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करणी सेना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल!

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करणी सेना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल! विवादों के बीच संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ से पर्दा उठ गया है। सिनेमाघरों में कड़े पहरे के बीच फिल्म हो रिलीज किया गया है। विरोध के बावजूद लोगों में डर देखने को नहीं मिल रहा है, कई जगह फिल्म का शो हाउसफुल भी है। हालांकि, भाजपा शासित 4 राज्यों में इसे नहीं दिखाया जा रहा है। इन राज्यों के एक भी मल्टीप्लेक्स में फिल्म का शो नहीं हुआ। फिल्म भले ही रिलीज हो गई हो, लेकिन फिल्म पर नेताओं की सियासत और करणी सेना का उपद्रव जारी है। पद्मावत मामले मे सुप्रीम कोर्ट मे करणी सेना और राज्यों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल हुई है। इस मामले में कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई है। जिसके बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद करणी सेना का विरोध प्रदर्शन जारी है। कई जगह हिंसक झड़पें हुई हैं। बसों को आग के हवाले कर दिया गया है। सिनेमाघरों में आगजनी की खबरें भी सामने आईं हैं। राज्य सरकार इन सब को रोकने के नाकामयाब साबित हुई है।

फिल्म की रिलीज को लेकर देशभर में हिंसा थमने का नहीं ले रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राज्यों को फिल्म प्रदर्शित करने का आदेश देने के बावजूद राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा के थिएटर मालिकों ने इसे दिखाने से मना कर दिया है। इसके लिए उन्होंने हिंसा के माहौल को कारण बताया है। ‘पद्मावत’ की निर्माण कंपनी वायकाम-18 ने इस खबर पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने से मना किया, लेकिन एक अधिकारी ने कहा कि कंपनी इस फैसले की कानूनी वैधता की जांच करेगी और फिर अगला कदम उठाएगी। इस बीच राजपूत करणी सेना ने किसी भी कीमत पर फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देने और सिनेमाघरों में ‘जनता कर्फ्यू’ लगाने का फिर एलान किया है।

पद्मावत रिलीज पर नेताओं की सियासत भी जारी है। कोई भी पार्टी अपने वोट बैंक के साथ समझौता करना नहीं चाहती। हालांकि भाजपा शासित राज्यों में फिल्म न दिखाए जाने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा को निशाने पर लिया है। पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुग्राम में बच्चों की बस पर हुए हमले के बहाने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा, ‘भाजपा गंदी राजनीति कर रही है और राष्ट्र को हिंसा की आग के हवाले कर दिया है। बच्चों के खिलाफ हिंसा का कोई भी कारण बड़ा नहीं हो सकता है। हिंसा और नफरत कमजोरी के हथियार हैं।’ इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोई भी फिल्म भावनाओं को आहर करने वाली नहीं बननी चाहिए। उधर भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा है कि पद्मावत पर राहुल गांधी स्टैंड क्यों नहीं ले रहे। वहीं, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि राम ने जो सजा रावण को दी, वही इन गुंडों को मिलनी चाहिए। ऐसे में पद्मावत ने अब सियासी चोला भी पहन लिया है, जिस कारण बैंक वोट के आगे सभी पार्टियां परास्त होती दिख रही हैं।

फिल्म के विरोध को लेकर करणी सेना में मतभेद भी सामने आने लगे हैं। मंगलवार की रात अहमदाबाद में हुई हिंसा के बाद गुजरात सरकार ने भी अलग-अलग राजपूत ग्रुपों के साथ बैठक की। इसमें करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राज शेखावत ने गुरुवार के भारत बंद को समर्थन नहीं देने की घोषणा की। उत्तर प्रदेश में अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था की ओर से एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी हुई है। इसमें कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सिनेमाघरों, मॉल और मल्टीप्लेक्स के मैनेजरों या सुरक्षा में लगे कर्मचारियों से मीटिंग करने को कहा गया है। कोई घटना न हो, इसके लिए लगातार पेट्रोलिंग के निर्देश भी दिए गए हैं।

राजपूत संगठन करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी ने हिंसा के लिए ‘पद्मावत’ के निर्माता संजय लीला भंसाली को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने हिंसा के लिए खेद जताते हुए कहा कि यह सब रानी पद्मावती के लिए है, जिन्होंने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए 16 हजार रानियों के साथ जौहर किया था। उन्होंने फिर कहा कि जिन सिनेमाघरों में भी फिल्म का प्रदर्शन होगा, वहां ‘जनता कर्फ्यू’ लगेगा, ताकि इसका प्रदर्शन न हो। हमें भले गिरफ्तार कर लें और गोलियां चलाएं, लेकिन इससे हम रुकेंगे नहीं।

कालवी ने कहा कि सेंसर बोर्ड के न्योते पर जिन लोगों ने यह फिल्म देखी है, उन्होंने बताया कि ‘पद्मावत’ में अलाउद्दीन खिलजी व रानी पद्मावती के स्वप्न दृश्य हैं। हम चाहते हैं कि फिल्म में दोनों के ऐसे दृश्य और रोमांटिक सीन नहीं हों। हालांकि मीडिया स्क्रीनिंग में फिल्म देखने के बाद कई समाचार पत्रों और पत्रकारों ने अपनी समीक्षा में ऐसे किसी भी दृश्य का जिक्र नहीं किया है।’पद्मावत’ के रिलीज होने से एक दिन पहले बुधवार को राजस्थान में माहौल गरमा गया। चित्तौड़गढ़ किले को बंद कर दिया गया। वहां जौहर के लिए पहुंचीं कुछ महिलाओं को मुख्य द्वार पर ही पुलिस ने रोक लिया। जौहर क्षत्राणी मंच ने 1600 महिलाओं के साथ जौहर की चेतावनी दी थी। इस बीच राजपूत समाज ने जयपुर, दौसा, करौली, उदयपुर, सीकर, सवाई माधोपुर सहित कई शहरों में प्रदर्शन किए। कई शहर और कस्बे बंद भी रहे।

हरियाणा में राज्य में फिल्म को लेकर अघोषित बैन जैसे हालात हैं। करणी सेना की धमकी के कारण 80 फीसद थियेटर मालिकों ने पद्मावत को नहीं दिखाने का फैसला किया है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने हिसार, कुरुक्षेत्र, सिरसा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल सहित कई शहरों में धारा 144 लगाई है।फिल्म के खिलाफ सबसे ज्यादा गुस्सा गुरुग्राम और फरीदाबाद में दिखा। विरोध करने वालों ने स्कूल बस को भी नहीं छोड़ा। दिल्ली-अलवर हाइवे पर भोड़सी गांव के पास एक स्कूल बस पर पथराव किया। पथराव से चार बच्चे घायल हो गए। इसी रोड पर प्रदर्शनकारियों ने एक बस को आग भी लगा दी। दूसरी ओर पारकर मॉल, एमजी मॉल के मैक्स सिनेमा की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मंगलवार रात अहमदाबाद में तीन मॉलों के बाहर हुई हिंसा व तोड़फोड़ में पुलिस ने 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। मॉल के बाहर अचानक भड़की हिंसा में पार्किंग में खड़ी 30 मोटरसाइकिलों व कई अन्य वाहनों को जला दिया गया था। मुंबई में भी करणी सेना के 100 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।

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