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पत्रलेखा ने माना, लव गेम्स फिल्म करना मेरी सबसे बड़ी भूल थी

नानू की जानू में अब आएंगी नज़र

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पत्रलेखा ने माना, लव गेम्स फिल्म करना मेरी सबसे बड़ी भूल थी, अपनी पिछली दोनों फिल्मों ‘सिटीलाइट्स’ और ‘लव गेम्स’ में बिल्कुल अलग-अलग अंदाज में नजर आईं अभिनेत्री पत्रलेखा शिलॉन्ग में पली-बढ़ी हैं और उनके सीए पापा चाहते थे कि वह भी सीए बनें। ऐसे में हिंदी फिल्मों की हीरोइन बनने का चस्का कैसे लगा? यह पूछने पर वह बताती हैं, ‘यह सच है कि मेरे पापा चाहते थे कि मैं भी उनकी तरह सीए बनूं, लेकिन फिल्मों का चस्का मुझे बचपन से था। हमारे घर में फिल्मी माहौल हमेशा से रहा है। हम लोग बंगाली हैं। फिल्में देखना मेरी मां और डैड दोनों का पसंदीदा शौक है। इसीलिए, मैं भी बचपन से फिल्में देखती आ रही हूं। तब, कहीं न कहीं लगता था कि मुझे भी ऐक्टिंग करनी है।

ऐक्टिंग में अपने सफर की शुरआत के बारे में यादें ताजा करते हुए वह बताती हैं, ‘मेरा एक क्लासमेट पार्ट-टाइम कास्टिंग डायरेक्टर था। ऐसे ही एक बार बातचीत के दौरान मैंने उससे कहा कि मुझे भी ऐक्टिंग करनी है। तब उसके कहा कि ठीक है। तुम अपनी फोटोज खिंचवा लो। उसने कुछ को-ऑर्डिनेटर्स के नंबर दिए। इसी बीच वह मेरे लिए एक ऐड फिल्म लेकर आया, जिसके लिए मुझे 5 हजार रुपये मिले थे। उस समय यह मेरे लिए बड़ी बात थी। इसके बाद और ऑडिशंस के लिए कॉल आते गए। फिर मुझे फिल्मों के कॉल आना शुरू हो गए, लेकिन फिल्म का ऑडिशन और ऐड का ऑडिशन बहुत अलग होता है। फिल्म की ऐक्टिंग अलग होती है, इसलिए मैंने पहले कुछ ऐक्टिंग कोर्स किए। बैरी जॉन के ऐक्टिंग स्कूल में गई। फिर दो-तीन और वर्कशॉप्स में गई। उसके बाद फिल्मों में आई।’

अपनी पिछली फिल्म ‘लव गेम्स’ में पत्रलेखा ने बहुत ही बोल्ड किरदार निभाया था। इस फिल्म को दर्शकों ने बिल्कुल पसंद नहीं किया। खुद पत्रलेखा मानती हैं कि उन्हें वह फिल्म नहीं करनी चाहिए था। उनके मुताबिक, ‘वह एक गलत फैसला था। मेरे लिए वह फिल्म सही नहीं थी। उसे करते वक्त मैं सहज भी नहीं थी। मैं मानती हूं कि ‘लव गेम्स’ करना मेरी गलती थी। इसके लिए मैं किसी और को दोष नहीं देती हूं। मुझे उस स्क्रिप्ट को हां ही नहीं बोलना चाहिए था, लेकिन अब जो है, सो है। वह फिल्म मैं कर चुकी हूं। वह मेरी सचाई है। अब उससे आगे बढ़ते हैं।’ फिल्म ‘सिटीलाइट्स’ में दमदार अभिनय के बावजूद पत्रलेखा ज्यादा फिल्मों में नजर नहीं आईं। वजह पूछने पर वह कहती हैं, ‘मेरे पास अच्छी स्क्रिप्ट्स नहीं आईं और कुछ भी करने का मेरा मन नहीं था।’ लेकिन ‘सिटीलाइट्स’ में बेहतरीन अभिनय के बावजूद मनमाफिक रोल न मिलने की वजह क्या हो सकती है? इस पर वह कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि ज्यादा लोगों ने वह फिल्म देखी ही नहीं। मुझे और कोई वजह तो समझ नहीं आती।’

वहीं, अपनी आने वाली फिल्म ‘नानू की जानू’ के लिए हां कहने की वजह पूछने पर वह बताती हैं, ‘यह बहुत ही प्यारी और मजेदार सी कहानी है। मैंने ऐसी कॉमिडी वाली फिल्म नहीं की है। मैंने हमेशा ड्रामा किया है, तो मुझे स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लगी है। मेरे डायरेक्टर फराज बड़े प्यारे हैं। इसके अलावा, मुझे अभय के साथ काम करने का मौका मिल रहा था। मुझे अभय का काम बहुत पसंद है। उन्होंने बहुत ही रियलिस्टिक किरदार निभाए हैं। मैंने जब ‘देव डी’ देखी थी, तभी सोचा था कि इस ऐक्टर के साथ तो एक बार काम करना है। इसीलिए, यह सब सोचकर मैंने इस फिल्म के लिए हां कह दिया।’ फिल्म के ट्रेलर में पत्रलेखा की इक्की-दुक्की झलक ही नजर आती है, ऐसे में फिल्म में अपने किरदार की लंबाई के सवाल पर वह कहती हैं, ‘हां, मैं ट्रेलर में नहीं दिखी हूं। मैंने जब ट्रेलर देखा, तो खुद हैरान रह गई। फिर डायरेक्टर ने मुझे समझाया कि जो मेरा रोल है, वह फिल्म के प्लॉट पॉइंट्स पर आता है। अगर उसे ट्रेलर में दिखा देंगे, तो फिल्म की कहानी पता चल जाती और वह नहीं चाहते थे कि कहानी पहले ही पता चले।’

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