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हिचकी | रानी मुखर्जी का शानदार कमबैक | दमदार है फिल्म

मर्दानी के चार साल बाद आई हिचकी

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हिचकी | रानी मुखर्जी का शानदार कमबैक | दमदार है फिल्म, साल 2014 में आखिरी बार बड़े पर्दे पर दिखाई दीं रानी मुखर्जी, फिल्म ‘हिचकी’ से 4 साल बाद लोगों के बीच वापस आयी हैं। फिल्म की ज्यादातर कहानी नैना माथुर के किरदार के आसपास ही घूमती है। रानी मुखर्जी के सामने यह बहुत बड़ा चैलेंज था कि वो अपने किरदार को इस तरह से निभायें कि लोग इस बात पर शक न कर पायें कि उन्हें टॉरेट सिंड्रोम नहीं है। जिसमें वो कामयाब रहती है। पहले ही सीन से रानी मुखर्जी नैना बन जाती हैं और दर्शक भी नैना की परेशानी के साथी बन जाते हैं। एक तरह से रानी ने अपनी जबरदस्त अदाकारी से फिल्म में जान भर दी है। रानी मुखर्जी के अलावा फिल्म में सचिन पिलगांवकर, सुप्रिया पिलगांवकर, शिवकुमार सुब्रमण्यम और नीरज कबी जैसे कलाकारों ने मुख्य किरदार निभाये हैं। यह सभी कलाकार अपने-अपने किरदारों में खूब जमते भी हैं। खास करके नीरज कबी ने अपने किरदार को बहुत खूबसूरती से निभाया है।

फिल्म की कहानी नैना माथुर (रानी मुखर्जी) नाम की एक लड़की की है, जिसे टॉरेट सिन्ड्रोम है। टॉरेट सिन्ड्रोम से परेशान इंसान के दिमाग के कुछ तार ठीक से नहीं जुड़े होते हैं, जिसकी वजह से उसको लगातार हिचकियां आती रहती हैं। नैना को टॉरेट सिंड्रोम की वजह से आम जिंदगी में कई तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। यहां तक कि खुद उसके पिता उसकी वजह से कई बार शर्मिंदा महसूस करते हैं। हालांकि नैना इन सारी परेशानियों को नजरअंदाज करते हुए बचपन से ही स्कूल टीचर बनने का सपना देखती आयी है। एक दिन उसका यह सपना साकार भी हो जाता है और उसे एक स्कूल से कॉल आ जाता है। स्कूल पहुंचकर उसे ऐसे 14 बच्चों की क्लास दी जाती है, जिनका पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। इन 14 बच्चों को पढ़ाने आये अब तक कई सारे टीचर उनकी क्लास को छोड़कर भाग चुके हैं। तो क्या नैना इन बच्चों की मैडम जी बन पायेगी ? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

फिल्म ‘हिचकी’ का निर्देशन सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने किया है, जिनसे इसके स्क्रीनप्ले में चूक हो गई है। फिल्म की शुरूआत बेहतरीन है, बहुत ही कम सीन्स में सिद्धार्थ सारी चीजें स्टेब्लिश करने में कामयाब रहते हैं। एक बार भी दर्शकों को ऐसा नहीं लगता है कि फिल्म भाग रही है लेकिन कुछ समय के बाद इसकी बहुत धीमी पड़ जाती है। इंटरवल के बाद जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, इस पर निर्देशक की कमांड दोबारा देखने को मिलती है। फिल्म ‘हिचकी’ का अंत उम्दा है, जो दर्शकों की आंखों को नम कर देता है। फिल्म ‘हिचकी’ के गाने खूबसूरत हैं लेकिन दर्शकों को कानों के क्लब सॉन्ग और फास्ट पेस म्यूजिक की ऐसी लत लग चुकी है कि थिएटर से निकलते समय वो ‘हिचकी’ का कोई भी गाना ध्यान नहीं रख पाते हैं। फिल्म ‘हिचकी’ को देखने की सबसे खास वजह रानी मुखर्जी हैं। उन्होंने जिस तरह से नैना माथुर का किरदार निभाया है, वो काबिल-ए-तारीफ है। इसके साथ-साथ फिल्म की बाकी स्टारकास्ट भी कमाल की है।

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