Gossipganj
Film & TV News

पद्मावत फिल्म रिव्यू | राजपूताना गौरव का बखान करती फिल्म

0 66

पद्मावत फिल्म रिव्यू | राजपूताना गौरव का बखान करती फिल्म , संजय लीला भंसाली जैसी बड़े स्तर की फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं वो आपको पद्मावत फिल्म देखकर हर क्षण महसूस होगा। फिल्म के भव्य सेट, मंदिर, किला, किले के बाहर पड़ी सेना की छावनी के चलते ये फिल्म आपको दूसरी हिन्दी ऐतिहासिक फिल्मों से एक स्तर ऊपर की महसूस होगी। फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य या संवाद नहीं है जिसके चलते विवाद की गुंजाइश महसूस हो।

पद्मावत फिल्म पूरी तरह से राजपूताना गौरव का बखान करती है और खिलजियों को हिंसक, क्रूर और आक्रमणकारी दिखाती है। सहीं मायनों में फिल्म खिलजी या दिल्ली सल्तनत को कबीलाई, औरतों और सत्ता के लिए लड़ते, सनकी लोगों के झुंड की तरह दिखाती है। दूसरी तरफ राजपूतों को बेहद संयमित, नियम-कायदों से लड़ने वाला दिखाया गया है।

मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत पर आधारित ये फिल्म 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश और मेवाड़ के राजपूत सिसोदिया वंश के बीच लड़ी गई लड़ाई पर आधारित है। फिल्म शुरू होती है अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी को मार कर दिल्ली की शाही गद्दी पर बैठने वाले अलाउद्दीन खिलजी से जो हर बेशकीमती चीज को हासिल करना चाहता है। उसके पास पहुंचकर मेवाड़ से देश निकाला झेल रहा राजपुरोहित चेतन राघव उसे मेवाड़ की महारानी पद्मावती को नायाब बताते हुए हासिल करने के लिए उकसाता है और इसके बाद शुरू होती राजपूत और खिलजियों के बीच एक लंबी जंग। फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य नहीं है जिसमें अलाउद्दीन खिलजी बने रणवीर सिंह और रानी पद्मावती बनी दीपिका पादुकोण एक साथ नजर आए हों। पूरी फिल्म में खिलजी रानी पद्मावती की झलक देखने के लिए उतावला नजर आता है।

फिल्म की तीनों मुख्य एक्टर रावल रतन सिंह के रोल में शाहिद कपूर, रानी पद्मावती के रोल में दीपिका पादुकोण और अलाउद्दीन खिलजी के रोल में रणवीर सिंह अपने किरदार के साथ न्याय करते दिखते हैं। खिलजी के रोल में रणवीर सिंह इतने उम्दा लगे हैं कि ये रोल उनके करियर में एक मील का पत्थर साबित होगा। दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती के रोल प्रभावित करती हैं। मलिक काफूर के रोल जिम सरब के हिस्से में कई अच्छे दृश्य हैं और वो आपको फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रहेंगे।

पद्मावत फिल्म शुरुआत में बेहद धीमी है जिसके चलते दूसरे हाफ में काफी तेजी से कहानी भागती दिखती है। जिन दृश्यों में ठहराव होना चाहिए तो वो बहुत तेजी से निपटाए गए हैं। खास कर गोरा-बादल के रावल रत्न सिंह को दिल्ली से छुड़ाते समय युद्ध के दृश्य। इसके अलावा 16 हजार महिलाओं के जौहर करने वाले दृश्यों को भी थोड़ा और इमोशनल बनाया जा सकता था।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Loading...