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प्रभात मिश्रा | समसामायिक विषयों पर संगीत रचता एक जादूगर

सोहर और कजरी पर जल्द होंगे रैप लेकर हाजिर

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प्रभात मिश्रा | समसामायिक विषयों पर संगीत रचता एक जादूगर, जौनपुर जैसे छोटे शहर से निकल कर दिल्ली और मुंबई में अपनी मंज़िल तलाशना बहुत मुश्किल होता है। प्रभात मिश्रा के साथ भी यही परेशानी थी लेकिन हार ना मानने की जिद ने उन्हें कुछ ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जो लोगों का भला कर सके। जिसमें कोई मैसेज हो। गॉसिप गंज ने प्रभात मिश्रा से बात की।

गॉसिप गंज – प्रभात आपके लिए संगीत क्या है। ठीक है आपका प्रोफेशन है लेकिन समाज के लिए आप संगीत को किस नज़रिए से देखते हैं।

प्रभात मिश्रा – संगीत का माध्यम अलग है। मुझे मेरी तलाश इसकी ओर ले आई। दरअसल आप जितना संगीत को समझते हैं वो कर्णप्रिय होना चाहिए। वैसा नहीं है। दरअसल आप संगीत के माध्यम से समाज के गूढ़ रहस्यों पर से पर्दा उठाते हैं। बहुत सारी बातें हैं जो लोक संगीत में हैं खास तौर से अवधी और भोजपुरी में। मुझे उन रहस्यों पर से पर्दा उठाने की जिज्ञासा हुआ और बस खुद बा खुद मैं संगीत की ओर खिंचा चला आया।

गॉसिप गंज – वैसे संगीत की ओर आपका रूझान पहले से था या फिर अचानक से आपको लगा कि आप संगीत में ही जा सकते हैं।

प्रभात मिश्रा – जौनपुर के शुरुआती शिक्षा के वक्त मैं रेडियो खूब सुनता था। मुझे विविध भारती पसंद था। इसके अलावा टीवी पर रामायण देखता था तो उसका टाइटल सांग गुनगुनाता रहता था। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कहें या फिर रुझान मेरा तभी हो गया था। उसके बाद मैंने अपना ग्रेजुएशन इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किया। साल 2009 में मेरा ग्रेजुएशन पूरा हुआ। उसके बाद प्रयाग संगीत से मैंने संगीत सीखा। बचपन से जो संगीत रचा बसा था मेरे भीतर। मुझे इलाहाबाद में इस दिशा में काफी स्कोप दिखा। दोस्तों के बीच गाना गाता था तो लोग तारीफ करते थे। बस मेरा मनोबल बढ़ता रहा और मैंने सोच लिया कि मुझे गायक ही बनना है।

गॉसिप गंज – खैर आपको पता चल गया कि आप संगीत के लिए ही बने हैं। उसके बाद का सफर कैसा रहा।

प्रभात मिश्रा – 2010 में मैं दिल्ली आ गया था। एक भोजपुरी एल्बम की, लौंडा बिगड़ गया। इस एल्बम में कुल 8 गाने थे और सारे के सारे लोकप्रिय हो गए। लोगों को लगा कि शायद मैं कुछ कर सकता हूं। सही कहूं तो ये मेरे म्यूज़िकल करियर का टर्निंग प्वाइंट था। 2010 के आखिर में मैं मुंबई चला गया। वहां रहा लेकिन मुझे लगा कि वापस दिल्ली चलना चाहिए। अब रहता भले ही दिल्ली में हूं लेकिन काम के सिलसिले में मुंबई आना जाना लगा रहता है।

गॉसिप गंज – गाना कैसे चुनते हैं आप। खुद लिखते हैं या फिर कोई और लिखता है।

प्रभात मिश्रा – मेरे एक मित्र हैं दुर्गेश सिंह। हम दोनों मिलकर गाने लिखते हैं और फिर उसे गाते हैं। वो मेरे कॉलेज के जमाने के मित्र हैं काफी मदद ही हैं उन्होंने मेरी। रही बात कि मैं गाने के चुनता हूं। मेरा मानना है कि संगीत यथार्थ की परिभाषा कह सकता है। मुझे जो मुद्दे समझ में आते हैं कि उन पर गाना बनाया जाना चाहिए, मैं उस पर गाना लिख लेता हूं। बस यूं समझिए कि समसामायिक मुद्दों पर मैं अपने संगीत का फोकस रखता हूं।

