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नमस्ते इंग्लैंड फिल्म रिव्यू | थकी और उबाऊ फिल्म जो वक्त खराब करती है

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नमस्ते इंग्लैंड में आपको वो चीज़ नहीं मिलेगी जो नमस्ते लंदन में मिली थी। फिल्म थकाऊ, उबाऊ दोनों है। आज के दौर में जब भारतीय सिनेमा अपने अगले लेवल पर चला गया है वहां ऐसी फिल्मों के लिए अब दर्शकों के लिए न तो टाइम है और न पैसा। इसलिए इन दोनों को एक्टिंग और फिल्मों के चयन में फूंक-फूंककर कदम रखना होगा। वर्ना बॉलीवुड में इनके करियर के लिए उम्मीदें ज्यादा नजर नहीं आती।

नमस्ते इंग्लैंड की कहानी परम यानी अर्जुन कपूर और जसमीत की है। पंजाब के गांव के अमीर घरानों के ये युवा फिल्मी तरीके से एक दूसरे से मिलते हैं। लव स्टोरी परवान चढ़ती है। शादी भी हो जाती है। जसमीत शादी से पहले और शादी के बाद अपना करियर बनाना चाहती है लेकिन उसे परिवार से इसकी इजाजत नहीं मिलती। अपना करियर बनाने के लिए वो झूठी शादी करके लंदन चली जाती है। परम को जब ये बात पता चलती है तो वो अवैध तरीके से लंदन जाकर क्या जसमीत को वापस इंडिया ला पाता है? इसका जवाब आपको फिल्म देखकर मिलेगा।

अर्जुन कपूर और परिणीति चोपड़ा की केमिस्ट्री अच्छी है और यह जोड़ी काफी अच्छी लगती है लेकिन दोनों के किरदार इतने कमजोर लिखे गए हैं कि उनकी मेहनत बेकार हो गई है। खासतौर पर परिणीति ने अपने किरदार पर बहुत मेहनत करने की कोशिश की है लेकिन उनकी कोशिश भी बेकार गई है। अलंकृता सहाय ग्लैमरस लगी हैं और स्क्रीन पर अच्छी लग रही हैं लेकिन उनका किरदार ही बहुत छोटा रखा गया है और उनके पास करने के लिए कुछ नहीं है।

पहले हाफ में हर पांच मिनट में फिल्म में गाने डालकर उसे आगे ले जाने की जो कोशिश हुई है उसका साथ देते-देते आपको नींद आने लगेगी। फिल्म में नाटकीय मोड़ तब आता है जब जसमीत इंग्लैंड रवाना होती है। इसलिए दूसरा हाफ लंदन में दिखाया है। वहां के शूट पर फिल्म में जो खर्चा किया गया है वो इसे थोड़ा ग्रांड बनाता है लेकिन ढीली चाल से चलती स्टोरी की वजह से बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म अपनी लागत निकाल पाएगी, इसकी उम्मीद निर्माताओं को भारी पड़ने वाली है।

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