Gossipganj
Film & TV News

मोहित गोस्वामी | डायरेक्शन का ऐसा खिलाड़ी जिसे प्रयोग से डर नहीं लगता

अपने हुनर से मुकाम हासिल करने की कोशिश

0 325

मोहित गोस्वामी | डायरेक्शन का ऐसा खिलाड़ी जिसे प्रयोग से डर नहीं लगता, मुंबई के एक उभरते हुए निर्देशक हैं मोहित गोस्वामी। जिनका बचपन से सपना था एक्टिंग। लेकिन जैसे जैसे तजुर्बों का किताब के पन्ने बढ़ते रहे। मोहित को समझ आ गया कि वो एक्टिंग नहीं बल्कि डायरेक्शन के लिए बने हैं। उन्होंने कोशिश की और उनकी शॉर्ट फिल्म्स को अवॉर्ड भी मिलने शुरु हो गए। मोहित से गॉसिप गंज के एडिटर मधुरेंद्र पाण्डे से बातचीत की।

मधुरेंद्र पाण्डे – मोहित गोस्वामी जी पहले ये बताएं कि अचानक से आपको मन में डायरेक्शन का ख्याल कैसे आ गया।

मोहित गोस्वामी –  मैंने अपनी अपनी स्कूलिंग पंचगनी के संजीवनी विद्यालय से की है। उसी दौरान फिल्मों की ओर मेरी रूचि थी। उसके बाद मैंने पुणे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। पढाई के दौरान ही मेरे दोस्त का एक एडिटिंग स्टूडियो था। मैंने सोचा कि चलो एडिटिंग सीख लेते हैं। बस उसके यहां से एडिटिंग सीख ली और बस ऐसे ही सफर चल पड़ा।

मधुरेंद्र पाण्डे – एडिटिंग के बाद आप डायरेक्शन में आ गए। तो आपने अपनी शुरुआत डायरेक्शन से ही क्यों नहीं की।

मोहित गोस्वामी – देखिए वो कहानी थोड़ी लंबी है। दरअसल पहले मेरा इंट्रेस्ट एक्टिंग की ओर था। मैं एक्टर बनना चाहता था। पुणे से जब मैंने ग्रेजुएशन कर लिया तो उसके बाद मैं मुंबई आ गया और यहां आकर मैंने ऑडिशन देने शुरु कर दिए। इसी दौरान मैंने अपनी एक शो रील भी बना ली। लेकिन मन में कहीं ना कहीं कुछ ऐसा चल रहा था जो मैं समझ नहीं पा रहा था और जब समझ में आया तो मैं डायरेक्शन की फील्ड में आ गया। अचानक से एक दिन मुझे एड दिखा कि मुंबई यूनिवर्सिटी में शॉर्ट टर्म डायरेक्शन की क्लासेज शुरु होने वाली हैं। मैंने एप्लाई कर दिया और बस जब डायरेक्शन सीखा। उसमें आखिरी दिन मुझे एक शॉर्ट फिल्म बनानी थी और सबसे बड़ी बात की उस फिल्म के लिए मुझे फर्स्ट प्राइज़ भी मिला।

मधुरेंद्र पाण्डे – आपके परिवार में कोई फिल्म का बैकग्राउंड है या आप पहले हैं।

मोहित गोस्वामी – देखिए आप मनोज कुमार जी को जानते होंगे। वो मेरे दादा के फर्स्ट कज़िन हैं। मुझे पहली नौकरी भी इसी वजह से मिली थी। मैं सरकार नाम का एक सीरियल आता था। मैंने उसमें बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया है। लेकिन होता है ना कि एक्टिंग का मन था तो एक दिन उसी सीरियल के लिए ऑडिशन भी दे दिया और मुझे सेकेंड लीड मिल गया। करीब 15 एपिसोड्स में मैंने काम किया। फिर उसके बाद मैं सोचता रहा कि आखिर मुझे क्या करना है। फिर एक एड प्रोडक्शन कंपनी के लिए काम किया। उसमें रहते हुए मैंने टोएडा, थम्सअप जैसे विज्ञापन बनाए।

मधुरेंद्र पाण्डे – आप शॉर्ट फिल्म बनाते हैं। आपके मन में ये विचार कैसे आया कि शॉर्ट फिल्म बनानी चाहिए।

