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जॉनी लीवर, जिसे कॉमेडी का बादशाह कहते हैं, जन्मदिन मुबारक

जॉनी लीवर, जिसे कॉमेडी का बादशाह कहते हैं, जन्मदिन मुबारक  , एक चेहरा उस वक्त बेहद खूबसूरत दिखता है जब वह खिलखिलाकर हंसे। हंसता हुआ चेहरा पॉजिटिव एनर्जी देने का काम करता है और किसी को हंसाना बहुत ही बड़ी कला होती है। इस कला में जॉनी लीवर ने महारथ हासिल की हुई है।

तेलुगू क्रिश्चियन परिवार में जन्म लेने वाले जॉनी लीवर फिल्मों में आने से पहले हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड में काम किया करते थे। जहां वह कुछ सीनियर्स की मिमिक्री करते थे। सांतवी तक की पढ़ाई करने वाला ये कॉमेडी किंग मिमिक्री से जुड़ा हुआ स्टेज शो भी करता था, ऐसे ही एक स्टेज शो के दौरान सुनील दत्त की नजर उन पर पड़ी। बस फिर क्या था जॉनी लीवर की मिमिक्री के स्टाइल ने सुनील दत्त पर ऐसा प्रभाव डाला कि उन्होंने जॉनी लीवर को फिल्मों में ब्रेक दिलवाया।

लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने वाले जॉनी को सबसे पहले 1982 में आई फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में काम मिला, लेकिन उन्हें उस फिल्म से कोई खास पहचान नहीं मिल सकी। इसके बाद भी जॉनी लीवर को फिल्म इंडस्ट्री में काफी लंबा संघर्ष करना पड़ा, जिसके बाद 1993 में आई फिल्म ‘बाजीगर’ में उन्हें बड़ी सफलता मिली। उसके बाद तो कॉमेडी रोल्स के लिए डायरेक्टर्स की पहली पसंद जॉनी लीवर ही बन गए।

फिल्म ‘बाजीगर’ के बाद जॉनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने खिलाड़ी, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कुंवारा, करण अर्जुन, कोयला, यस बॉस, आंटी नंबर 1, दूल्हे राजा, हेलो ब्रदर, मेला, कहो ना प्यार है, राजा हिंदुस्तानी, फिर हेरा फेरी, रेस, हाउसफुल 2, दिलवासे जैसी फिल्मों को मिलाकर करीब 300 फिल्मों में काम किया है।

14 अगस्त 1957 को जन्म लेने वाले मशहूर कॉमेडियन जॉनी आज अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। यूं तो उन्हें देश में हर कोई जानता है, लेकिन बहुत ही कम लोग उनके फिल्मी सफर और फिल्मों में एंट्री से जुड़ी दिलचस्प बातें जानते होंगे। फिल्मी जगत के कई कलाकारों की तरह ही जॉनी लीवर ने अपनी जिंदगी में कड़ा संघर्ष किया है। फिल्मों में एक बेहद ही खास जगह बनाने के लिए भी उन्होंने कड़ी मेहनत की है। जॉनी लीवर को हिंदी फिल्म स्टारों की मिमिक्री करने में महारथ हासिल थी।