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द ब्रदरहुड | दादरी कांड पर बनी ये डॉक्यूमेंट्री फंस गई सेंसर बोर्ड में, 3 सीन पर कैंची

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द ब्रदरहुड | दादरी कांड पर बनी ये डॉक्यूमेंट्री फंस गई सेंसर बोर्ड में, 3 सीन पर कैंची , ‘न्यूड’ और ‘एस. दुर्गा’ जैसी फिल्मों के बाद अब डॉक्युमेंट्री फिल्म द ब्रदरहुड भी सेंसर बोर्ड में फंस गई है। बिसाहड़ा कांड की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म साम्प्रदायिक सद्भाव की बात करती है, लेकिन सेंसर बोर्ड इस फिल्म के तीन दृश्यों पर कैंची चलाने का निर्देश दे चुका है।

पराशर ने फिल्म की पृष्ठभूमि और विषय वस्तु के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह बिसाहड़ा गांव में अखलाक हत्याकांड (दादरी लिंचिंग केस) के बाद पैदा हुए हालात से शुरू होती है और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के दो गांवों घोड़ी बछेड़ा और तिल बेगमपुर के ऐतिहासिक रिश्तों को पेश करती है। पराशर कहते हैं कि सेंसर बोर्ड कुल मिलाकर उन सारी बातों को हटवाना चाहता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल हैं। सेंसर को एक इंटरव्यू में भारतीय जनता पार्टी के जिक्र पर भी आपत्ति है।

पंकज पराशर का कहना है कि बीजेपी का जिक्र हटाने से उन्हें कोई समस्या नहीं है। इससे डॉक्युमेंट्री की मूल भावना प्रभावित नहीं होती है। इस फिल्म के निर्माण की मूल प्रेरणा के बारे में सवाल किए जाने पर उन्होंने बताया कि यह दादरी में कथित रूप से गोमांस रखने को लेकर मोहम्मद अखलाक की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि ‘द ब्रदरहुड’ का निर्माण ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब के सहयोग से पंकज पराशर ने किया है।

इस बारे में फिल्म निर्माता और पत्रकार पंकज पराशर का कहना है कि यही तीन दृश्य तो फिल्म की जान हैं। यह डॉक्युमेंट्री फिल्म बताती है कि अखलाक हत्याकांड जैसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसे से यहां के सामाजिक ताने-बाने पर कोई असर नहीं पड़ा है और इस घटना को स्थानीय लोग केवल राजनीति करार देते हैं। पंकज पराशर के अनुसार, इसके तीन दृश्यों को काटने के सेंसर बोर्ड के निर्देश को वे सेंसर ट्रिब्यूनल में चुनौती दे चुके हैं।

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