मोहित गोस्वामी – मुझे लगा कि कुछ करना है। मैं वर्ल्ड सिनेमा काफी देख चुका हूं। लोग फिल्म देखते हैं और मैं समझने की कोशिश करता हूं कि आखिर ये फिल्म बनी कैसे। बस खुद ही शुरुआत कर दी। बहुत बड़े लेवल पर ना सही शॉर्ट फिल्म ही सही। मेरे पास किलर नॉक की स्क्रिप्ट थी।  उस पर काम करना शुरु कर दिया। उसी समय मुझे शिवानी गुप्ता मिली जिन्होंने इस फिल्म में लीड रोल किया है। उनसे बात की। बात बन गई। आपको बताऊं कि ये फिल्म मेरे घर पर शूट हुई है और महज दो दिन के शूट में ये फिल्म तैयार हो गई। उसके बाद इस फिल्म की एडिटिंग, साउंड वगैरह पर एक महीने लग गया। फिर जब फिल्म फाइनल हो कर मेरे पास आई तो मुझे लगा कि मैं कुछ कर सकता हूं।

मधुरेंद्र पाण्डे – फिल्म बन गई। उसके बाद आपका आत्मविश्वास भी बढ़ गया लेकिन आगे का रास्ता कैसे बना।

मोहित गोस्वामी – अगर आप मन लगा कर काम करते हैं तो चीजें अपने आप ही सुधरती जाती हैं। फिल्म जब बन कर आ गई तो मैंने इसे कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भेजा। वहां ये फिल्म दिखाई गई और शिवानी गुप्ता को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला। उसके बाद तो पूछिए मत। मुझे समझ आ चुका था कि मैं एक्टिंग के लिए नहीं डायरेक्शन के लिए बना हूं। उसके बाद इस फिल्म को दूसरे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी भेजा वहां भी ये फिल्म दिखाई गई और लोगों ने काफी पसंद की। कह सकते हैं कि ये फिल्म मेरे लिए टर्निंग प्वाइंट थी।

मधुरेंद्र पाण्डे – फिल्म अवसर में भी आपने डायरेक्शन किया है। ये फिल्म आपको कैसे मिली।

मोहित गोस्वामी – मेरा एक दोस्त है विक्रांत मैं उसके साथ जिम जाता हूं। एक दिन उसने मुझसे कहा कि वो मुझे किसी से मिलवाना चाहता है। मैंने कहा चलो। जब गए तो फिल्म अवसर के प्रोड्यूसर से मुलाकात हुई। पहले तो उन्होंने मेरा टेस्ट लिया कि मुझे कितना डायरेक्शन आता है और फिर जब उन्हें भरोसा हो गया दो चार मीटिंग्स के बाद, तब उन्होंने मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट दी। मैं इसका स्क्रीन प्ले लिखा। चूंकि मैं स्क्रीन प्ले का कोर्स भी कर चुका था तो मुझे पता था कि क्रिस्पी स्क्रीन प्ले कैसे लिखा जाना है। खैर इस फिल्म की सबसे खास बात थी कि मुझे सर ने किसी काम के लिए कभी भी रोका नहीं और ये फिल्म बन कर तैयार हो गई। इस फिल्म को भी बाहर के देशों के कई फेस्टिवल्स में भेजा गया। सबसे बड़ी बात कि इस फिल्म ने अब तक 6 एवार्ड जीत लिए है।

मधुरेंद्र पाण्डे – अवसर आपके लिए अच्छा अवसर लेकर आई। इसके बाद का क्या सोचा है।

मोहित गोस्वामी – सर के साथ ही मैं अगली फिल्म कर रहा हूं। उसमें मैं डायरेक्टर नहीं बल्कि एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़ा हूं। इसके अलावा मेरे पास तीन मराठी फिल्मों की स्क्रिप्ट तैयार है। बस वो कभी भी शुरु कर सकता हूं।  अब खुशी होती है कि हां मैं कुछ कर सकता हूं। कुछ ऐसा जो सबसे अलग है।

मधुरेंद्र पाण्डे – आपके परिवार वालों का कैसा सपोर्ट रहा आपकी इस यात्रा में।

मोहित गोस्वामी – परिवार का सपोर्ट ना होता तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच सकता था। मेरे पिता और मां दोनों ने मेरा पूरा साथ दिया है। इसके अलावा दोस्तों का भी एहसानमंद हूं। उन लोगों ने भी मेरी पूरी मदद की। अब आगे देखते हैं कि क्या होता है।

मधुरेंद्र पाण्डे – आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा और उम्मीद करते हैं कि आप आगे नामचीन डायरेक्टर्स में शुमार करेंगे।

मोहित गोस्वामी – मुझे भी। धन्यवाद। मैं तो बस कोशिश करता हूं।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Loading...