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अय्यारी मूवी रिव्यू | सेना के भीतर पनपते भ्रष्टाचार की कहानी

अय्यारी मूवी रिव्यू | सेना के भीतर पनपते भ्रष्टाचार की कहानी, बॉलीवुड में आपने छल कपट और गद्दारी पर कई फिल्मे देखी होगी लेकिन फिल्मकार नीरज पांडे ने इस बार सेना से जुड़ी एक घटना को लेकर फिल्म बनाई है। हम बात कर रहे हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा और मनोज बाजपेयी की फिल्म अय्यारी की। यह फिल्म रिलीज हो चुकी है।‘बेबी’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी फिल्में बना कर नीरज पांडे ने सिनेमा को अलग मिजाज की कहानियां दी, लेकिन यहां देशभक्ति के ओवरडोज वाले दौर में वो तालमेल बिठाने में नाकामयाब रहे। कमजोर स्क्रिप्ट ने शायद उनके हाथ-पांव बांध दिए। अय्यारी फ़िल्म में नीरज कहना क्या चाह रहे हैं, ये बहुत दिमाग खर्च करने के बाद भी साफ नहीं हो पाता।

अय्यारी सेना के भीतर पनपते भ्रष्टाचार की कमजोर कहानी बयां करती है। स्क्रिप्ट ऐसी लिखी गई है कि दर्शक तय नहीं कर पाता कि मेकर्स का असली मकसद क्या है। दर्शक के लिए ये समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर सेना के भ्रष्टाचार का मसला है या फिर ‘क्रेडिबिलिटी’ पर आंच आने का। कलाकारों के अभिनय में भी ये अस्पष्टता नजर आती है। कुल मिलाकर फिल्म की स्क्रिप्ट पर गंभीरता से ठोस काम करने की तब और भी जरूरत हो जाती है, जब आप सेना के भीतर पनपे करप्शन को ही आधार बना रहे हों।

फिल्म में किरदारों के अभिनय की बात करें तो सिद्धार्थ फीके ही नजर आए। लेकिन मनोज वाजपेयी ने जरूर सभी की छुट्टी कर दी। पर्दे पर जब भी मनोज और सिद्धार्थ साथ दिखे, सिद्धार्थ की एक्टिंग फीकी पड़ गई। हालांकि युवाओं को सिद्धार्थ का शातिरपने से भरा स्टाइल जरूर पसंद आ सकता है। रकुल प्रीत का फिल्म में ज्यादा बढ़ा रोल नही है लेकिन जितना भी मिला है उसमें वो कमाल नहीं दिखा सकी। नसीरुद्दीन शाह की जबरदस्त एक्टिंग ने कमाल कर दिया जबकि अनुपम खेर को जबरन फिल्म में जगह दी गई।

मनोज बाजपेयी और सिद्धार्थ मल्होत्रा स्टारर ‘अय्यारी’  सेना के दो ऐसे अधिकारियों (गुरू-शिष्य) की कहानी है, जिनकी अपनी-अपनी अलग विचारधारा है। दोनों के बीच उभरा वैचारिक मतभेद फिल्म को आगे बढ़ाता है, लेकिन इसमें ‘वेडनसडे’ वाला चार्म नजर नहीं आता। फिल्म की कहानी जय बक्शी (सिद्धार्थ मल्होत्रा) के इर्द-गिर्द घूमती है। अति महत्वाकांक्षी जय आर्मी में चल रहे भ्रष्टाचार से नाखुश तो है लेकिन धीरे-धीरे इसी सिस्टम का हिस्सा बन जाता है। जय सेना के कामकाज से नाखुश होकर डिपार्टमेंट के सीक्रेट बेच कर पैसे कमाने के रास्ते पर निकल जाता है। इसी बीच सिद्धार्थ के सीनियर का रोल अदा कर रहे मनोज बाजपेई की सीन में एंट्री होती है। सेना के सीक्रेट लीक ना हो और देश को किसी प्रकार का नुकसान न हो इसके लिए मनोज बाजपेई,  सिद्धार्थ को किसी भी हालत में पकड़ना चाहते हैं। इधर जय अमीर बनने की ख्वाहिश लिए एक रोज सोनिया (रकुल प्रीत सिंह) से टकराता है और उसे किसी तरह अपने प्लान का हिस्सा बना लेता है। इसके बाद की कहानी का जिक्र करने का कोई औचित्य नजर नहीं आता। इसके अलावा यह फिल्म मुंबई के आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले का भी जिक्र करती है।