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भाग्यश्री और अलंकृता सहाय ने महिला स्वास्थ्य के लिए उठाया कदम

एक मंच पर आईं दोनों सेलिब्रिटी

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भाग्यश्री और अलंकृता सहाय ने महिला स्वास्थ्य के लिए उठाया कदम, 51 प्रतिशत भारतीय महिलाये एनीमिक (खून की कमी) हैं। भारतीय महिलाओं में प्रसवोत्तर अवसाद (डिप्रेशन) काफी आम है फिर भी नई माँओ के लिए जागरूकता और समर्थन की मांग नहीं की जाती। कंडोम और कॉण्ट्रासेपटिव के उपभोग में बढ़ोतरी तो हैं लेकिन एसटीडी से होने वाली बीमारियों  में उससे ज्यादा बढ़ोतरी आई हैं। पांच में से एक महिला, पीसीओएस से ग्रसित हैं, और हम जितना इन आँकड़ों का अध्ययन  करते हैं, हमें उतना  अहसास होता हैं की हालात काफी खतरनाक है। और यहाँ हम उन महिलाओं की बात ही नहीं कर रहे हैं, जो शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण का शिकार होती हैं, लेकिन चिकित्सा की सहायता नहीं लेती।

हम चाहते हैं की समानता की इस लड़ाई में महिलाये ना सिर्फ खड़ी हो बल्कि सशक्त होकर अपनी मदद खुद करे, बजाए किसी मदद के  इन्तेजार में बैठी रहे! इस मुहिम में भारत के सभी सेलिब्रिटीज मदद कर रहे  हैं और हम चाहते हैं की बतौर  मीडिया हम आम जनता तक इस बात को अच्छे से पहुचाये ताकि एक बदलाव लाया जा सके। “डॉकप्लस पहल” के बारे में बात करने बॉलीवुड हस्तियां हिंदुजा हेल्थ केयर, खार में पहुची और महिला स्वास्थ्य के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए खुल कर बोली।

इसके बारे में बात करते हुए अभिनेत्री भाग्यश्री ने कहा, “स्माइल और हैप्पीनेस (खुशी और मुस्कुराहट) दोनों में ही ‘आई’ एक कारण से आता हैं, आपको अपने आप को पहले ध्यान में रखना होगा। महिलाओं का स्वास्थ्य अक्सर उनके जीवन में पीछे छुट जाता हैं, क्योंकि वे अपने पति, बच्चों, परिवारों और घर/कैरियर को सँभालने में बीजी रहती हैं, और इसका आपकी शिक्षा या सामाजिक स्थिति से कुछ लेना देना नहीं हैं!” भाग्यश्री ने आगे कहा कि  “भारतीय महिलाओं को बचपन में ही सिखा दिया जाता हैं की उनका काम ‘देना’ और ‘संभालना’ हैं, और इसी चक्कर में उनका स्वास्थ्य पीछे छुट जाता हैं। महिलाओ का इमोशनल स्वास्थ्य अक्सर सूचना के अभाव, हार्मोनल असंतुलन या उचित समय पर इलाज और देखभाल का लाभ उठाने में देरी के कारण गड़बड़ा जाता हैं।”

मिस अर्थ और अभिनेत्री अलंकृता सहाय का कहना हैं, “अगर आप एक महिला हैं, तो भारत में आगे बढ़ना एक चुनौती है। आपको पुरुषों के समान महत्व और अवसर प्राप्त नहीं होते। वास्तव में हमें गंभीरता से नहीं लिया जाता क्योंकि हम महिला हैं। लेकिन हमारी सबसे बड़ी समस्या हमारी सुरक्षा है। जिस मर्दों के  समाज में हम रहते हैं, महिलाओं को हमेशा अधीनस्थ अस्तित्व की ओर धकेला जाता हैं, अगर हम लोगों को लगता है कि हमें माध्यमिक दर्जा दिया जाता हैं, तो यह हमारी गलती है।“

“DOCPLUS के साथ हम महिलाओं को उनकी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं से शर्माने की बजाए उन्हें पूरा करने के लिए शशक्त करना चाहते हैं। मदद लीजिये, इसमें शर्माने की कोई बात नहीं हैं। अगर हम खुल कर इसके बारे में बात नहीं करेगी, तो सरकार अन्य मुद्दों के बारे में बोलती रहेगी, जबकि वास्तव में उन्हें महिलाओं के लिए एक विशेष खंड बनाना चाहिए जो उनके स्वास्थ्य कल्याण के बारे में काम करे, ख़ासकर भारत जैसे विशाल देश में”।

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