऐसे कलाकार हैं, जो अपने किरदार को निभाते समय सामान्य लगते हैं।

फिल्म वेलकम टू न्यूयॉर्क की कहानी एक इवेंट कम्पनी में काम करने वाली लारा दत्ता की है, जिसके मालिक बोमन ईरानी हैं। लारा दत्ता, ने अपनी पूरी जिंदगी बोमन की कम्पनी में लगा दी है लेकिन, जब वो बोमन ईरानी से कम्पनी में पार्टनरशिप की मांग करती है तो उन्हें सिर्फ बातें ही सुनने को मिलती हैं। इससे खफा होकर लारा, बोमन से बदला लेने की ठानती है।

बोमन ईरानी की कम्पनी आईफा इवेंट ऑर्गनाइज करा रही है, जिसमें इस बार एक टैलेंट हंट कॉम्पटीशन होना है। लारा इस टैलेंट हंड कॉम्पटीशन के लिए दो सबसे खराब प्रतियोगियों तेजी (दिलजीत) और जीनल (सोनाक्षी) को चुनती है। तेजी जो बड़े-बड़े कलाकारों के डायलॉग बोलकर अपने आप को एक बेहतरीन कलाकार समझता है और जीनल अपने दादी-दादा के लिए कपड़े डिजाइन करके सोचती है कि उसके अंदर एक बेहतरीन डिजाइनर छुपी हुई है। हालांकि सच्चाई इन दोनों की सोच से कोसों दूर है।

लारा को लगता है कि वो इन दोनों के माध्यम से आईफा इवेंट को बिगाड़ने में कामयाब रहेगी। जिसका सीधा असर बोमन की इवेंट कम्पनी पर पड़ेगा और वो बंद हो जायेगी। अब लारा इस काम में कामयाब हो पाती हैं या नहीं यह तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा।

चाहें सोनाक्षी सिन्हा हों या फिर करण जौहर, बोमन ईरानी हों या फिर रितेश देशमुख, सभी ओवरएक्टिंग करते हुए नजर आते हैं। करण, बोमन, लारा और रितेश के किरदार तो फिर भी छोटे हैं लेकिन सबसे ज्यादा निराश तो सोनाक्षी सिन्हा करती हैं। वो फिल्म में एक गुजराती लड़की का किरदार निभा रही हैं और बार-बार ‘कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में’ कहती हुई दिखती हैं। अगर वो यह लाइन न बोलती तो शायद दर्शकों को यह पता भी नहीं चलता कि वो फिल्म में मुंबई की लड़की बनी हैं या फिर गुजरात की।

चकरी टोलेटी के निर्देशन की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वो दर्शकों को कुछ नया दिखाने में नाकामयाब रहते हैं। अगर आपने टीवी पर आने वाली आईफा अवॉर्ड की मेकिंग और मेन इवेंट देख रखा है तो आप इस फिल्म को देखते समय काफी निराश होंगे।

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