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लवयात्री फिल्म रिव्यू | एक थकी हुई कहानी दर्शकों को भी थका देगी

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लवयात्री केवल एक साधारण सी लव स्टोरी है। अपनी पहली फिल्म कर रहे आयुष और वरीना अभी ऐक्टिंग में कच्चे हैं। हालांकि स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री अच्छी लगती है। फिल्म में ज्यादा कुछ भी नहीं है। डायरेक्टर अभिराज मीनावाला की यह पहली फिल्म है और उन्होंने बॉलीवुड के पुराने मसालों पर सेफ गेम खेलने की कोशिश की है। हालांकि फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ज्यादा अच्छा नहीं लिखा गया है। फिल्म के कैरक्टर्स आपको पसंद आएंगे लेकिन कहानी आपको इतनी आकर्षक नहीं लगेगी। फिल्म के गाने खूबसूरती से फिल्माए गए है और वैभवी मर्चेंट की कोरियोग्रफी भी अच्छी है।

आयुष बिल्कुल युवा लड़के के रूप में ठीक लगते हैं। सुसु के अंकल के रूप में राम कपूर ने और मिशेल के पिता के रूप में रोनित रॉय ने बेहतरीन काम किया है और उन्होंने इमोशनल और भारी-भरकम डायलॉग बोले हैं। लवयात्री उन लोगों के लिए अच्छी फिल्म है जो 90 के दशक की रोमांटिक फिल्मों के शौकीन हैं। सुश्रुतवडोदरा में बच्चों को गरबा सिखाते हैं। इस बार का 9 दिन का नवरात्रि का त्योहार उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल देता है। उन्हें मिशेल यानी वरीना हुसैन से प्यार हो जाता है और उनका प्यार जीतने के लिए वह हर काम करते हैं।

सुश्रुत उर्फ ‘सुसु’ को एक ऐसा लड़का दिखाया गया है जिसकी कोई ख्वाहिशें नहीं हैं और वह केवल अपनी जिंदगी में डान्स करना चाहता है। उसके परिवार की तरफ से उस पर नौकरी ढूंढने का दबाव है जबकि वह वडोदरा में अपनी एक गरबा अकैडमी खोलना चाहता है। वहीं इंग्लैंड की मिशेल अपनी मातृभूमि भारत लौटना चाहती है और इस बात के लिए उसके पिता रोनित रॉय तैयार हो जाते हैं। अपनी फैमिली के कहने पर वह वडोदरा में नवरात्रि मनाने के लिए रुक जाते हैं। इसी त्योहार के दौरान सुसु को मिशेल से प्यार हो जाता है। एक थकी हुई कहानी है जिसे किसी तरह बनाकर निपटा दिया गया है।

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