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लव सोनिया फिल्म रिव्यू | देह व्यापार की हकीकत को बयां करती फिल्म

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लव सोनिया देह व्यापार की कहानी कहती ये फिल्म कोई नहीं है है। हिंदी सिनेमा में गरीब और मजबूर लड़कियों के वेश्यावृत्ति के दलदल में फसने और निकलने की छटपटाहट पर आधारित ढेरो फिल्में बन चुकी हैं। ‘मंडी’, ‘बाजार’, ‘मौसम’ जैसी समांतर फिल्में तो बनी ही साथ ही यह मुद्दा ‘सड़क’, ‘लागा चुनरी में दाग’, ‘बेगम जा’ जैसी कमर्शियल फिल्मों में भी बखूबी दर्शाया गया है। और तो और आपको दलाल फिल्म भी याद होगी।

देह व्यापार आदि काल से चला आ रहा है और जब तक इंसान है तब तक चलता रहेगा। इसका बदसूरत चेहरा और भी बदसूरत हो जाता है जब मासूम नाबालिग और मजबूर लड़कियों को इस में धकेला जाता है। इसी पर आधारित फिल्म है लव सोनिया । लव सोनिया को निर्देशक तबरेज नूरानी ने कुछ इस तरह से ट्रीट किया है कि यह फिल्म एकदम अलग है। अगर आप वास्तविक मुद्दों पर आधारित फिल्में देखने के शौकीन हैं तो लव सोनिया आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है।

फिल्म में अभिनय की बात करें तो मृणाल ठाकुर ने बहुत ही जबरदस्त परफॉर्मेंस दिया है। साथ ही मनोज बाजपेयी छाए रहे। इसके अलावा आदिल हुसैन, फ्रीडा पिंटो, ऋचा चड्ढा प्रभावित करते हैं। अनुपम खेर को फिल्म में क्यों लिया गया यह समझ से परे है। एक लंबे समय बाद डेमी मूर को पर्दे पर देखना सुखद अनुभव रहा। कुल मिलाकर लव सोनिया ऐसी फिल्म है जो आपको समाज में पनप रहे अपराध और दूसरी दुनिया के उन अंधेरे कोने में झांकने में मदद करती है जो शायद आपकी अंतरात्मा कपकपा दे।

रही बात कहानी की तो छोटे से गांव में रहने वाले किसान शिवा (आदिल हुसैन) बारिश के अभाव में गरीबी से लड़ रहा है। उसके ऊपर गांव के दबंग दादा ठाकुर (अनुपम खेर) का कर्जा चढ़ा हुआ है। ऐसे में शिवा अपनी बड़ी बेटी प्रीति (रिया सिसोदिया) को दादा ठाकुर को सौंप देता है। दादा ठाकुर का कनेक्शन देह व्यापार के नेटवर्क से है। प्रीति को मुंबई भेज दिया जाता है और उसकी तलाश में सोनिया जो उसकी छोटी बहन है निकल पड़ती है। किस तरह से देह व्यापार के दलदल में फंसने के बावजूद भी हिम्मत के साथ सोनिया ना सिर्फ खुद उस दलदल से बाहर निकलती है साथ ही प्रीति को भी ढूंढ निकालती है और अपना जीवन इसी लक्ष्य को समर्पित कर देती है यह फिल्म में दर्शाया गया है। अपनी पहली फिल्म के लिए इस संजीदा विषय को निर्देशक तबरेज नूरानी ने ना सिर्फ चुना बल्कि एक इमानदार तरीके से पूरी संवेदनशीलता के साथ इस विषय को बखूबी पेश भी किया। जिस तरह से मुंबई से लेकर अमेरिका तक देह व्यापार के इस पनपते हुए घिनौने नेटवर्क को तबरेज ने दर्शाया है उसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कांप जाए।

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