सिमरन इस बार ज्यादा नहीं लुभाएगी, कहानी में ढ़ीलापन फिल्म को ले डूबा , आज बॉक्स ऑफिस की क्वीन कंगना रनौत की फिल्म सिमरन रिलीज हुई है। कंगना की इस फिल्म से सभी को काफी उम्मीदें है। कंगना की ये फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित है। फिल्म में कंगना एक गुजराती लड़की प्रफुल्ल की भूमिका में हैं जोकि तलाकशुदा है और जॉर्जिया स्थित अपने माता पिता के घर पर रहती है। खुद को व्यस्त रखने के लिए वह हिल्टन नाम के एक होटल में हाउस कीपिंग की जॉब करती है और घर लौटने पर हमेशा अपने पिता के ताने सुनती है जो उससे कहते रहते है कि उसे दोबारा शादी करके अपना घर बसा लेना चाहिए। पैसे के लिए प्रफुल्ल चोरी ठकैती करती है।

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हंसल मेहता एक ऐसे निर्देशक हैं जिनकी पुरानी फिल्मों को देखकर लगता है कि वह हर बार कोई ना कोई ऐसा ही विषय उठाते है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है। शाहिद, सिटिलाइट्स और अलीगढ़ जैसी फिल्में देने वाले हंसल मेहता की इस फिल्म को आप जब देखेंगे तो आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर उन्होंने इस फिल्म को क्यों बनाया? संगीत खास नहीं है। टाइटल सॉन्ग, मीत और पिंजरा तोड़ के गाने फिल्म की कहानी के अनुरुप लिखे गए है लेकिन कोई भी गाना आप ज्यादा देर तक याद नहीं रखेंगे।

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जब आप यह फिल्म देखने जाएंगे तो आपके मन में क्वीन और तनु वेड्स मनु वाली वही पुरानी लड़की होगी और थिएटर में घुसने के बाद आपको लगेगा कि प्रफुल्ल यानि कि सिमरन बिल्कुल वैसी ही है बेबाक, किसी की भी परवाह ना करने वाली, झल्ली और अपने मन की करने वाली। धीरे-धीरे आपको लगेगा कि फिल्म की कहानी नई है लेकिन कंगना बिल्कुल वैसी ही है जैसी वह पुरानी फिल्मों में दिखी हैं। साथ ही फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले इतना ढ़ीला है कि आप थिएटर से थोड़ा निराश होकर निकलने वाले हैं।

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