Gossipganj
Film & TV News

राजेंद्र प्रसाद | मेरी फिल्म अकबर की असलियत पर आधारित है

तीन दुर्भावनापूर्ण पराजय मिली थी अकबर को

0 29

राजेंद्र प्रसाद | मेरी फिल्म अकबर की असलियत पर आधारित है, अनुभवी एफटीआईआई स्नातक राजेंद्र प्रसाद, मुगल काल के मध्ययुगीन भारतीय इतिहास के लोकप्रिय और रोमांटिक कथाओ का सही रूपांतरण एक बड़ी फिल्म के जरिये सही करने वाले हैं। सूत्रो के अनुसार फिल्म की रिसर्च (अनुसंधान) और पटकथालेखन का काम तेजी से शुरू हो चूका हैं, फिल्म मुख्य रूप से अकबर पर केंद्रित है, जो उनकी असली मगर अज्ञात और अनजान पक्ष को आगे लेकर आएगी। सूत्र ये भी बताते हैं की कहानी का एक बड़ा हिस्सा युद्ध के मैदान में अकबर की “अपमानित हार और शर्मनाक तरीके से भागने” पर केद्रित हैं। विशेष रूप से तीन दुर्भावनापूर्ण पराजय जो अकबर को रानी दुर्गावती के सामने झेलनी पड़ी थी।

भारतीय स्कूल ग्रंथों में अकबर को एक सहिष्णु और उदार “महान मुगल” के रूप में दिखाया गया हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही हैं, और अकबर का दूसरा और असली पहलु अब सामने आने की तैयारी में हैं। यह फिल्म भारत में सच्चे मुग़ल इतिहास की असलियत की कठोरता से परदाफाश करेगी। खासकर बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब से लेकर बहादुर शाह जफर तक, और अल्लाउदीन खिलजी और मलिक कुफुर के प्रेम प्रसंगों से लेकर विभिन्न यौन विकृतियों और भ्रष्टताओं का भी पर्दाफाश करेगी।

यह माना जाता है कि फिल्म की कहानी, भारत के महान इतिहासकार जैसे, सीता राम गोयल, वीर सावरकर, विन्सेन्ट स्मिथ, पी एन ओक, कोएनराड एल्स्ट, फ्रेंकोइस गौटीयर और अन्य के कार्यो से प्रेरित होगी। यह भी कहा गया हैं की कहानी भारत में मुगल असभ्यता और इस्लामी जंगलीपन के बारे में व्यापक रूप से विस्तृत ऐतिहासिक और शोधित तथ्यों को भी उजागर करेगी। अगर यह सच है, तो ऐसा पहली बार होगा कि किसी भारतीय फिल्म निर्माता ने हिंदुओं के धार्मिक उत्पीड़न, नरसंहार, मंदिरों के विध्वंस और अपवित्रता, विश्वविद्यालयों और स्कूलों के विनाश दिखाने की हिम्मत की है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे फ़िल्मकार प्रसाद, अकबर के जीवन पर एक ऐसी फिल्म में इतनी बड़ी और विविध समयरेखा एकीकृत करेंगे। फिल्मकार प्रसाद पहले भी एक 2005 की विवादास्पद फिल्म “रेसिडिउ –वेयर द ट्रुथ लाइज”  के निर्माता और निर्देशक रह चुके हैं, जिसमे गांधी की दुर्बलता और गोडसे की गांधी हत्या की नैतिकता को उजागर किया गया था।

सीबीएफसी ने इस फिल्म को बार-बार प्रतिबंधित किया हैं, और वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट में इस पर फैसले का इंतजार है। इनका वर्तमान प्रोजेक्ट भी अदालत की ओर बढ़ सकता हैं, क्योंकि इसका विषय बेहद संवेदनशील और विवादास्पद प्रकृति का हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सीबीएफसी या अदालत, इस बहु-प्रतिभाशाली फिल्म निर्माता को अपने मूलभूत अधिकार जैसे विचारो की अभिव्यक्ति से फिर से वंचित ना रखे।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Loading...