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मित्रों फिल्म रिव्यू | कुल मिलाकर औसत मनोरंजन करती हुई फिल्म

मित्रों फिल्म रिलीज हो चुकी है लेकिन ये फिल्म वैसी नहीं है जैसी लोगों ने नाम के अनुरूप अपेक्षा की थी। ये बात अलग है कि जैकी भगनानी ने इस फिल्म में अपनी पिछली फिल्मों से बेहतर प्रदर्शन किया है और अपने किरदार को संवेदनशीलता के साथ निभाने में कामयाब रहे हैं। कृतिका कामरा टीवी पर कई शोज़ पर काम कर चुकी हैं लेकिन उनको बड़े पर्दे पर देखकर लगता नहीं है कि ये उनकी पहली फिल्म है। जय के दोस्त के तौर पर प्रतीक गांधी का काम ठीक ठाक कहा जा सकता है। एक्टर शारिब हाशमी ने इस फिल्म की स्टोरी लिखी है जो एक तेलुगू फिल्म से प्रेरित है। फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत बेहतर नहीं कहा जा सकता है। फिल्म के दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी सी लंबी खिंचती हुई नज़र आती है पर फिल्म का क्लाइमैक्स शानदार है।

फिल्म का म्यूज़िक फिल्म की रफ्तार में बाधा नहीं बनता। फिल्म का गाना कमरिया पहले ही काफी लोकप्रिय हो चुका है वहीं फिल्म में सोनू निगम का गाया गाना भी सुनने लायक है। कॉमेडी फिल्मों को पसंद करने वाले लोग इस फिल्म को देख सकते हैं। फिल्म स्त्री की तरह ही मित्रों को भी माउथ पब्लिसिटी का फायदा मिल सकता है। साफ सुथरी और बेहतरीन कॉमेडी फिल्म होने के चलते इस फिल्म को पूरी फैमिली के साथ इंजॉय किया जा सकता है।

फिल्म में जैकी भगनानी और कृतिका कामरा लीड भूमिका में है। जैकी भगनानी (जय) डिग्री से भले ऑटोमोबाइल इंजीनियर हो लेकिन वो पेशे से बेरोज़गार ही है। नौकरी में भी उसकी खास दिलचस्पी नहीं है इसलिए वो एक अमीर लड़की को शादी के लिए देखने जा पहुंचता है ताकि दहेज के पैसे से ज़िंदगी थोड़ी आराम से कट सके। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बातों बातों में पता चलता है कि जय का परिवार रिश्ते के लिए गलत एड्रेस पर आ पहुंचे हैं। वही फिल्म की लीड एक्ट्रेस कृतिका कामरा यानि अवनी एमबीए है, महत्वाकांक्षी है, बिज़नेस करना चाहती है लेकिन अवनी के पिता जल्द उसकी शादी कराना चाहते हैं और इसलिए इमोश्नल ब्लैकमेल करते हुए उसे शादी के लिए लड़कों से मिलवा रहे हैं। जय और अवनी की मुलाकात के बाद दोनों की ज़िंदगी में कुछ नाटकीय बदलाव आते हैं और फिल्म क्लाइमैक्स तक दर्शकों को बांधने में कामयाब रहती है।