पोस्टर ब्वायज हल्की फुल्की फिल्म लेकिन ज़बरदस्त कॉमेडी , पोस्टर ब्वायज की कहानी एक सच्ची घटना से प्रेरित है जब तीन कुलियों ने सरकारी महकमे की गलती की वजह से खुद को एक नसबंदी के पोस्टर में पाया। कहानी और स्क्रीनप्ले ही इस फिल्म की जान है । ये एक हल्की-फुल्की फिल्म है, जिसके लिए आपको दिमाग की जुगत लगाने की कोई जरुरत नहीं है।

अभिनेता श्रेयस तलपडे की हल्के फुल्के अंदाज में इसी कहानी को रुपहले पर्दे पर कहने की कोशिश गुदगुदाती है। गुदगुदाने और हंसाने के चक्कर में उन्होंने ढेर सारी सिनेमैटिक लिबर्टीज ले तो ली है लेकिन अगर इनको आप दरकिनार कर दें तो ये फिल्म आपका पुरी तरह से मनोरंजन करेगी।

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कहानी है तीन लोगों की जो गलती से नसबंदी के पोस्टर में उसका प्रचार करते हुए दिख जाते हैं। फिल्म में ये तीन किरदार हैं जगावर चौधरी (सनी देओल), विनय शर्मा (बाॅबी देयोल) और अर्जुन सिंह (श्रेयस तलपडे)। सनी, गांव के चौधरी बने हैं तो बाॅबी फिल्म में एक स्कूल के मास्टर हैं, जो बेहद ही शुद्ध हिंदी में बात करते हैं। श्रेयस तलपडे रिकवरी एजेंट के रोल मे हैं जिनका काम है लोगों से वसूली करना।

जब इन तीनों को पता चलता है कि उनके नाम पर लोगों के बीच नसबंदी का प्रचार किया जा रहा है तो उसके बाद ये ठान लेते हैं कि इसके लिए समाज में जो उनको जगहंसाई सहनी पड़ी है उसकी वसूली वो करके रहेंगे। उसके बाद कहानी सरकारी दफ्तर से लेकर स्वास्थ्य मंत्री से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक खिंचती चली जाती है। अंत में इन सभी का पटाक्षेप जनता के सामने होता है जब मुख्यमंत्री को लगता है कि इन तीनों के नंगा आंदोलन की वजह से उनकी कुर्सी को खतरा हो सकता है।

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इस फिल्म में सभी का अभिनय औसत से बेहतर है। एक रिकवरी एजेंट के रोल मे श्रेयस का अभिनय बेहद ही लुभाने वाला है। अश्विनी कालसेकर डॉक्टर की भूमिका में हैं और उनकी तारीफ जितनी भी की जाए कम होगी। भले ही पूरी फिल्म में उनका स्क्रीन अपीयरेंस १५ मिनट का होगा लेकिन जब भी वो पर्दे पर आती हैं मजा आ जाता है। इस फिल्म में कुछ एक सीन्स कमाल के बन पड़े हैं। फिल्म में सनी सेल्फी का शौक रखते हैं तो ये जरूरी नहीं कि उनके इस अंदाज पर लोगों को हंसी आएगी। ये बड़ा ही बोर करता है।

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