गॉसिप गंज – समसामायिक मुद्दों पर आप लिखते हैं। वैसे ये किस तरह के मुद्दे होते हैं। जैसे समसामायिक को बहुत हार्डकोर सब्जेक्ट हो गया। उसमें गाने कैसे बना लेते हैं।

प्रभात मिश्रा – देखिए जो समाज में चल रहा है, मेरी कोशिश रहती हैं कि मैं उसे संगीत में पिरो कर लोगों के सामने पेश करूं। मैंने बिग बी के लिए गाना बनाया। उस गाने में अमिताभ बच्चन की पूरी बायोग्राफी है। मेरी कोशिश थी कि सिनेमा के महानायक के बारें लोगों को संगीत के ज़रिए बताया जाए। वैसे तो बायोग्राफी तो आपको इंटरनेट पर भी मिल जाएगी। ये मेरी शुरुआत थी साल 2013 में, जब मैंने बिग बी पर गाना लिखा। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ऊपर गाना लिखा, नमो नमो का मंत्र है जागा लोकतंत्र है। इसके अलावा शब्दकोष गाना है। नोटबंदी पर गाना लिखा। मैं वैसे गाने लिखता और गाता हूं जो समाज को सकारात्मक संदेश दे सकें। अभी दो बच्चों का कानून , इस गाने पर काम कर रहा हूं। बेरोज़गारी पर गाना लिखा है।

गॉसिप गंज – तो आप समाज में बदलाव लाने के लिए संगीत को माध्यम बनाना चाहते हैं।

प्रभात मिश्रा – दिल साफ हो, इरादे पक्के हों तो भविष्य दिखाई देता है। आने वाले वक्त की बातें सामने आने लगती हैं। मेरा मन लोगों के विचारों को पकड़ता है। दरअसल मुझे संगीत से क्रांति लानी हैं। आप मेरी बात पर हंस सकते हैं लेकिन मेरा मानना है कि संगीत से ज़बरदस्त चीज़ कुछ और हो नहीं सकती है। काम कर रहा हूं, परिणाम ऊपरवाले के हाथ में हैं। बाकी मेरा ध्यान तो इस पर रहता है कि मैं अपने संगीत के माध्यम से समाज में क्या बदलाव ला सकता हूं। उस पर पैनी नज़र रखता हूं।

गॉसिप गंज – आगे आप क्या करना चाहते हैं। मतलब आपको क्या लगता है कि आप इस संगीत के जगत में क्या कर सकते हैं।

प्रभात मिश्रा – जैसा मैंने बताया कि मुझे संगीत से क्रांति लानी हैं। मेरे तीन चार गाने आने वाले हैं। एक राधे राधे करके गीत है। इसके अलावा देशभक्ति पर एक गाना तैयार किया है। इसके साथ ही मैं एक और काम कर रहा हूं जो कम से कम भोजपुरी में मील का पत्थर साबित होगा। वो ये कि मैं भोजपुरी लोकसंगीत जैसे सोहर, कजरी, पचरा इसको रैप और हिपहॉप में लेकर आ रहा हूं जो युवाओं का बहुत पसंद आएगा।

गॉसिप गंज – आपने कभी सीरियल्स या फिल्मों में कोशिश नहीं की या फिर आपको मौका नहीं मिला।

प्रभात मिश्रा – ऐसा नहीं है कि मैंने कोशिश नहीं की। कोशिश की, रिएलिटी शोज़ में काम किया। लेकिन मुझे लगा कि मेरी सोच और मेरी शैली के लिए अलग प्लेटफॉर्म की ज़रूरत है। लिहाज़ा मैंने अपना अलग रास्ता चुन लिया। संगीत वही है जो आपको यथार्थ के करीब रखे। मुझे लगा कि मेरी शैली को बनाने के लिए मुझे खुद ही कुछ करना होगा। हां ठीक है सफलता का पैमाना अलग हो सकता है सभी के लिए लेकिन आपको बता दूं कि मुझे स्ट्रगल करने में कोई शर्म नहीं है।

गॉसिप गंज – बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। उम्मीद है कि आप अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे और संगीत के माध्यम से अलख जगाएंगे।

प्रभात मिश्रा – कोशिश तो यही है। बाकी आपसे बात करके मुझे भी अच्छा लगा। कम से कम लोगों के सामने मैं अपने उद्देश्य के बारे में अपनी बात रख सका।

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